मन की विचित्रता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

02 नवम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (478 बार पढ़ा जा चुका है)

मन की विचित्रता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में जन्म लेने के बाद मनुष्य अपने संपूर्ण जीवन काल में अनेकों मित्र एवं शत्रु बनाता है | वैसे तो इस संसार में मनुष्य के कर्मों के अनुसार उसके अनेकों शत्रु हो जाते हैं जिनसे वह युद्ध करके जीत भी आता है , परंतु मनुष्य का एक प्रबल शत्रु है जिससे जीत पाना मनुष्य के लिए बहुत ही कठिन होता है | वह शत्रु है स्वयं मनुष्य का मन | जैसे शत्रु से युद्ध करते समय इस बात का ध्यान रखना होता है कि ना जाने कब आक्रमण हो जाए , कब , किस ओर से , किस रूप में शत्रु प्रगट हो जाए उसी प्रकार मन रूपी शत्रु के प्रत्येक कार्य पर दिव्य दृष्टि रखना चाहिए | जहां मन तुम्हें अपने बस में करके उल्टा सीधा कराना चाहे वहाँ उसके व्यवहार में हस्तक्षेप करके स्वयं को संभाल लेना चाहिए | क्योंकि मन बड़ा बलवान शत्रु है इस से युद्ध करना भी अत्यंत दुष्कर कार्य हैं | इससे युद्धकाल में एक विचित्रता है यदि युद्ध करने वाला दृढ़ता से युद्ध में संलग्न रहते हुए इच्छा शक्ति में निरंतरता बनाए रखते हुए यदि लगातार अपने मन से युद्ध किया जाए तो विजय प्राप्त की जा सकती है | प्रत्येक मनुष्य को यह प्रयास करना चाहिए कि उसका मन सदैव व्यस्त रहे | मन को नए-नए कार्य सौंप देना चाहिए , क्योंकि जब यह मन खाली रहता है , इसके पास जब कोई कार्य नहीं होता है तो मन में दुर्व्यसन के भाव उत्पन्न हो जाते हैं | यही मन की बिचित्रता है , इसको समझने का प्रयास जिसने किया वह अपने जीवन में सफल हो गया और जो इस रहस्य को नहीं समझ पाया वह अपने जीवन में भटकता ही रहा है |*


*आज जिस प्रकार का समाज देखने को मिल रहा है उससे यह कहा जा सकता है कि आज अपने मन पर नियंत्रण करने वालों की संख्या बहुत अधिक नहीं रह गई है | अधिकतर मनुष्य मन के बहकावे में आकर के ऐसे ऐसे कृत्य कर रहे हैं जिसका उनको पश्चाताप भी नहीं होता है | आज अनेक लोग कहते हैं कि मन की विचित्रता को कैसे जाना जाय ? मन पर नियंत्रण कैसे किया जाय ? ऐसे सभी लोगों को मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" सिर्फ इतना ही बताना चाहूंगा कि जब जब तुम्हारे अंतःकरण में वासना की प्रबल जंग उत्पन्न हो निश्चयात्मक बुद्धि को जागृत करके मन से थोड़ी देर के लिए पृथक होकर के इसके द्वारा किए जा रहे कृत्यों पर तीव्र दृष्टि रखी जाय | जब अपने मन का आकलन स्वयं किया जाता है तो मन की विचार श्रृंखला टूट जाती है , और जब मन की विचार संख्या टूट जाएगी तो मन और मन के साथ स्वयं मनुष्य चलायमान नहीं हो सकता है | मनुष्य को यह सोचना चाहिए कि मन के व्यापार के साथ आत्मा की समस्वरता न होने पावे | यह सत्य है कि यह तुरंत नहीं हो पाएगा लेकिन धीरे धीरे अभ्यास के द्वारा अपने मन को यदि समय समय पर मनुष्य आज्ञा देता रहे तो यह मन मनुष्य को आज्ञा ना दे करके एक आज्ञाकारी दास की तरह मनुष्य के नियंत्रण में रहकर के कार्य करने लगेगा |*


*मनुष्य सबसे विचित्र प्राणियों में से एक प्राणी है | मनुष्य की विचित्रता का कारण मनुष्य के मन का विचित्र होना ही है | मनुष्य के मन को जान पाना , समझ पाना कभी-कभी स्वयं मनुष्य के बस के बाहर की बात हो जाती है | यही मन की विचित्र का है |*

अगला लेख: नारी का त्याग / अहोई अष्टमी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
22 अक्तूबर 2019
*भारत देश में अपने परिवार तथा समाज को संपन्न एवं दीर्घायु की कामना से नारियों ने समय-समय पर कठिन से कठिन व्रत का पालन किया है | वैसे तो वर्ष भर कोई न कोई पर्व एवं त्योहार यहां मनाया जाता रहता है , परंतु कार्तिक मास विशेष रुप से पर्व एवं त्योहारों के लिए माना जाता है | कार्तिक मास में नित्य नए-नए त्य
22 अक्तूबर 2019
10 नवम्बर 2019
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !!*सनातन धर्म की दिव्यता विश्व विख्यात है | संपूर्ण विश्व ने सनातन धर्म के ग्रंथों को ही आदर्श मान कर दिया जीवन जीने की कला सीखा है | प्राचीन काल में शिक्षा का स्तर इतना अच्छा नहीं था जितना इस समय है परंतु हमारे पूर्वज अनुभव के आधार पर समाज के सारे कार्य कुशलता से संपन्न कर दे
10 नवम्बर 2019
01 नवम्बर 2019
*इस संसार में मनुष्य एक चेतन प्राणी है , उसके सारे क्रियाकलाप में चैतन्यता स्पष्ट दिखाई पड़ती है | मनुष्य को चैतन्य रखने में मनुष्य के मन का महत्वपूर्ण स्थान है | मनुष्य का यह मन एक तरफ तो ज्ञान का भंडार है वहीं दूसरी ओर अंधकार का गहरा समुद्र भी कहा जा सकता है | मन के अनेक क्रियाकलापों में सबसे महत्
01 नवम्बर 2019
31 अक्तूबर 2019
*मनुष्य इस धरा धाम पर जन्म लेकर के जीवन भर अनेकों कृत्य करते हुए अपनी जीवन यात्रा पूर्ण करता है | इस जीवन अनेक बार ऐसी स्थितियां प्रकट हो जाती है मनुष्य किसी वस्तु , विषय या किसी व्यक्ति के प्रति इतना आकर्षित लगने लगता है कि उस वस्तु विशेष के लिए कई बार संसार को भी ठुकराने का संकल्प ले लेता है | आखि
31 अक्तूबर 2019
19 अक्तूबर 2019
*हमारा देश भारत आध्यात्मिक सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक दृष्टि से आदिकाल से ही सर्वश्रेष्ठ रहा है | संपूर्ण विश्व भारत देश से ही ज्ञान - विज्ञान प्राप्त करता रहा है | संपूर्ण विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहां समय-समय पर ईश्वरीय शक्तियों ने अवतार धारण किया जिन्हें भगवान की संज्ञा दी गई | भगवान धरा धा
19 अक्तूबर 2019
06 नवम्बर 2019
क्यों ये मन कभी शांत नहीं रहता ?ये स्वयं भी भटकता है और मुझे भी भटकाता है।कभी मंदिर, कभी गॉंव, कभी नगर, तो कभी वन।कभी नदी, कभी पर्वत, कभी महासागर, तो कभी मरुस्थल।कभी तीर्थ, कभी शमशान, कभी बाजार, तो कभी समारोह।पर कहीं भी शांति नहीं मिलती इस मन को।कुछ समय के लिये ध्यान हट जाता है बस समस्याओं से।उसके
06 नवम्बर 2019
28 अक्तूबर 2019
*कार्तिक माह में चल रहे "पंच महापर्वों" के चौथे दिन आज अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा | भारतीय सनातन त्योहारों की यह दिव्यता रही है कि उसमें प्राकृतिक , वैज्ञानिक कारण भी रहते हैं | प्रकृति के वातावरण को स्वयं में समेटे हुए सनातन धर्म के त्योहार आम जनमानस पर अपना अमिट प्रभाव छोड़ते हैं
28 अक्तूबर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x