तुम्हारा स्वागत है शीत ऋतु

14 नवम्बर 2019   |  शिल्पा रोंघे   (2397 बार पढ़ा जा चुका है)

तुम्हारा स्वागत है शीत ऋतु



सर्द धूप के साथ हो चुकी है शुरू स्वेटरों की बुनाई.
और रज़ाईयों की सिलाई.


हो चुका है ठंड से बाज़ार गर्म अब.

अदरक की खुशबू से महकने लगी है चाय की दुकाने कुछ ज्यादा ही.



हो चुका है ठंड से बाज़ार गर्म अब.

गज़क और तिल के लड्डूओं
से सजने लगी है दुकानें.


हो चुका है ठंड से बाज़ार गर्म अब.

हरी सब्जियों से हरियाली सी हुई जा रही है सब्जी मंडियां.


हो चुका ठंड से बाज़ार गर्म अब.

जलने लगे हैं अलाव
सड़कों पर.


आंच के ताप से सुकून पाने लगी है उंगलियां.
हो चुका ठंड से बाज़ार अब गर्म.


कुछ ऐसा है मेरे शहर की ठंड का हाल.
जो है सुकून भरी, नहीं करती है बेहाल.



शिल्पा रोंघे

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