क्यों बेअसर हो जाते है मोटिवेशनल विचार कुछ वक्त बाद ?

31 अक्तूबर 2019   |  शिल्पा रोंघे   (583 बार पढ़ा जा चुका है)

अब हम उस दौर में आ गए है जब दोस्त या रिश्तेदार या परिचित सीधे सीधे कोई बात कहने के बजाए मोटिवेशनल क्वोट का सहारा लेने लगे है कभी कभी वो कोई बात सामने वाले से पूछना चाहते है तब भी मोटिवेशनल क्वोट भेज देते है या ऐसा कोई वीडियो जिससे वो अपनी बात सामने वाले को समझा सके, या सलाह दे सके ।

रही बात मोटिवेशन की तो मैं यह नहीं कहना चाहती कि वो बेअसर होता है, बहुत से लोग किताब या मोटिवेशनल फिल्म देखकर भी प्रेरित होते है यहां तक की अपने करियर का निर्णय भी ले डालते है और सफल हो जाते है। शुरूआती स्तर मोटिवेशनल वीडियो बहुत काम आते है किसी का खोया हुआ उत्साह जगाने में या फिर आत्मविश्वास बढ़ाने में, लेकिन ऐसा क्यों होता है कि एक वक्त के बाद इनका असर कम होने लगता है और वो उतने उपयोगी नहीं रह जाते है जितने की वो पहले होते है इसका कारण है कि वो एक सामान्य दृष्टिकोण लेकर चलते है यानि सभी के लिए होते है। हो सकता है जिसे आप क्वोट भेजकर समझाने की कोशिश करते है उसकी उलझन थोड़ी अलग हो यानि सबकी व्यक्तिगत ज़िंदगी एक सी नहीं होती है तो उसे एक ही पैमाने पर तौलना गलत है इसलिए हो सकता है कि आप कहने कुछ और जा रहे हो और समझने वाला उसका कुछ और ही अर्थ निकाल ले। अगर आप सचमुच अपने दोस्त या रिश्तेदार से कुछ पूछना चाहे तो बड़ी विनम्रता पूर्वक उससे उसकी उलझन के बारे में पूछे साफ शब्दों में, ना कि क्वोट या फिर किसी मोटिवेशनल वीडियो का सहारा ले। अगर वो ना बताना चाहे तो उस पर दबाव ना डाले क्योंकि हर किसी की पर्सनल ज़िंदगी होती है।

अब कोई बच्चा ऐजुकेशन में कमजोर है और आप उसे अपनी परफार्मेंस सुधारने के बजाए सीधे स्कूल में टॉप आने वाला क्वोट भेज दे। अगर कोई अपने करियर में स्ट्रगल कर रहा है आप उसे कोई वैश्विक सेलिब्रिटी कैसे मशहूर हुआ और करोड़पति बना इस तरह के वीडियो भेजे तो हो सकता है वो कुछ वक्त के लिए मोटिवेटेड महसूस करे लेकिन कुछ वक्त के बाद यथार्थ से उसका सामना होगा तो ये उसके सामने बेअसर होगा ही।

मैं यह नहीं कहती कि मोटिवेशनल क्वोट और वीडियो हमारा और हमारे दोस्तों का उत्साह नहीं बढ़ाते है लेकिन कुछ सवालों का जवाब इंसान को खुद ही ढूंढना होता है क्योंकि खुद से बेहतर इंसान को कोई और नहीं समझ सकता है।

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