खाकी वर्दी काला कोट विवाद

10 नवम्बर 2019   |  शोभा भारद्वाज   (3431 बार पढ़ा जा चुका है)

खाकी वर्दी काला कोट विवाद

खाकी वर्दी, काला कोट विवाद

डॉ शोभा भारद्वाज

आजादी के बाद से कभी पुलिस वालों को उद्वेलित होते नहीं देखा है जबकि वकील अक्सर प्रदर्शन करते रहते हैं खाकी वर्दी एवं काला कोट का एक अलग तरह का रिश्ता है पुलिस का महत्वपूर्ण काम अपराधी पकड़ना एवं उसे कोर्ट में हाजिर करना है है वकील अपराधी के पक्ष में दलील देकर उन्हें सजा से बचाने या अपराधी के विरुद्ध दलीलें देकर उन्हें सजा दिलवाने की कोशिश करते हैं | न्यायाधीश तथ्यों के आधार पर फैसले कर अपराधी को सजा ,निर्दोष को बरी करने या साक्ष्यों के अभाव में बरी करने का काम करते हैं | तीस हजारी कोर्ट में मामूली बात पर वकील और पुलिस का विवाद ऐसा बढ़ा वकीलों ने आगजनी की पुलिस द्वारा सख्ती बरती गयी |

पुलिस के दर्द भी कम नहीं है आतंकवादी मनोवृत्ति के लोग जेहाद के नाम पर आतंकियों को सीमा पार से भेजते हैं सीमा की सुरक्षा सेना करती है देश के भीतर के खतरे को पुलिस निपटती है | नागरिकों की सुरक्षा में सुरक्षा तन्त्र को हर वक्त अलर्ट रहना पड़ता है| आये दिन आने वाली आतंकवादियों की धमकियां या अलर्ट रहने के टिप्स कहीं भी कभी भी बम प्लांट किया गया है, किसी की शरारत भरे टेलीफोन लेकिन कार्यवाही तुरंत करना जरूरी है |पुलिस के सिर दर्द बढ़ते जा रहे हैं | अपराधी फलते फूलते रहते हैं अब तो किशोर अपराधी भी पुलिस को चुनौती देते नजर आते हैं जिन्हें कम से कम सजा का विधान है | अपराधी नयीं – नयीं तकनीकों का इस्तेमाल कर अपराधों को अंजाम दे रहे हैं अपराध एक व्यवसाय बन गया है |जनता पुलिस से बहुत उच्च दर्जे की कार्यवाही की उम्मीद रखती है जिससे बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाई जा सके |अब तो पुलिस का सबसे बड़ा काम वीआईपी सुरक्षा है किस प्रकार की सुरक्षा बड़े नेताओं और अधिकारियों को दी जाएगी इसका निर्धारण सरकार द्वारा किया जाता है । खुफिया विभागों द्वारा दी गई सूचना के आधार पर वीआईपी को अलग-अलग श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है| भारत में सुरक्षा व्यवस्था को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है: जेड प्लस (Z+) (उच्चतम स्तर); जेड (Z), वाई (Y) और एक्स (X)सुरक्षा में तैनात वीआईपी के पीछे खड़े या उन्हें सुरक्षा घेरे में लिए काला चश्मा लगाये अधिकारी खतरे को भांपते ही जान पर खेल जाते के लिए तत्पर रहते हैं |

ट्रैफिक पुलिस का काम और भी मुश्किल होता जा रहा है जैसे ही अनियमितता में किसी को टोकने या उसका चालान कटते पर सामने वाला आपा खो देता है एक महिला बिना हेलमेट के अपने तीन बच्चों के साथ उलटी दिशा में आ रही थी ट्रैफिक पुलिस वाले ने टोका उसको मारने चढ़ गयी और पैसा मांगने का इल्जाम लगाने लगी ऐसे विषय मीडिया की खुराक है तुरंत ट्रैफिक पुलिस वाले को सस्पेंड कर दिया गया एक जागरूक नागरिक ने घटना का वीडियों बना लिया था जब उसने उसे वायरल किया महिला की करतूत सामने आई ऐसा अक्सर होता रहता है ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन शौक बन गया है रोकने पर पुलिस से लड़ना हाथापाई बहादुरी मानी जाती है पुलिस वाले छोटा कैमरा लगा कर काम कर रहे हैं | कई नाकों पर चेकिंग होती है इन्हीं में अपराधी , वाहन चोर पकड़े जाते हैं लेकिन आम वेहिकिल सवार को रुकना या जरूरी कागज दिखाना पसंद नहीं है | कई सिरफिरे पुलिस पर ही गाडी चढ़ा देते हैं या कांस्टेबल को काफी दूर तक घसीट कर ले जाते हैं कई बार चोटें लगती हैं जान भी चली जाती है |

पुलिस आजकल किस जोखिम से गुजरती है क्या कभी सोचा है पुलिस पर हमले करना हाथापाई करना आम बात हो जायेगी | अगर पुलिस अपराधी को गिरफ्तार करने किसी एरिया में जाती है आसपास के लोग महिलाओं को आगे कर अपराधी को बचाने को कोशिश करते है हुए पथराव कर पुलिस बल पर मारपीट करते हैं थानों पर हमला कर अपराधी को छुड़ा कर ले जाते हैं थानों का घेराव आम बात है पुलिस से लड़ने अपराधी की कम्यूनिटी भी आ जाती हैं लेकिन सुनवाई पुलिस की नहीं भीड़ तन्त्र में छुपे अपराधी की होती है केस बीच में ही रफा दफा हो जाता है क्रिमिनल को आजकल हथकड़ियों में कोर्ट में लेजाने का नियम नहीं हैं कहते हैं जब तक वह अपराध सिद्ध न हो किसी को अपराधी नहीं मान सकते ऐसे में बंदी मौका देख या ड्यूटी पर कांस्टेबल पर हमला कर भाग जाते हैं तुरंत पुलिस वाले को सस्पेंड कर दिया जाता है | न तीज न त्यौहार पर छुट्टी काम के लम्बे घंटे हर वक्त अलर्ट रहना उसके बाद भी समाज मे उन्हीं की निंदा की जाती है ‘एक राजनेता ने तो उनको ठुल्ला नाम देकर वाहवाही लूटी थी’ | क्या हम नहीं जानते सर्दी ,गर्मी बरसात हो रात के समय बाईक सवार पुलिस वाले सड़कों गलियों में गश्त करते हैं आपके घरों पर नजर रखते है |100 नम्बर की गाडी नाकों पर आपके लिए खड़ी रहती हैं |

वकीलों की हरकत, कितना भी वह अपने पक्ष में दलील दें स्वीकारणीय नहीं हैं उनके द्वारा कानून हाथ में लेने के बाद बिना पुलिस का पक्ष सुने हाईकोर्ट का फरमान पुलिस का क्षोभ एवं दर्द पुरानी पुलिस लाइन आईटीओ पर संगठित रूप से फूट पड़ा लेकिन उन्होंने न बसें तोड़ी न वाहन जलाये न पत्थर मारे न सार्वजनिक सम्पत्ति को नुक्सान पहुंचाया | अनुशासन में रह कर देश एक सभ्रांत नागरिक की भांति विरोध प्रदर्शन किया कुछ ने अपनी ड्यूटी पूरी कर कुछ ने अवकाश की अर्जी देकर ,रिटायर्ड पुलिस मैंन एवं उनके परिवार वालों ने धरना दिया शायद पहली बार जनता ने भी उनका दर्द समझा उनका साथ दिया उनके पक्ष को समझा |आप उत्सव मनाते हैं किसके बल पर ड्यूटी ? आप सुरक्षित महसूस करते हैं आप आराम से अपने घरों में सोते हैं अपराध होने की स्थिति पर पुलिस हर संभव प्रयत्न कर अपराधी को पकड़ती ,आपके जानमाल की रक्षा में सदैव तत्पर रहती है और न जाने कितने काम करती है हमारी दिल्ली पुलिस |उनके अपने बच्चे अकेले त्यौहार मनाते हैं प्रसव पीड़ा में बीबी को परिवार के सहारे भगवान भरोसे छोड़कर कर पुलिस का जवान मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी करता है | हमने उनकी शहादत भी देखी हैं | दिल्ली की जनसंख्या 2 करोड़ पहुंच चुकी है समूचे देश से लोग दिल्ली आते हैं जिनमें अपराधी भीं हैं | पुलिस का काम आसान नहीं हैं|

आतंकी गतिविधियों में लिप्त आतंकियों के मददगार,सफेद पोश नक्सलाईट , क्रिमिनल , हर तरह के घोटालेबाज, मनी लांड्रिंग,तस्करी, भूमाफिया ,ड्रग माफिया ,लुटेरे (एटीएम ,बैक लूटने जैसे कृत्य )लोन हजम कर जाना ,हत्यायें ,,सुपारी किलर, रेपिस्ट, कानून को ठेंगे पर रखने वाले , और भी अनेक अपराधी माफियाओं पर सरकारें सख्त हैं इन अपराधियों पर सदैव लगाम लगाने के लिए कार्यवाही का यत्न किया जाता रहा है आपराध इतने बढ़ चुके हैं केंद्र एवं राज्य सरकारें इन पर सख्त कदम उठाने के लिए कटिबद्ध है, अपराध जगत से जुड़े अपराधियों में खलबली के संकेत मिलते हैं अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण देने वाले बेचैन हो रहें हैं उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य खतरे में नजर आता है | यह अपराधियों के लिए ढाल बनने की कोशिश करते रहें हैं |वर्षों से कानून का राज चाहने वालों , शान्ति से जीवन जीने वाले लेकिन कानून का मजाक उड़ाने वालों में रस्साकशी देखने में आती है |

वकील आजकल परेशान हैं उद्वेलित हैं उनकी लम्बे समय तक रोजी रोटी कमाना अपराधों की बढ़ती संख्या पर निर्भर है , कोशिश हो रही है पीड़ित को त्वरित न्याय मिले, कोर्ट जल्दी फैसले सुनाये | अपराधी का एन्काउंटर, आजकल अपराधी भी समझदार हो गये हैं वह पुलिस के सामने खुद ही सरेंडर कर रहे हैं ज़िंदा रहेंगे तो उनका समय फिर आयेगा नहीं तो मौत |समाज भी अपराधी को पकड़ने का दबाब डालने लगता है उनके द्वारा किये कैंडल मार्च अपराधी की शीघ्र गिरफ्तारी पर जोर देते हैं | निर्भया केस जिससे सारा समाज हिल गया था मानवाधिकारवादियों पर नागरिक प्रश्न उठा रहे हैं मानवता के दुश्मनों के क्या मानवाधिकार ? वर्षों न्यायालयों में मुकदमें चलते रहते हैं वकील उन्हें हर चालबाजी से लम्बा खींचते रहते हैं इसमें और भी बहुत लोग पर्दे के पीछे सहायक होते हैं जैसे डाक्टर बीमारी के झूठे सर्टिफिकेट देकर कोर्ट में तारीख डलवा देना, मेडिकल रिपोर्ट में केस को हल्का कर देना |कई बार अपराधी वृद्ध हो जाता है जिसके साथ अपराध हुआ था कोर्ट कचहरी के चक्कर काट –काट कर अधमरा | कईयों का न्याय पाने की आशा में सर्वस्व बिक जाता है वकीलों की उखाड़ पछाड़ से अदालत में तारीखें मिलती रहती है , अपराधी को जमानत मिल जाती है वह फिर नया अपराध करते हैं ,कभी वह परोल पर बाहर आ कर मौज करते हैं| महत्वहीन जन हित याचिकायें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को परेशान कर रही हैं | वकीलों की एक फौज है जिनमें हरेक के पास काम नहीं है कई अपराधी किस्म के लोग भी इस पेशे में आ गये हैं | वकालत का पेशा यद्यपि बहुत अच्छा है निर्दोष को बचाना अपराधी को दंड दिलवाना दीवानी मामलों में न्याय हो लेकिन ऐसे वकील वह नहीं करते जो हाल ही में हमने देखा अनेक वीडियों क्लिप उनके कृत्यों पर प्रकाश डाल रहे हैं |

सिंगापुर जैसे कई देश हैं जहाँ पुलिस दिखाई नहीं देती फिर भी चुस्त दुरुस्त सार्वजनिक स्थानों पर कैमरे लगे रहते हैं जिनके द्वारा कंट्रोल कर अपराधियों के लिए कठोर दंड का विधान है |

अगला लेख: लौह पुरुष सरदार पटेल ,सच्ची श्रद्धांजली धारा 370 ,35A की समाप्ति है



रेणु
10 नवम्बर 2019

बहुत ज्ञानवर्धक आलेख आदरणीय शोभा जी | मुझे कई चींजों की जानकारी नहीं थी आपने अच्छा प्रकाश डाला | लोकतन्त्र | में सबको अपने अधिकार और अन्याय के प्रति आवाज उठाने का अधिकार है | पर न्यायपालिका के रखवाले और पुलिस जब आपने सामने हो जाए तो बहुत चिंतनीय है | सादर आभार

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