आज की युवा पीढ़ी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

10 नवम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (449 बार पढ़ा जा चुका है)

आज की युवा पीढ़ी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !!


*सनातन धर्म की दिव्यता विश्व विख्यात है | संपूर्ण विश्व ने सनातन धर्म के ग्रंथों को ही आदर्श मान कर दिया जीवन जीने की कला सीखा है | प्राचीन काल में शिक्षा का स्तर इतना अच्छा नहीं था जितना इस समय है परंतु हमारे पूर्वज अनुभव के आधार पर समाज के सारे कार्य कुशलता से संपन्न कर देते थे | पूर्व काल में परिवार एवं समाज में इतना सामंजस्य था कि लोग एक दूसरे की समस्या में बिना बुलाए ही समाधान करने लगते थे | हमारे पूर्वजों के पास पुस्तकीय ज्ञान तो नहीं था परंतु अपने संस्कार एवं संस्कृति के विषय में उनको संपूर्ण ज्ञान होता था | इस ज्ञान का स्रोत प्रत्येक गांव में सायंकाल के समय लगने वाली बुजुर्गों की चौपाल हुआ करती थी , जहां गांव के मुखिया बुजुर्गों के साथ बैठकर के धर्म-कर्म एवं समाज की चर्चा तो करते ही थे साथ ही अपने धर्म ग्रंथों में वर्णित कथाओं के रहस्य पर भी चर्चा करते थे | उन्हीं चर्चाओं से ज्ञान का विस्तार होता था एवं अनसुलझे रहस्य भी हमारे पूर्वज जाना करते थे , क्योंकि पूर्व काल में समाज के साथ-साथ अपने संस्कार एवं संस्कृति पर विशेष ध्यान दिया जाता था | गांव का युवा वर्ग बुजुर्गों का सम्मान किया करता था एवं कोई गलती होने पर अपने माता-पिता के अतिरिक्त गांव के किसी भी बुजुर्ग से डरता था क्योंकि पहले एक दूसरे के प्रति सम्मान तो था ही साथ ही यदि कोई दूसरा व्यक्ति युवा वर्ग को किसी गलती पर फटकार देता था तो घरवाले उसका बुरा ना मान करके संबंधित व्यक्ति को बधाई देते थे परंतु आज परिवेश परिवर्तित हो गया है |*


*आज मनुष्य ने बहुत प्रगति कर ली है | हिंदी से , संस्कृत एवं अंग्रेजी से अनेक उपाधियां लेने वाला मनुष्य आज आसमान में उड़ रहा है परंतु वह अपनी संस्कृति और संस्कार को भूलता चला जा रहा है | अपने सनातन के रहस्य एवं पुराणों में वर्णित कथानक के विषय में वह न तो विधिवत जानता है और ना ही जानना चाहता है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" प्रायः देखता हूं कि पढ़े लिखे शिक्षित लोग अपने बच्चों को लेकर किसी मंदिर में जाते हैं परंतु यदि किसी बच्चे ने कौतूहल बस अपने अभिभावकों से प्रश्न कर दिया कि "हनुमान जी को सिंदूर क्यों लगाते हैं ? या दुर्गा जी सिंह पर क्यों सवार है ? दुर्गा जी का त्रिशूल किस राक्षस के पेट में धंसा हुआ है ? तो अभिभावक ज्ञान के अभाव में बगले झांकने लगते हैं और बच्चों को बहलाने के लिए कोई भी उल्टा सीधा जवाब दे देते हैं या फिर डांट कर चुप करा देते हैं क्योंकि उन्होंने पुस्तकीय ज्ञान तो प्राप्त कर लिया है लेकिन अपनी संस्कृति एवं संस्कार को जानने का प्रयास नहीं किया है | आज गांव में चौपाल समाप्त हो गई है क्योंकि आज मनुष्य के पास इतना समय ही नहीं है कि वह किसी के पास बैठ सके | गांव के बुजुर्गों के सम्मान की बात को छोड़ दो मनुष्य अपने घर के बुजुर्गों का सम्मान नहीं कर पा रहा है और ना तो उनके पास समय ही देना चाहता है | इस संसार में सब कुछ पुस्तक पढ़ने से ही नहीं प्राप्त हो जाता बल्कि कुछ बुजुर्गों के अनुभव भी प्राप्त करने होते हैं | आज यदि सनातन संस्कृति धुंधली हो रही है तो उसका कारण वर्तमान शिक्षा पद्धति तो है ही साथ ही आज के मनुष्य का पाश्चात्य संस्कृति की ओर झुकाव भी एक कारण है | यदि अपने बच्चों के सामने उनकी किसी प्रश्न पर लज्जित नहीं होना है तो प्रत्येक मनुष्य को अपने धर्म कर्म एवं धार्मिक रहस्यों के विषय में ज्ञानार्जन करना ही होगा और यह ज्ञानार्जन सनातन धर्म ग्रंथों पहले से ही प्राप्त होगा | आज का मनुष्य अपने धर्म ग्रंथों से दूर होता चला जा रहा है यही कारण है कि उसे समय-समय पर अपने बच्चों के कौतूहल को शांत करने में झिझक हो रही है | व्यवसाय के लिए आधुनिक शिक्षा पद्धति आवश्यक है परंतु जीवन जीने की कला सीखने के लिए धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना ही होगा |*


*हम कितनी भी शिक्षा ग्रहण कर ले परंतु अपने बुजुर्गों के अनुभव की बराबरी कभी नहीं कर सकते | इसलिए प्रत्येक मनुष्य को शिक्षा के साथ-साथ बुजुर्गों के अनुभव को भी लेते रहना चाहिए और यह तभी हो पाएगा जब आज की पीढ़ी बुजुर्गों का सम्मान करेंगी |*

अगला लेख: मन की पवित्रता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
28 अक्तूबर 2019
*कार्तिक माह में चल रहे "पंच महापर्वों" के चौथे दिन आज अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा | भारतीय सनातन त्योहारों की यह दिव्यता रही है कि उसमें प्राकृतिक , वैज्ञानिक कारण भी रहते हैं | प्रकृति के वातावरण को स्वयं में समेटे हुए सनातन धर्म के त्योहार आम जनमानस पर अपना अमिट प्रभाव छोड़ते हैं
28 अक्तूबर 2019
18 नवम्बर 2019
*इस संसार में प्राय: दो शब्द सुनने को मिलते हैं शिक्षा एवं दीक्षा | शिक्षा एवं दीक्षा मानव जीवन की दिशा एवं दशा परिवर्तित करने में सक्षम होती है | जहाँ शिक्षा का अर्थ होता है ज्ञानार्जन करना वहीं दीक्षा का अर्थ दिशा प्राप्त करना बताया गया है | पूर्वकाल में गुरु के द्वारा पहले शिष्य की योग्यता के अनु
18 नवम्बर 2019
29 अक्तूबर 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves></w:TrackMoves> <w:TrackFormatting></w:TrackFormatting> <w:PunctuationKerning></w:PunctuationKerning> <w:ValidateAgainstSchemas></w:Val
29 अक्तूबर 2019
31 अक्तूबर 2019
क्
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedC
31 अक्तूबर 2019
30 अक्तूबर 2019
मित्रों , मैंने पहले एक लेख में बदलाव के कुछ सरल विषय लिखे थे जिनमें हमारे समाज को बदलने की आवश्यकता है. फिर मैंने ट्रैफिक के केवल तीन बिंदुओं पर आप सब का ध्यान आकर्षित किया था-फालतू हॉर्न बजाना; वाहन ठीक से पार्क करना एवं द
30 अक्तूबर 2019
21 नवम्बर 2019
बॉ
कुछ घटनाएं आपको और हमें ऐसे कचोटती हैं की पुछिये मत! कल एक ऐसा ही वाकया हुआ। औनलाइन दवाइयाँ खरीदने का दौर अब जबकि शुरू हो चुका है, फिर भी मैं दवा की दुकान पर ही जाना पसंद करता हुँ। इसके कई कारण हैं, जिसको इस पटल पर बता पाना शायद संभव नहीं है। सो कल भी पूर्वी दिल्ली की एक दवा-दुकान पर चला गया। मेरी द
21 नवम्बर 2019
16 नवम्बर 2019
*परमात्मा की बनाई यह सृष्टि निरन्तर क्षरणशील है | एक दिन सबका ही अन्त निश्चित है | सृष्टि का विकास हुआ तो एक दिन महाप्रलय के रूप में इसका विनाश भी हो जाना है , सूर्य प्रात:काल उदय होता है तो एक निश्चित समय पर अस्त भी हो जाता है | उसी प्रकार इस सृष्टि में जितने भी जड़
16 नवम्बर 2019
09 नवम्बर 2019
*सनातन धर्म में मानव जीवन को चार आश्रमों में बांटा गया है , जिनमें से सर्वश्रेष्ठ आश्रम गृहस्थाश्रम को बताया गया है , क्योंकि गृहस्थ आश्रम का पालन किए बिना मनुष्य अन्य तीन आश्रम के विषय में कल्पना भी नहीं कर सकता | मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है समाज का निर्माण परिवार से होता है | व्यक्ति के जीवन में
09 नवम्बर 2019
06 नवम्बर 2019
*इस धरा धाम पर जीवन जीने के लिए जिस प्रकार हवा , अग्नि एवं अन्न / जल की आवश्यकता होती है उसी प्रकार एक सुंदर जीवन जीने के लिए मनुष्य में संस्कारों की आवश्यकता होती है | व्यक्ति का प्रत्येक विचार , कथन और कार्य मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है इसे ही संस्कार कहा जाता है | इन संस्कारों का समष्टि रूप ही चर
06 नवम्बर 2019
21 नवम्बर 2019
*सनातन धर्म में सोलह संस्कारों का वर्णन मिलता है इन संस्कारों में एक महत्वपूर्ण संस्कार है विवाह संस्कार | मनुष्य योनि में जन्म लेने के बाद वैवाहिक संस्कार महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि सनातन धर्म में बताए गए चार आश्रम में सबसे महत्वपूर्ण है गृहस्थाश्रम | गृहस्थाश्रम में प्रवेश करने के लिए विवाह संस
21 नवम्बर 2019
22 नवम्बर 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves></w:TrackMoves> <w:TrackFormatting></w:TrackFormatting> <w:PunctuationKerning></w:PunctuationKerning> <
22 नवम्बर 2019
31 अक्तूबर 2019
*मनुष्य इस धरा धाम पर जन्म लेकर के जीवन भर अनेकों कृत्य करते हुए अपनी जीवन यात्रा पूर्ण करता है | इस जीवन अनेक बार ऐसी स्थितियां प्रकट हो जाती है मनुष्य किसी वस्तु , विषय या किसी व्यक्ति के प्रति इतना आकर्षित लगने लगता है कि उस वस्तु विशेष के लिए कई बार संसार को भी ठुकराने का संकल्प ले लेता है | आखि
31 अक्तूबर 2019
16 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य येन - केन प्रकारेण ईश्वर प्राप्ति का उपाय किया करता है | ईश्वर का प्रेम पिराप्त करने के लिए मनुष्य पूजा , अनुष्ठान , मन्दिरों में देवदर्शन तथा अनेक तीर्थों का भ्रमण किया करता है जबकि भगवान को कहीं भी ढूंढ़ने की आवश्यकता नहीं है मानव हृदय में तो ईश्वर का वास है ह
16 नवम्बर 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x