लता मंगेशकर: छोटी सी उम्र में इस तरह उठाई परिवार की जिम्मेदारी, कई सालों तक चला संघर्ष

18 नवम्बर 2019   |  स्नेहा दुबे   (507 बार पढ़ा जा चुका है)

लता मंगेशकर: छोटी सी उम्र में इस तरह उठाई परिवार की जिम्मेदारी, कई सालों तक चला संघर्ष

भारतीय सिनेमा की शुरुआत के बाद इंडस्ट्री में ऐसे-ऐसे लेजेंड्स आए जिनकी जगह कभी कोई ले नहीं सकता। उनमें से एक हैं लता मंगेशकर, जिन्हें सुरों की देवी, कोकिला, नाइटएंगल और लता दी के नाम से पहचाना जाता है। लता मंगेशकर को ना सिर्फ भारत में पहचाना जाता है बल्कि दूसरे देशों में भी लोग जानते हैं कि लता जी ही भारत की कोकिला हैं। इनके जैसी आवाज आज तक किसी मे देखी नहीं गई है और हर किसी ने लता जी को फॉलो किया है। 90 साल की उम्र में भी लता मंगेशकर की गायकी क्षेत्र के लोग पूजा करते हैं। लता जी ने अपने गायकी के करियर में इतने सारे पॉपुलर और गाने गाए जिन्हें उनके बाद कई गायिकाओं नेे अपने-अपने अंदाज में गाए। लता मंगेशकर से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात आपको जरूर पता होना चाहिए।


Lata Mangeshkar

लता मंगेशकर का प्रारंभिक जीवन


28 सिंतबर, 1929 को मध्यप्रदेश के इंदौर में लता मंगेशकर का जन्म हुआ था। मराठी परिवार में जन्मी लता जी के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक क्लासिकल सिंगर और थिएटर आर्टिस्ट थे। लता जी को संगीत विरासत में मिली थी और उनके पिता ने उन्हें संगीत की सारी बारीखियां सिखाई। लता मंगेशकर के बचपन का नाम हेमा था लेकिन उनके पिता उन्हें लता बोलते थे क्योंकि वे एक प्ले 'भाव बंधन' से प्रेरित थे जिसमें एक लीड का नाम लता था। लता अपने पिता के सबसे करीब थीं, हालांकि 13 साल की उम्र में लता जी ने अपने पिता को खो दिया था। बड़ी होने के नाते उनके ऊपर मां और चार भाई-बहनों की जिम्मेदारी आ गई थी। आशा भोसले, उषा, मीना और भाई हृदयनाथ है और ये सभी संगीत से ताल्लुख रखते हैं, खासकर आशा भोसले बॉलीवुड की जानी-मानी सिंगर हैं। 5 साल की उम्र से ही लता ने म्यूजिक प्ले के लिए एक्ट्रेस के तौर पर काम करना शुरु कर दिया था और संगीत में लता जी एक चमत्कार हैं इस बात की भविष्यवाणी उनके पिता ने तब ही कर दी थी।


Lata Mangeshkar

9 साल की उम्र में ही लता जी ने अमानत खान, बड़े गुलाम अली खान और पंडित तुलसीदास शर्मा जैसे उस्तादों से संगीत की ट्रेनिंग लेना शुरु कर दिया था। मगर उनके जीवन में बड़ा हादसा तब हुआ जब उनके पिता का निधन हो गया।साल 1942 में संगीत की चमत्कार कही जाने वाली लता मंगेशकर के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके पिता को हृदय संबंधित बीमारी थी और कम उम्र में अपने परिवार को बेसहारा छोड़कर चले गए। उस दौरान लता जी 13 साल की थीं और उनके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। इसके लिए लता मंगेशकर ने कम उम्र से ही काम करना शुरु कर दिया और कभी भी अपने बारे में नहीं सोचा।


लता मंगेशकर का शुरुआती करियर (Lata Mangeshkar Career)


लता मंगेशकर ने अपने दौर के सभी बड़े फिल्म निर्देशक-निर्माताओं के साथ काम किया है। पहले वे गयिका नूर जहां की तरह गाने की कोशिश में रहती थी लेकिन समय के साथ उन्होने अपनी आवाज से पहचान बनाई। लता मंगेशकर ने नौशाद अली, अनिल विश्वास, मदन मोहन, एसडी बर्मन, शंकर जयकिशन, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, ए आर रहमान जैसे कई बड़े संगीतकारों के साथ काम किया है। 13 साल की लता ने अपने करियर की शुरुआत के लिए काफी संघर्ष किया और फिर साल 1942 मे उन्हे पहला गाना मराठी फिल्म 'किती हसाल' में 'नाचू या ना गड़े खेडू सारी' से मिला। इसस गाने को सदाशिवराज नेवरेकर ने कंपोज किया लेकिन इस फिल्म की एडिटिंग करते समय इस गाने को फिल्म से निकाल दिया गया था। इसके बात लता जी के पिता के दोस्त मास्टर विनायक ने इनके परिवार की काफी मदद की। मास्टर विनायक ने साल 1942 में लता जी को मराठी फिल्म पहिली मंगला-गौर में छोटा सा किरदार दिया और इसमें उनका एक गाना भी था। इसके बाद तीन सालों तक इन्हें कोई ना कोई गाना गाने को मिल जाता था फिर वे मास्टर के साथ मुंबई आ गईं और यहां पर इन्होंने उस्ताद अमानत अली खान से हिंदुस्तानी क्लासिकल संगीत सीखना शुरु किया।


Lata Mangeshkar

इस दौरान लता जी को कई बड़ संगीतकारों ने इनकी पतली आवाज होने के कारण रिजेक्ट किया था। दुर्भाग्यवश साल 1948 में विनायक मास्टर की मृत्यु हो गई और लता जी मुंबई में बिल्कुल अकेले हो गई थीं। मगर उनके ऊपर घर की जिम्मेदारी थी इसलिए वे पीछे नहीं हट सकती थीं और फिर लंबे संघर्ष के बाद इन्हें फिल्म मजबूर में 'दिल मेरा तोड़ा, मुझे कहीं का ना छोडा़' गाने का मौका मिला और इसी गाने से लता जी को पहचान मिली। इसके बाद साल 1949 में इन्होने फिल्म महल में 'आएगा आने वाला' गाया और यही इनका पहला सुपरहिट गाना था। इसके बाद लता जी का करियर आसमान पर ही रहा और उनके पास एक से बढ़कर एक ऑफर आने लगे, इस बीच उन्हें बेस्ट प्लेबैक सिंगर के ना जाने कितने खिताब मिले।


इस तरह बन गई भारत की 'कोकिला'


Lata Mangeshkar

50 के दशक में लता जी ने अनिल बिस्वास, शंकर जयकिशन, एस.डी. बर्मन, खय्याम, सलिल चौधरी, मदन मोहन, कल्यानजी-आनंदजी जैसे कई बड़े म्यूजिक डायरेक्टर्स के साथ काम करने का मौका मिला। साल 1958 में म्यूजिक डायरेक्टर सलिल चौधरी द्वारा बनी फिल्म मधुमती का गाना 'आजा रे परदेसी' के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर पहला फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला। इस दौरान लता जी ने कुछ राग पर आधारित गाने जैसे बैजू बावरा के लिए राग भैरव पर 'मोहे भूल गए सावरिया' कुछ भजन जैसे हम दोनों मूवी में 'अल्लाह तेरो नाम' गाए और इसके साथ ही कुछ पश्चिमी गाने जैसे 'अजीब दास्तां' भी गाए। लता जी का नाम पूरे भारत में फैलने लगा था और इस दौरान इन्होने मराठी, हिंदी के साथ तमिल गानों पर भी पकड़ बना ली थी। इसी बीच इन्होंने अपने भाई हृदयनाथ मंगेशकर के लिए भी गाने गाए जो कि जैत के जैत फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर थे। इसके अलवा लता जी ने बंगाली, कन्नड़ और नॉर्थ के लिए भी गाने रिकॉर्ड करने शुरु कर दिए। पूरे भारत में लता मंगेशकर की आवाज का बोलबाला था और इस दौरान वे 'भारत की कोकिला' बनकर उभरीं। 60 से 80 के दशक तक लता जी का करियर सातवें आसमान पर था और उनकी सुरीली आवाज के बदौरत वे एक सिंगिंग स्टार बन चुकी थीं। 35 साल की उम्र तक लता मंगेशकर ने 700 से ज्यादा गाने गा लिये थे और ये एक रिकॉर्ड रहा है। साल 1963 में लता मंगेशकर ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाया था और इस गाने को सुनकर नेहरू के आंसू छलक आए थे। फिर ये गाना लता जी के करियर का सबसे पसंद किया जाने वाला गाना बन गया था।


लता मंगेशकर अवॉर्ड्स


Lata Mangeshkar

लता मंगेशकर को के करियर में बहुत से सम्मान और अवॉर्ड्स मिले हैं। इनमें राष्ट्र के सर्वोच्च पुरस्कारों में शामिल पद्मभूषण, पद्मविभूषण, भारत रत्न, दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड और नेशनल अवॉर्ड्स शामिल हैं। लता जी को 3 नेशनल अवॉर्ड मिले हैं और साल 2008 में भारत के 60वें स्वतंत्रता दिवस पर 'वन टाइम अवार्ड फॉर लाइफटाइम अचीवमेंट' अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा लता जी को महाराष्ट्र भूषण अवॉर्ड भी दिया जा चुका है। ‘गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स’ की तरफ से भी लता जी को खास सम्मान दिया जा चुका है। मध्यप्रदेश शासन की तरफ से उनके नाम हर साल 1 लाख रूपये का पारितोषिक आता है और साल1989 में लताजी को ‘दादा साहब फालके पुरस्कार से सम्मानित किया गया।


लता मंगेशकर का परिवार (Lata Mangeshkar Family)


Lata Mangeshkar


बचपन से ही लता जी ने अपने परिवार के बारे में सोचा और उन्हें अपने बारे में सोचने का कभी समय नहीं मिला। उन्होने शादी के बारे में नहीं सोचा और बस अपने से छोटे चार भाई-बहन के करियर और शादी को लेकर उन्होंने हर काम किया। लता मंगेशकर की छोटी बहन आशा भोसले ने एक शादी की थी और वो असफल रही इसके बाद उन्होंने संगीतकार आर डी बर्मन के साथ शादी की। आशा भोसले भी बॉलीवुड की पॉपुलर सिंगर हैं और उन्होंने कई यादगार गाने गाए हैं। इसके अलावा उनकी दो छोटी बहने हैं और दोनों मराठी फिल्मों मे गाती हैं। इनका एक भाई हृदयनाथ मंगेशकर भी मराठी फिल्मों में गाने कंपोज करते हैं। इसके अलावा बॉलीवुड एक्ट्रेस पद्मिनी कोल्हापुरी और शक्ति कपूर की पत्नी शिवानी कपूर इनकी भतीजी है। इस रिश्ते से श्रद्धा कपूर इनकी नातिन है।

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