वैचारिक आतंकवाद :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

12 नवम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (482 बार पढ़ा जा चुका है)

वैचारिक आतंकवाद :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से ही से ही इस धराधाम पर अनेकों योद्धा ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपनी शक्तियों का संचय करके एक विशाल जनसमूह को अपने वशीभूत किया एवं उन्हीं के माध्यम से मानवता के विरुद्ध कृत्य करना प्रारंभ किया | पूर्वकाल में ऐसे लोगों को राक्षस या निशाचर कहा जाता था | इनके अनेक अनुयायी ऐसे भी होते थे जिनको यह नहीं पता होता था कि हमें जहां भेजा जा रहा है उसका परिणाम क्या होगा या उसका उद्देश्य क्या है ? इन को मानने वाले सिर्फ ऐसे लोगों के विचारों से प्रभावित होकर के उनके कहे हुए प्रत्येक आदेश का पालन करने को तत्पर हो जाते थे | जिस प्रकार लंकाधिराज रावण की सेना में अनेकों सैनिक ऐसे भी थे जो कि यह जानते थे कि हम जो कृत्य करने जा रहे हैं वह मानवता के विरुद्घ है परंतु फिर भी रावण के विचारों से अभिभूत होकर के वह सैनिक उसके बताए गए आदेश का पालन करने को तत्पर रहते थे | आज के आतंकवाद की तुलना प्राचीन काल के राक्षसवाद से की जा सकती है | जिस प्रकार प्राचीन काल में अपने राजा का सही गलत सभी प्रकार का आदेश मानने के लिए सैनिक प्रतिबद्ध होते थे उसी प्रकार आज के युवा किसी विशेष व्यक्ति के विचारों से अभिभूत होकर के मानवता विरोधी कृत्य करने के लिए आतंकवादी बन जाते हैं | आतंकवाद समस्त मानव जाति के लिए घातक है परंतु उससे भी घातक है वैचारिक आतंकवाद | वैचारिक आतंकवाद की यदि व्याख्या की जाय तो यही परिणाम निकलता है कि जो विचार मानवता के विरुद्ध हो , जो विचार एक विशाल जनसमूह के लिए घातक हो और उसी विचारों का प्रचार - प्रसार करके अनेक युवाओं के मस्तिष्क में अपने व्यर्थ के विचार ठूंस करके उनको हथियार पकड़ा दिया जाय , यही वैचारिक आतंकवाद है | वैश्विक आतंकवाद से छुटकारा पाने के लिए वैचारिक आतंकवाद को समाप्त करना होगा , जिस प्रकार मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम ने रावण का विनाश किया था |*


*आज के वर्तमान युग में संपूर्ण विश्व की यदि कोई सबसे बड़ी समस्या है तो वह है आतंकवाद | आतंकवाद आज विश्वव्यापी समस्या बन चुका है | देश की सेना आतंकवादियों को समय-समय पर चुन-चुन कर मारती भी रहती हैं परंतु दस आतंकवादी मारे जाते हैं तो सौ फिर से तैयार हो जाते हैं | आतंकवाद को समाप्त करने के लिए प्रत्येक देश की सरकार अपने अपने अनुसार कार्य कर रही है परंतु विचारणीय है कि सरकारें जितना अधिक प्रयास आतंकवाद को समाप्त करने का करती हैं उससे कहीं अधिक आतंकवाद भयावह रूप लेता चला जा रहा है | आतंकवाद को समाप्त करने के लिए इसकी जड़ में जाना होगा | आतंकवाद से घातक वैचारिक आतंकवाद होता है यह समझना होगा | मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि ऐसे उपदेशक , धर्मगुरु अथवा राजनेता जो कि अतिवादी विचारों से प्रेरित होकर के नवयुवकों को इस अग्नि में झोंक देते हैं , साथ ही चरमपंथी विचार रखने वाले कई चतुर लोग अपने धर्म और संप्रदाय के लोगों को किसी न किसी बहाने से यह समझा पाने में सफल हो जाते हैं है कि उन्हें , उनके परिवार को , उनके समुदाय को अमुक देश या अमुक समुदाय के वर्ग विशेष के लोगों से गंभीर खतरा है ! इन विचारों को नवयुवकों के दिमाग में इस प्रकार भर दिया जाता है की उनमें अमुक वर्ग विशेष के लिए कट्टरता उत्पन्न हो जाती है , जिसका परिणाम आतंकवाद के भयावह रूप मैं दिखाई पड़ता है | आतंकवादी तो ढेर कर दिया जाता है या फिर पूरा जीवन जेल की सलाखों के पीछे बिता देता है परंतु इनके पीछे जो चतुर तथाकथित बुद्धिजीवी वैचारिक आतंकवादी एवं समाज के विभाजक लोग हैं वे साफ बच निकलते हैं | आवश्यकता है कि आतंकवादी तो मारा ही जाय साथ ही वैचारिक आतंकवादी को भी मूल समेत समाप्त करने की | जब तक सफेदपोश वैचारिक आतंकवादी इस संसार में रहेंगे और लोग उनका समर्थन करते रहेंगे तब तक वे मानवता के विरुद्ध कार्य करते रहेंगे और इस धरती से आतंकवाद नहीं समाप्त हो सकता |*


*जिस प्रकार बिना जड़ काटें वृक्ष का अस्तित्व नहीं समाप्त होता उसमें नई कोपलें निकल आती हैं उसी प्रकार आतंकवादियों को मारते रहने से आतंकवाद नहीं समाप्त हो सकता ! आतंकवाद का मूल है वैचारिक आतंकवाद | यदि आतंकवाद को समाप्त करना है तो वैचारिक आतंकवादियों को समाप्त करना होगा |*

वैचारिक आतंकवाद :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

अगला लेख: मन की पवित्रता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
29 अक्तूबर 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves></w:TrackMoves> <w:TrackFormatting></w:TrackFormatting> <w:PunctuationKerning></w:PunctuationKerning> <w:ValidateAgainstSchemas></w:Val
29 अक्तूबर 2019
01 नवम्बर 2019
*इस संसार में मनुष्य एक चेतन प्राणी है , उसके सारे क्रियाकलाप में चैतन्यता स्पष्ट दिखाई पड़ती है | मनुष्य को चैतन्य रखने में मनुष्य के मन का महत्वपूर्ण स्थान है | मनुष्य का यह मन एक तरफ तो ज्ञान का भंडार है वहीं दूसरी ओर अंधकार का गहरा समुद्र भी कहा जा सकता है | मन के अनेक क्रियाकलापों में सबसे महत्
01 नवम्बर 2019
25 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर परमपिता परमात्मा ने जलचर , थलचर नभचर आदि योनियों की उत्पत्ति की | कुल मिलाकर चौरासी लाख योनियाँ इस पृथ्वी पर विचरण करती हैं , इन सब में सर्वश्रेष्ठ योनि मनुष्य को कहा गया है क्योंकि जहां अन्य जीव एक निश्चित कर्म करते रहते हैं वही मनुष्य को ईश्वर ने विवेक दिया है , कोई भी कार्य करने के
25 नवम्बर 2019
10 नवम्बर 2019
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !!*सनातन धर्म की दिव्यता विश्व विख्यात है | संपूर्ण विश्व ने सनातन धर्म के ग्रंथों को ही आदर्श मान कर दिया जीवन जीने की कला सीखा है | प्राचीन काल में शिक्षा का स्तर इतना अच्छा नहीं था जितना इस समय है परंतु हमारे पूर्वज अनुभव के आधार पर समाज के सारे कार्य कुशलता से संपन्न कर दे
10 नवम्बर 2019
30 अक्तूबर 2019
*मानव जीवन में पवित्रता का बहुत बड़ा महत्त्व है | प्रत्येक मनुष्य स्वयं को स्वच्छ एवं पवित्र रखना चाहता है | नित्य अनेक प्रकार से संसाधनों से स्वयं के शरीर को चमकाने का प्रयास मनुष्य द्वारा किया जाता है | क्या पवित्रता का यही अर्थ हो सकता है ?? हमारे मनीषियों ने बताया है कि प्रत्येक तन के भीतर एक मन
30 अक्तूबर 2019
21 नवम्बर 2019
*सनातन धर्म में सोलह संस्कारों का वर्णन मिलता है इन संस्कारों में एक महत्वपूर्ण संस्कार है विवाह संस्कार | मनुष्य योनि में जन्म लेने के बाद वैवाहिक संस्कार महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि सनातन धर्म में बताए गए चार आश्रम में सबसे महत्वपूर्ण है गृहस्थाश्रम | गृहस्थाश्रम में प्रवेश करने के लिए विवाह संस
21 नवम्बर 2019
30 अक्तूबर 2019
मित्रों , मैंने पहले एक लेख में बदलाव के कुछ सरल विषय लिखे थे जिनमें हमारे समाज को बदलने की आवश्यकता है. फिर मैंने ट्रैफिक के केवल तीन बिंदुओं पर आप सब का ध्यान आकर्षित किया था-फालतू हॉर्न बजाना; वाहन ठीक से पार्क करना एवं द
30 अक्तूबर 2019
10 नवम्बर 2019
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !!*सनातन धर्म की दिव्यता विश्व विख्यात है | संपूर्ण विश्व ने सनातन धर्म के ग्रंथों को ही आदर्श मान कर दिया जीवन जीने की कला सीखा है | प्राचीन काल में शिक्षा का स्तर इतना अच्छा नहीं था जितना इस समय है परंतु हमारे पूर्वज अनुभव के आधार पर समाज के सारे कार्य कुशलता से संपन्न कर दे
10 नवम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x