छोटे शहर की खुशबू

09 नवम्बर 2019   |  शिल्पा रोंघे   (446 बार पढ़ा जा चुका है)

छोटे शहर की खुशबू


जब छोटे शहरों के लोग रूख़
बड़े शहरों का करते है।
वो चंपा चमेली से हो जाते
हैं, महक साथ ले जाते हैं।
अपने पैरों की मिट्टी बिखेर कर आते है,

जहां कई और फूल उग आते है,

जहां भी जाते है अपनी पहचान साथ लेकर जाते है, वापस फिर
उसी महक को लेकर अपने छोटे से शहर
में जाते है, सब बदला -बदला सा उनको पाते हैं,
नहीं बदलती तो बस उनकी महक है जो दिखती नहीं
लेकिन बस जाती हैं उनकी सांसों में और बातों
में।


शिल्पा रोंघे

छोटे शहर की खुशबू

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शिल्पा रोंघे
11 नवम्बर 2019

कविता को पसंद करने के लिए शुक्रिया रेणु जी

रेणु
10 नवम्बर 2019

बहुत सुदर शिल्पा जी | छोटे शहर के संस्कार ऊँचे होते हैं , पर भौतिकता के मद में खोये बड़े शहर वाले ऐसा समझ नहीं पाते | हार्दिक स्नेह के साथ --

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