स्वर्गीय बाला साहब का नारा मराठा मानुष ,से सत्ता की चाह तक उद्धव ठाकरे

24 नवम्बर 2019   |  शोभा भारद्वाज   (2561 बार पढ़ा जा चुका है)

स्वर्गीय बाला साहब का नारा मराठा मानुष ,से सत्ता की चाह तक उद्धव ठाकरे

स्वर्गीय बाला साहब का नारा ‘मराठा मानुष’ से सत्ता की चाह तक उद्धव ठाकरे

डॉ शोभा भारद्वाज

एक मई 1960 बाम्बे प्रेसिडेंसी टूटने के बाद दो नये राज्यों का निर्माण हुआ महाराष्ट्र एवं गुजरात बाला साहब ठाकरे को महाराष्ट्र के राजनीतिक धरातल का भरपूर ज्ञान था | वह ‘मराठी मानुष के गौरव’ के नारे के साथ राजनीति में उतर कर दिलचस्प नारा दिया ‘लुंगी हटाओ पुंगी बजाओ ‘ पहले एक कार्टून की पत्रिका मार्मिक के नाम से शुरू की, उन्होंने समय को पहचाना उन दिनों महाराष्ट्र में गैर मराठियों का भारी वर्चस्व था अधिकतर सरकारी नौकरियों में दक्षिण भारतीय ऊंचे पदों पर काम कर रहे थे| बाला साहेब के नारे से मराठी उत्तेजित हो उठे एक आन्दोलन शुरू हुआ सरकारी दफतरों, गैर मराठी लोगों पर हमले किये गये| बाला साहब ने मराठियों की हर समस्याओं को हल करने की जिम्मेदारी ले ली उनके लिए नौकरी में सुरक्षा की मांग की पहले जहाँ मराठों को गुजरात एवं दक्षिण भारत के लोगों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता था |

अब वह मराठी मानुष से और ऊपर उठना चाहते थे 19 जून 1966 में शिवसेना के नाम से एक कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन की स्थापना जबकि शुरु में उन्हें अधिक सफलता नहीं मिली को तब उन्होंने धर्म निरपेक्ष भारत मेंगर्व से कहो हम हिन्दुओं हैंनारे के साथ महाराष्ट्र की राजनीति में जोश भर दिया पूरे भारत का ध्यान आकर्षित किया 30 अक्टूबर 1966 दशहरा के दिन शिवाजी पार्क में उनकी पहली रैली हुई| रैलियों में उनके जोशीले भाषण गर्व का संचार करते थे उनकी प्रसिद्ध दशहरा रैलियों में उनके जोशीले भाषण सुनने लाखों की भीड़ जुटती थी उन्होंने शिवाजी के नाम को मराठा राजनीति में गर्वित किया धीरे धीरे भारत की राजनीति में छाने की कोशिश की वह अक्सर कहते थे हम किंग मेकर हैं मातोश्री में राजनेता एवं कार्यकर्ता आते थे लेकिन बाला साहब कभी किसी से मिलने नहीं गये अपने बेहद सुरक्षित निवास मातोश्रीकी बालकनी से अपने समर्थकों का हाथ हिला कर उनका अभिवादन स्वीकार करते थे दिया करते थे। प्रसिद्ध दशहरा रैलियों में उनके जोशीले भाषण सुनने लाखों की भीड़ उमड़ती थी।

उनकी स्पष्टवादिता कमाल की थी उनसे पूछा गया आप हिंदुत्व की बात करते हैं आपका नारा रहा है गर्व से कहो हम हिन्दू हैं स्पष्टता से उत्तर दिया आकर्षक नारा जिससे हलचल मच जाये से राजनीति में आया एवं छाया जाता है ऐसा ही नारा स्वर्गीय काशीराम एवं मायावती जी ने बसपा के मंच से दिया था ‘तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार’ बाद में ब्राह्मण समाज को उन्होंने अपने साथ जोड़ा बाला साहब ने भी गैर मराठियों एवं सभी धर्म के लोगों को शिव सेना में स्थान दिया लेकिन उनका एजेंडा हिंदुत्व ही रहा |

अंततः उन्होंने शिव सेना को सत्ता की सीढ़ियों पर पहुँचा ही दिया। 1995 में में शिवसेना एवं भाजपा गठबन्धन की महाराष्ट्र में सरकार बनी जिसमें मनोहर जोशी शिवसेना के मुख्यमंत्री थे कार्यकाल में आखिरी समय में नारायण राणे मुख्यमंत्री बने ।सता में न रहते हुए भी सरकार के हर फैसले को प्रभावित किया | शिव सेना के विकास में बाला साहब के भतीजे राज ठाकरे का विशेष योगदान था उनकी कर्मठताएवं अपने चाचा के समान जोशीले भाषणों के कारण बालासाहब का उत्तराधिकारी समझा जाता था लेकिन 2005 में बालासाहब का पुत्र मोह जागा वह अपने बेटे उद्धव ठाकरे को अतिरिक्त देने लगे नाराज राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़ दी एवं 2006 में अपनी नई पार्टी 'महाराष्ट्र नव निर्माण सेना' बना ली | अंतिम दिनों में बालासाहब की इच्छा थी दोनों चचेरे भाईयों में समझौता हो जाये , सम्भव नहीं हुआ राज ठाकरे को राजनीति में विशेष सफलता नहीं मिली उनके दल को वोटर अधिक पसंद नहीं करते थे लेकिन राज का उनकी नजर में बहुत सम्मान है | शिव सेना को इस अलगाव से बहुत नुक्सान हुआ |

86 वर्ष की आयु में बाला साहब संसार से विदा हो गये महाराष्ट्र की राजनीतिक मंच में वह मराठी गौरव और हिंदुत्व के प्रतीक माने जाते हैं शिव सैनिक उनके प्रति श्रद्धा का भाव रखते हैं देश की वित्तीय राजधानी में उन्हीं का वर्चस्व चलता रहा उन्होंने भाजपा के साथ गठ्बन्धन होते हुए भी राष्ट्रपति पद के लिए प्रतिभा पाटिल का समर्थन किया जबकि वह कांग्रेस की उम्मीदवार थीं | वह जर्मन चांसलर हिटलर के प्रशंसक माने जाते थे | स्वर्गीय प्रमोद महाजन के प्रयत्नों का परिणाम था 1989 बाला साहब ठाकरे एवं भाजपा का गठबंधन हुआ दोनों दलों ने मिल कर 1989 का लोकसभा चुनाव एवं 1990 का विधान सभा चुनाव लड़ा जिसका दोनों को लाभ हुआ | बाला साहब के जीवन काल में शिवसेना बड़े भाई की भूमिका में रही लेकिन भाजपा से जुड़ने के बाद शिवसेना नर्म पड़ती गयी| स्वर्गीय अटल बिहारी जी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में शिवसेना केंद्र की सत्ता आ गयी उनके दो कैबिनेट मंत्री एक राज्यमंत्री थे फिर भी शिवसेना सरकार की आलोचक रही| यूपीए सरकार के कार्यकाल में वह भाजपा के साथ विपक्ष में साथ रही|

बाला साहब के देहांत के बाद शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे बने उन्हें 2004 में बालासाहब ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था | 2014 के विधान सभा चुनाव में दोनों दलों में समझौता नहीं हो सका दोनों ने चुनाव अपने मुद्दों पर अलग-अलग लड़ा चुनाव रिजल्ट में भाजपा की अपनी 122 सीटें थीं दोनों ने मिल कर महाराष्ट्र में सरकार बनाई देवेन्द्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने |केंद्र में भी शिवसेना मोदी सरकार में शामिल थी लेकिन शिवसेना के अखबार सामना में संजय राऊत सरकार की नोट बंदी जीएसटी एवं किसानों से सम्बन्धित मुद्दों पर निरंतर विपक्ष की भांति आलोचना करते रहे |

2019 के लोकसभा चुनाव मोदी जी के नेतृत्व में लड़ा गया अबकी बार भाजपा का अपना ही बहुमत काफी था अत: शिवसेना के हिस्से में एक कैबिनेट मंत्री का पद आया (अरविन्द सावंत कैबिनेट मंत्री) विरोध का स्थान नहीं था लेकिन विधान सभा चुनाव में काफी जद्दोजहद के बाद दोनों ने मिल कर चुनाव लड़ा अबकी बार भाजपा की 105 सीटें आई वह अकेले बहुमत से दूर रह गयी ,शिवसेना की 56, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को 54 एवं कांग्रेस की 44 सीटें थी | चुनाव से पहले हुए भाजपा एवं शिवसेना के गठ्बन्धन को जनता ने वोट देकर चुना था | शिवसेना 50,50 के फार्मूले पर अड़ गयी सत्ता का बराबर बटवारा ढाई-ढाई वर्ष तक मुख्यमंत्री का पद ,उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे जिन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा है मुख्यमंत्री का पद बनेंगें समझौता लिखित होगा भाजपा पूरे कार्यकाल में उप मुख्यमंत्री का पद आदित्य ठाकरे को देने के लिए तैयार थी उद्धव नहीं मानें |भाजपा ने बहुमत न होने की बात कह कर सरकार बनाने में असमर्थता जताई |

अलग विचार वाले दल एनसीपी एवं कांग्रेस जिनकी विचारधारा एक सी है और शिवसेना जिनकी विचारधारा में हिंदुत्व प्रमुख है अन्य मुद्दे भी अलग हैं लेकिन सत्ता के लिए आदित्य ठाकरे के स्थान पर उनके पिता उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनेंगे समझौता करने को तैयार हो गयी बड़ी मुश्किल से तीन दलों में सहमती बनीं ,अभी उपमुख्यमंत्री ,विधान सभा के स्पीकर पद एवं मंत्री पद का बटवारे का समझौते पर लिखित रूप से होने थे राजपाल को सरकार बनाने की सहमती का पत्र दिया था| शनिवार सुबह अखबार की सुर्खिया थीं महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में नयी सरकार का गठन होगा तीनों दल मिल कर गवर्नर से मिलने जायेंगे टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज चलने लगी महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की समाप्ति सूर्य की पहली किरन से पहले हो गयी देवेन्द्र फडणवीस ने महाराष्ट्र में फिर से मुख्यमंत्री पद की आठ बजे शपथ ग्रहण की अजीत पवार उप मुख्यमंत्री बने उनके साथ कई विधायक थे महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल है कांग्रेस एनसीपी एवं शिवसेना ने टूट से बचाने के लिए अपने विधायकों को एकसाथ रख दिया है वाह रे राजनीति कहते हैं राजनीति की बहन कूटनीति हैं यहाँ तो केवल सत्ता की चाह बस मामला सुप्रीम कोर्ट में गया है |

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