मन का उपादान :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

01 नवम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (418 बार पढ़ा जा चुका है)

मन का उपादान :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में मनुष्य एक चेतन प्राणी है , उसके सारे क्रियाकलाप में चैतन्यता स्पष्ट दिखाई पड़ती है | मनुष्य को चैतन्य रखने में मनुष्य के मन का महत्वपूर्ण स्थान है | मनुष्य का यह मन एक तरफ तो ज्ञान का भंडार है वहीं दूसरी ओर अंधकार का गहरा समुद्र भी कहा जा सकता है | मन के अनेक क्रियाकलापों में सबसे महत्वपूर्ण है मन के उपादान को जानना | मन का उपादान क्या है ? और इसका ज्ञाता कौन है ? इसे कौन समझ पाया है ? यह समझ लेने के बाद कुछ भी समझना शेष नहीं रह जाता है | मन के उपादान के विषय में हमारे महापुरुषों ने बताया है कि किसी वस्तु की तृष्णा से उसे ग्रहण करने की जो प्रवृत्ति होती है उसे ही उपादान कहा जाता है | "प्रत्यीयसमुत्पादन" या " तण्हापच्चया उपादानं" इसी का प्रतिपादन करती है | मानव जीवन में यदि उपादान अर्थात तृष्णा ना होती तो मनुष्य का जीवन बड़ा शांत होता , क्योंकि इसी उपादान के ही कारण प्राणी के जीवन की सारी भागदौड़ होती है और इसी को भव भी कहा गया है | मनुष्य दिन रात शूकर - कूकर की तरह इसी उपादान के कारण दौड़ता रहता है | तृष्णा के ना होने से उपादान भी नहीं होता और उपादान के निरोध से भव का निरोध हो जाता है , और जिसने भव का निरोध कर लिया उसका मोक्ष प्राप्त करना सरल हो जाता है | कई बार लोगों के सामने एक समस्या बार-बार आती है और वह कहते हैं कि जब हम ध्यान करने बैठते हैं तो अचानक ध्यान छूट जाता है और मन संकल्प विकल्पों में उलझ जाता है , क्योंकि ध्यान के समय बहुत सारे विचार और स्मृतियां मन में आती रहती हैं जिसके कारण ध्यान भंग हो जाता है | ध्यान के समय संकल्प - विकल्पों के आने का एकमात्र कारण है मनुष्य के अंदर बैठी हुई तृष्णा अर्थात एक प्यास है जो इन संकल्प विकल्पों को बार-बार मस्तिष्क पर उत्केरित करती है इसे ही मन का उपादान कहा जाता है | इस मन के उपादान को वही जान सकता है जो अपने मन के अंदर बैठी हुई तृष्णा को शांत करने में सक्षम हो | इसको जानने के लिए सबसे पहले यह जानने का प्रयास करना होगा तृष्णा का कार्य क्या है ? तृष्णा ही मनुष्य के मन में पदार्थों के प्रति प्रियता और अप्रियता कू स्थित पैदा करती है | इसी तृष्णा के भव जाल में फंस कर मनुष्य कर्म करता रहता है | मन के उपादान का होना भी बहुत आवश्यक है क्योंकि इसके बिना संसार का कोई भी कार्य नहीं हो सकता है , परंतु जहां मनुष्य का संयम थोड़ा ढीला होता है वही मनुष्य डगमगाने लगता है |*


*आज संसार में जितने भी अनाचार , पापाचार , अत्याचार हो रहे हैं उसका कारण मानव हृदय में बैठी हुई बेलगाम तृष्णा ही है | आज मनुष्य तृष्णा इतना ज्यादा बढ़ गई है कि वह स्वयं नहीं विचार कर पाता कि क्या प्राप्त करना उचित है और क्या अनुचित | लोग कहते हैं कि कितना भी प्रयास करो परंतु इस तृष्णा से मन नहीं हटता है | तृष्णा के विषय में जानकर उसको संयमित करने के लिए मनुष्य को अध्यात्म पथ का पथिक बनना पड़ेगा , क्योंकि यह विस्तृत विषय है और इसे जानने के लिए मनुष्य को चिंतन करना होगा | मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि मनुष्य को सदैव अपने हृदय में उत्पन्न हो रहे संकल्प और विकल्पों का चयन करना चाहिए , क्योंकि कल्पना से ही जीवन है परंतु कल्पना ऐसी नहीं होनी चाहिए कि वह मनुष्य को जीवन से ही च्युत कर दे | निष्क्रिय एवं नकारात्मक कल्पना को वहीं पर समाप्त कर देना चाहिए क्योंकि नकारात्मक कल्पना ही जीवन में सबसे ज्यादा घातक होती है | यह सत्य समझने की आवश्यकता है कि मानव जीवन से तृष्णा तो जीवन भर नहीं समाप्त हो सकती परंतु हमारे जीवन में सबसे ज्यादा बाधक नकारात्मक संकल्प विकल्पों का उदय होना है | इनसे मुक्ति पाने का एक ही उपाय है कि मन के उपादान अर्थात तृष्णा का क्षय करना | तृष्णा का क्षय तब होगा जब मानव हृदय में समता का अभ्यास बढ़ेगा | समता का अभ्यास करने से मन में उत्पन्न हो रहे संकल्प विकल्पों का आपस में विलय होगा और इस तृष्णा से मुक्ति मिल सकती है | परंतु इसके लिए मनुष्य को प्रतिदिन कुछ साधना अवश्य करनी पड़ेगी |*


*मन के उपादान को जानना और जानने के बाद उस पर विचार करने के उपरांत उसे साधने का प्रयास करने से ही इस भव से मुक्ति संभव है , अन्यथा जीवन भर शूकर - कूकर की तरह भागदौड़ में ही जीवन व्यतीत हो जायेगा |*

अगला लेख: नारी का त्याग / अहोई अष्टमी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
06 नवम्बर 2019
🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻 *इस धरती पर अनेकों जीव विचरण कर रहे हैं इनमें सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य को कहा गया है | चौरासी लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ मानव योनि कही गई है | साधारण से दिखने वाले मनुष्य में इतनी शक
06 नवम्बर 2019
22 अक्तूबर 2019
*भारत देश में अपने परिवार तथा समाज को संपन्न एवं दीर्घायु की कामना से नारियों ने समय-समय पर कठिन से कठिन व्रत का पालन किया है | वैसे तो वर्ष भर कोई न कोई पर्व एवं त्योहार यहां मनाया जाता रहता है , परंतु कार्तिक मास विशेष रुप से पर्व एवं त्योहारों के लिए माना जाता है | कार्तिक मास में नित्य नए-नए त्य
22 अक्तूबर 2019
03 नवम्बर 2019
*भारतीय परंपरा में आदिकाल से एक शब्द प्रचलन में रहा है साधना | हमारे महापुरूषों ने अपने जीवन काल में अनेकों प्रकार की साधनायें की हैं | अनेकों प्रकार की साधनाएं हमारे भारतीय सनातन के धर्म ग्रंथों में वर्णित है | यंत्र साधना , मंत्र साधना आदि इनका उदाहरण कही जा सकती हैं | यह साधना आखिर क्या है ? किस
03 नवम्बर 2019
20 अक्तूबर 2019
*इस धराधाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य सबकुछ प्राप्त करना चाहता है | परमात्मा की इस सृष्टि में यदि गुण हैं तो दोष भी हैं क्योंकि परमात्मा गुण एवं दोष बराबर सृजित किये हैं | यह मनुष्य के ऊपर निर्भर करता है कि वह क्या ग्रहण करना चाहता है | जीवन भर अनेक सांसारिक सुख साधन के लिए भटकने वाला मनुष्य सबकुछ प
20 अक्तूबर 2019
19 अक्तूबर 2019
*हमारा देश भारत आध्यात्मिक सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक दृष्टि से आदिकाल से ही सर्वश्रेष्ठ रहा है | संपूर्ण विश्व भारत देश से ही ज्ञान - विज्ञान प्राप्त करता रहा है | संपूर्ण विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहां समय-समय पर ईश्वरीय शक्तियों ने अवतार धारण किया जिन्हें भगवान की संज्ञा दी गई | भगवान धरा धा
19 अक्तूबर 2019
12 नवम्बर 2019
*आदिकाल से ही से ही इस धराधाम पर अनेकों योद्धा ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपनी शक्तियों का संचय करके एक विशाल जनसमूह को अपने वशीभूत किया एवं उन्हीं के माध्यम से मानवता के विरुद्ध कृत्य करना प्रारंभ किया | पूर्वकाल में ऐसे लोगों को राक्षस या निशाचर कहा जाता था | इनके अनेक अनुयायी ऐसे भी होते थे जिनको यह न
12 नवम्बर 2019
31 अक्तूबर 2019
*मनुष्य इस धरा धाम पर जन्म लेकर के जीवन भर अनेकों कृत्य करते हुए अपनी जीवन यात्रा पूर्ण करता है | इस जीवन अनेक बार ऐसी स्थितियां प्रकट हो जाती है मनुष्य किसी वस्तु , विषय या किसी व्यक्ति के प्रति इतना आकर्षित लगने लगता है कि उस वस्तु विशेष के लिए कई बार संसार को भी ठुकराने का संकल्प ले लेता है | आखि
31 अक्तूबर 2019
14 नवम्बर 2019
*सृष्टि के आदिकाल में वेद प्रकट हुए , वेदों का विन्यास करके वेदव्यास जी ने अनेकों पुराणों का लेखन किया परंतु उनको संतोष नहीं हुआ तब नारद जी के कहने से उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की | श्रीमद्भागवत के विषय में कहा जाता है यह वेद उपनिषदों के मंथन से निकला हुआ ऐसा नवनीत (मक्खन) है जो कि वेद
14 नवम्बर 2019
09 नवम्बर 2019
*सनातन धर्म में मानव जीवन को चार आश्रमों में बांटा गया है , जिनमें से सर्वश्रेष्ठ आश्रम गृहस्थाश्रम को बताया गया है , क्योंकि गृहस्थ आश्रम का पालन किए बिना मनुष्य अन्य तीन आश्रम के विषय में कल्पना भी नहीं कर सकता | मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है समाज का निर्माण परिवार से होता है | व्यक्ति के जीवन में
09 नवम्बर 2019
28 अक्तूबर 2019
*कार्तिक माह में चल रहे "पंच महापर्वों" के चौथे दिन आज अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा | भारतीय सनातन त्योहारों की यह दिव्यता रही है कि उसमें प्राकृतिक , वैज्ञानिक कारण भी रहते हैं | प्रकृति के वातावरण को स्वयं में समेटे हुए सनातन धर्म के त्योहार आम जनमानस पर अपना अमिट प्रभाव छोड़ते हैं
28 अक्तूबर 2019
31 अक्तूबर 2019
*इस संसार में समस्त जड़ - चेतन को संचालित करने वाला परमात्मा है तो मनुष्य को क्रियान्वित करने वाला है मनुष्य का मन | मनुष्य का मन स्वचालित होता है और मौसम , खान - पान , परिस्थिति एवं आसपास घट रही घटनाओं के अनुसार परिवर्तित होता रहता है | जिस प्रकार मनुष्य के जीवन में बचपन , जवानी एवं बुढ़ापा रूपी ती
31 अक्तूबर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x