वैकुण्ठ चतुर्दशी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

11 नवम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (3153 बार पढ़ा जा चुका है)

वैकुण्ठ चतुर्दशी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म मैं कार्तिक मास का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है | अनेक त्योहारों एवं पर्वों को स्वयं में समेटे हुए कार्तिक मास अद्वितीय है | सनातन धर्म में अनेक देवी-देवताओं का पूजन उनके विशेष दिन पर होता है परंतु आज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव और भगवान विष्णु का पूजन एक साथ करने का विधान बताया गया है | आज के दिन को "बैकुंठ चतुर्दशी" के नाम से जाना जाता है | प्रत्येक व्यक्ति मृत्यु के बाद बैकुंठ जाने की इच्छा रखता है , बैकुंठ चतुर्दशी का इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज के दिन भगवान श्री विष्णु को कमलनयन की उपाधि प्राप्त हुई थी | पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु ने भगवान शिव प्रसन्न करने के लिए काशी में भगवान शिव को एक हजार स्वर्ण कमल के पुष्प चढ़ाने का संकल्प लिया परंतु भगवान विष्णु की परीक्षा लेने के लिए शंकर जी ने एक स्वर्ण पुष्प कम कर दिया | जब विष्णु जी को यह ज्ञात हुआ तो उन्होंने कमल पुष्प की जगह पर भगवान शिव को अपने नयन (आँख) अर्पित कर दिए | उनकी भक्ति पर प्रसन्न होकर प्रकट हो करके भगवान शिव की तपस्या को स्वीकार किया | भगवान शिव ने विष्णु जी को कमलनयन कहते हुए वरदान दिया कि आज अर्थात कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को बैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जाना जाएगा और इस दिन जो भी व्यक्ति विष्णु का पूजन और करेगा उसे वैकुंठ लोक की प्राप्ति होगी | आज के दिन प्रत्येक व्यक्ति को भगवान विष्णु की पूजा करके श्रीमद्भगवद्गीता , विष्णु सहस्रनाम एवं श्रीमद्भागवत का पाठ करना चाहिए | भगवान नारायण का पूजन करने के बाद भगवान शंकर की भी विधिवत पूजा करने का विधान है | इस क्रम में भगवान शिव का अभिषेक करने के बाद ॐ नमः शिवाय बीजाक्षर का यथाशक्ति जप भी करना चाहिए | बैकुंठ चतुर्दशी के दिन इस विधान के साथ हरि हर का पूजन करने से मनुष्य को वैकुण्ठ की प्राप्ति होती है |*


*आज कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को बैकुंठ चतुर्दशी कहां जाता है | परंतु आज के दिन के महत्व को प्रायः लोग नहीं जानते क्योंकि आज का जनमानस अपने व्रत एवं मान्यताओं से विमुख होता जा रहा है | अपने धर्म के प्रति जानकारी के अभाव में मनुष्य इस मानव जीवन में प्राप्त अनेक अवसरों को खो देता है | आज के लोग मोक्ष तो प्राप्त करना चाहते हैं , बैकुंठ धाम की प्राप्ति भी चाहते हैं परंतु ऐसे कृत्य नहीं करना चाहते हैं जिससे उन्हें यह दुर्लभ लोक प्राप्त हो सके | बैकुंठ जाने की इच्छा रखने वाले शायद बैकुंठ का अर्थ ना जानते होंगे | ऐसे सभी लोगों को मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" बताना चाहता हूं कि बैकुंठ का शाब्दिक अर्थ है कि :- जहां कुण्ठा न हो , कुण्ठा अर्थात निष्क्रियता , अकर्मण्यता , निराशा हताशा आलस्य और दरिद्रता | इन सब को मिलाकर ही कुंठा की उत्पत्ति होती है | कहने का तात्पर्य है बैकुंठ धाम ऐसा स्थान है जहां निष्क्रियता नहीं है , कर्महीनती नहीं है और ना ही आलस्य एवं दरिद्रता है | आज लोग अपने कर्म से विमुख होकर भी वैकुंठ जाना चाहते हैं | जबकि यह सम्भव नहीं है | यदि बैकुंठ धाम जाने की इच्छा है तो मनुष्य को सर्वप्रथम आलस्य का त्याग करके कर्म योगी बन करके स्वयं की दरिद्रता को दूर करना पड़ेगा | प्राय: लोग दरिद्रता का अर्थ धन की कमी से लगा लेते परंतु सबसे बड़ी दरिद्रता वैचारिक एवं मानसिक होती है | बैकुंठ चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन करने के बाद यदि वैकुण्ठ जाने की इच्छा है मनुष्य को काम , क्रोध , लोभ , मोह , एवं आलस्य का त्याग करके सवयं के हृदय को छल - कपट आदि से मुक्त करके निर्मल करते गुए बैकुंठ जाने के योग्य स्वयं को बनाना पड़ेगा |*


*सनातन धर्म की दिव्यता यही है कि मानव जीवन से जुड़े प्रत्येक पहलुओं पर किसी न किसी विधान का मार्गदर्शन किया गया है |*

अगला लेख: मन की पवित्रता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



जय श्री राधे
प्रणाम आचार्य श्री

अनूप दीक्षित
13 नवम्बर 2019

स्वामी नारायण नारायण हरि हरि

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
05 नवम्बर 2019
*सनातन धर्म में मनुष्य को मोक्ष प्रदान करने वाली दिव्य सप्तपुरियों का उल्लेख मिलता है | यथा :- अयोध्या - मथुरा माया काशी कांचीत्वन्तिका ! पुरी द्वारावतीचैव सप्तैते मोक्षदायिकाः !! अर्थात :- अयोध्या , मथुरा , माया (हरिद्वार) काशी , कांची (कांचीपुरम्) अवन्तिका (उज्जैन) एवं द्वारिका यह सात ऐसे स्थान है
05 नवम्बर 2019
18 नवम्बर 2019
*इस संसार में प्राय: दो शब्द सुनने को मिलते हैं शिक्षा एवं दीक्षा | शिक्षा एवं दीक्षा मानव जीवन की दिशा एवं दशा परिवर्तित करने में सक्षम होती है | जहाँ शिक्षा का अर्थ होता है ज्ञानार्जन करना वहीं दीक्षा का अर्थ दिशा प्राप्त करना बताया गया है | पूर्वकाल में गुरु के द्वारा पहले शिष्य की योग्यता के अनु
18 नवम्बर 2019
07 नवम्बर 2019
🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻 *हमारे देश में हिंदू संस्कृति में बताए गए बारहों महीने में कार्तिक मास का विशेष महत्व है , इसे दामोदर मास अर्थात भगवान विष्णु के प्रति समर्पित बताया गया है | कार्तिक मास का क्या महत्व है इसका वर
07 नवम्बर 2019
16 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य येन - केन प्रकारेण ईश्वर प्राप्ति का उपाय किया करता है | ईश्वर का प्रेम पिराप्त करने के लिए मनुष्य पूजा , अनुष्ठान , मन्दिरों में देवदर्शन तथा अनेक तीर्थों का भ्रमण किया करता है जबकि भगवान को कहीं भी ढूंढ़ने की आवश्यकता नहीं है मानव हृदय में तो ईश्वर का वास है ह
16 नवम्बर 2019
16 नवम्बर 2019
*परमात्मा की बनाई यह सृष्टि निरन्तर क्षरणशील है | एक दिन सबका ही अन्त निश्चित है | सृष्टि का विकास हुआ तो एक दिन महाप्रलय के रूप में इसका विनाश भी हो जाना है , सूर्य प्रात:काल उदय होता है तो एक निश्चित समय पर अस्त भी हो जाता है | उसी प्रकार इस सृष्टि में जितने भी जड़
16 नवम्बर 2019
31 अक्तूबर 2019
..... इंसानियत ही सबसे पहले धर्म है, इसके बाद ही पन्ना खोलो गीता और कुरान का......"जय हिन्द"
31 अक्तूबर 2019
12 नवम्बर 2019
*आदिकाल से ही से ही इस धराधाम पर अनेकों योद्धा ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपनी शक्तियों का संचय करके एक विशाल जनसमूह को अपने वशीभूत किया एवं उन्हीं के माध्यम से मानवता के विरुद्ध कृत्य करना प्रारंभ किया | पूर्वकाल में ऐसे लोगों को राक्षस या निशाचर कहा जाता था | इनके अनेक अनुयायी ऐसे भी होते थे जिनको यह न
12 नवम्बर 2019
12 नवम्बर 2019
*सनातन धर्म में समय - समय पर अनेक व्रत / त्यौहार मनाये जाते रहते हैं | यहाँ शायद ही कोई दिन ऐसा हो जिस दिन कोई व्रत या पर्व न मनाया जाता हो | कार्तिक मास तो सबसे दिव्य है | अनेक अलौकिक , पौराणिक एवं लोक मान्यताओं के रूप में अनेक त्योहारों को स्वयं में समेटे हुए कार्तिक मास का आज समापन हो रहा है | जह
12 नवम्बर 2019
31 अक्तूबर 2019
*मनुष्य इस धरा धाम पर जन्म लेकर के जीवन भर अनेकों कृत्य करते हुए अपनी जीवन यात्रा पूर्ण करता है | इस जीवन अनेक बार ऐसी स्थितियां प्रकट हो जाती है मनुष्य किसी वस्तु , विषय या किसी व्यक्ति के प्रति इतना आकर्षित लगने लगता है कि उस वस्तु विशेष के लिए कई बार संसार को भी ठुकराने का संकल्प ले लेता है | आखि
31 अक्तूबर 2019
15 नवम्बर 2019
हिंदू पंचांग के अनुसार शनिवार का दिन शनि महाराज का होता है और कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार के राजा शनिदेव ही हैं। जिन लोगों पर शनि महाराज की कृपा रहती है उनका जीवन खुशियों से भरा रहता है लेकिन अगर शनिदेव किसी से रुष्ट हो जाते हैं तो फिर भरा पूरा परिवार भी खाली हो जाता है. फिर भी शनिदेव पश्च
15 नवम्बर 2019
25 नवम्बर 2019
मंगलवार का दिन बजरंगबली का होता है और इस दिन इनकी पूजा करने से हर किसी की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। बस इस पूजा को बहुत अच्छे और सावधानीपूर्वक करना चाहिए जिससे हनुमानजी को प्रसन्न करने में आसानी रहे। इसके अलावा कुछ ऐसे भी पर्व होते हैं जिस दिन हनुमानजी की पूजा करने से उचित लाभ मिलता है। और इस बार
25 नवम्बर 2019
16 नवम्बर 2019
वृषभ राशि वाले जातको के लिए कोनसी राशि के जातक मित्र है और कोनसी राशि के जातक शत्रु ,यह जानना बहुत जरुरी है| यदि आपकी राशि वृषभ है तो आपको किन राशि वालो से मित्रता करनी चाहिए और किन राशि वालो से दूर रहना चाहिए | यह भी वृषभ राशि वालो के लिए
16 नवम्बर 2019
28 अक्तूबर 2019
*मानव जीवन पा करके मनुष्य लंबी आयु जीता है | जीवन को निरोगी एवं दीर्घ जीवी रखने के लिए मनुष्य की मुख्य आवश्यकता है भोजन करना | पौष्टिक भोजन करके मनुष्य एक सुंदर एवं स्वस्थ शरीर प्राप्त करता है | मानव जीवन में भोजन का क्या महत्व है इसको बताने की आवश्यकता नहीं है , नित्य अपने घरों में अनेकों प्रकार
28 अक्तूबर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x