सत्पात्र बनें :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

25 नवम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (454 बार पढ़ा जा चुका है)

सत्पात्र बनें :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*ईश्वर ने सृष्टि में सबके लिए समान अवसर प्रदान किये हैं , एक समान वायु , अन्न , जल का सेवन करने वाला मनुष्य भिन्न - भिन्न मानसिकता एवं भिन्न विचारों वाला हो जाता है | किसी विद्यालय की कक्षा में अनेक विद्यार्थी होते हैं परन्तु उन्हीं में से कोई सफलता के उच्चशिखर को छू लेता है तो कोई पतित हो जाता है | जबकि विद्यालय में सबको समान रूप से शिक्षा गुरु के द्वारा प्रदान की जाती है | ऐसा क्यों होता है ??? इस पर यदि सूक्ष्मता से विचार किया जाय तो यही परिणाम निकलता है कि दैवीय अनुग्रह एवं गुरुकृपा समभाव में प्राप्त होने पर उसका लाभ वही ले पाता है जिसमें पात्रता होती है | कुछ भी प्राप्त करने के लिए मनुष्य को पात्र बनना पड़ता है बिना पात्रता के कुछ भी नहीं ग्रहण किया जा सकता | बादल सारी पृथ्वी पर समान रूप से बरसते हैं परन्तु जहाँ ऊँची चट्टानों पर एक बूँद नहीं ठहरती है वहीं पात्रता होने के कारण गड्ढे उसका जलवर्षा को स्वयं में समाहित कर लेते हैं | कुछ भी ग्रहण करने के लिए मनुष्य में ग्रहणशीलता का भाव अवश्य होना चाहिए | बरसात में कोई भी जलपात्र उल्टा होने पर जल से वंचित रह जाता है परंतु यदि पात्र सीधा और ग्रहणशील है तो वह जल से पूर्ण हो जाता है | बिना सत्पात्र बने इस संसार में कुछ भी प्राप्त कर पाना कठिन ही नहीं बल्कि असम्भव है | गुरु की कृपा भी उसी पर बरसती है जो ग्रहणशील एवं सत्पात्र हो अन्यथा अनेकों शिष्य नित्य ही आकर चले जाते हैं और उनको कुछ भी नहीं प्राप्त हो पाता है | एकलव्य की सत्पात्रता ने ही उसे सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनाया था | यदि जीवन में गुरु की महत्ता है तो शिष्य की श्रद्धा , सद्भावना एवं सत्पात्रता भी आवश्यक है | शिष्य वही सफल होता है जो गुरु के बताये हुए उपदेश को ग्रहण करके उसका अनुपालन करने में सदैव तत्पर रहता है | उसकी सत्पात्रता ही उसे दिन - प्रतिदिन निखारती रहती है | मनुष्य को सर्वप्रथम सत्पात्र बनने का प्रयास करना चाहिए , यदि मनुष्य सत्पात्र बन जाता है तो सबकुछ स्वयं उसमें समाहित होने लगता है |*


*आज मनुष्य का सबसे बड़ा दोष यह उजागर हो रहा है कि वह दोषारोपण करने में पीछे नहीं रहता | किसी लक्ष्य को न प्राप्त कर पाने पर ईश्वर को या अपने गुरु / अभिभावक को दोषी मानने वालों को विचार करना चाहिए कि क्या वे इस लक्ष्य को प्राप्त करने की पात्रता रखते हैं ?? आज मनुष्य स्वार्थ एवं लोभ में सब कुछ शीघ्रातिशीघ्र प्राप्त तो कर लेना चाहता है परन्तु स्वयं को उस योग्य नहीं बना पाता है | प्राय: देखा जाता है कि एक पिता की चार सन्तानों में एक ऐसी होती है जो माता - पिता को अधिक प्यारी होती है , वह प्यारी इसलिए होती है क्योंकि उसमें सत्पात्रता होती है शेष तीनों भाईयों में शायद यह नहीं देखने को मिलती | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" यह मानता हूँ कि मनुष्य ईश्वर , माता - पिता या सद्गुरु की कृपा पाने का अधिकारी तभी बन पाता है जब वह सत्पात्र हो | सत्पात्र बनने के लिए सर्वप्रथम धीर - गम्भीर बनना पड़ता है जो कि आज के युग में नहीं हो पा रहा है | आज अनेक प्रकार के सतसंग होते हैं लोग अपनी जिज्ञासा प्रस्तुत करके तुरन्त उसका समाधान चाहते हैं परन्तु समाधान को ग्रहण नहीं कर पाते हैं | जिस प्रकार ऊँची चट्टान तभी तक भीगी रहती है जब तक बरसात होती रहती है बरसात बन्द हो जाने के बाद एक बूंद जल भी चट्टानों पर नहीं टिकता उसी प्रकार ऐसे लोग तभी तक उस सतसंग में कही बातों का ध्यान रख पाते हैं जब तक सतसंग चलता रहता है | सतसंग के समापन के बाद ऊँची चट्टानों की ही भाँति उनके पास भी सतसंग की ज्ञानवर्षा की एक भी बूँद नहीं रह जाती | ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनके पास पात्रता नहीं होती है | अपने ज्ञान को अक्षुण्ण बनाये रखते हुए इस संसार में कुछ प्राप्त करने के लिए मनुष्य को पात्रता का विकास करना चाहिए |*


*किसी भी साधना की सफलता तभी मानी जा सकती है जब मनुष्य स्वयं को सत्पात्र बना सके अन्यथा सबकुछ होते हुए भी कुछ नहीं प्राप्त हो सकता |*

अगला लेख: विवाह संस्कार की दिव्यता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
25 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर परमपिता परमात्मा ने जलचर , थलचर नभचर आदि योनियों की उत्पत्ति की | कुल मिलाकर चौरासी लाख योनियाँ इस पृथ्वी पर विचरण करती हैं , इन सब में सर्वश्रेष्ठ योनि मनुष्य को कहा गया है क्योंकि जहां अन्य जीव एक निश्चित कर्म करते रहते हैं वही मनुष्य को ईश्वर ने विवेक दिया है , कोई भी कार्य करने के
25 नवम्बर 2019
21 नवम्बर 2019
*सनातन धर्म में सोलह संस्कारों का वर्णन मिलता है इन संस्कारों में एक महत्वपूर्ण संस्कार है विवाह संस्कार | मनुष्य योनि में जन्म लेने के बाद वैवाहिक संस्कार महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि सनातन धर्म में बताए गए चार आश्रम में सबसे महत्वपूर्ण है गृहस्थाश्रम | गृहस्थाश्रम में प्रवेश करने के लिए विवाह संस
21 नवम्बर 2019
30 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर जन्म लेकर मनुष्य परमपिता परमेश्वर को प्राप्त करने के लिए अनेकों प्रकार के उपाय करता है यहां तक कि कभी-कभी वह संसार से विरक्त होकर के अकेले में बैठ कर परमात्मा का ध्यान तो करता ही रहता है साथ ही वह भावावेश में रोने भी लगता है और मन में विचार करता है कि हमको परमात्मा ने इस संसार में क्यो
30 नवम्बर 2019
08 दिसम्बर 2019
*सनातन धर्म के अनुसार मनुष्य का जीवन संस्कारों से बना होता है इसी को ध्यान में रखते हुए हमारे पूर्वजों ने मनुष्य के लिए सोलह संस्कारों का विधान बताया है | गर्भकाल से लेकर मृत्यु तक इन संस्कारों को मनुष्य स्वयं में समाहित करते हुए दिव्य
08 दिसम्बर 2019
30 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर परमात्मा ने अनेकों प्रकार के पशु-पक्षियों , जीव - जंतुओं का सृजन किया साथ ही मनुष्य को बनाया | मनुष्य को परमात्मा का युवराज कहा जाता है | इस धराधाम पर सभी प्रकार के जीव एक साथ निवास करते हैं , जिसमें से सर्वाधिक निकटता मनुष्य एवं पशुओं की आदिकाल से ही रही है | जीवमात्र के ऊपर संगत का प
30 नवम्बर 2019
28 नवम्बर 2019
*ईश्वर द्वारा बनाई गयी सृष्टि बहुत ही देदीप्यमान एवं सुंदर है | मनुष्य के जन्म के पहले ही उसे सारी सुख - सुविधायें प्राप्त रहती हैं | जन्म लेने के बाद मनुष्य परिवार में प्रगति एवं विकास करते हुए पारिवारिक संस्कृति को स्वयं में समाहित करने लगता है | मनुष्य का जीवन ऐसा है कि एक क्षण भी कर्म किये बिना
28 नवम्बर 2019
12 नवम्बर 2019
*आदिकाल से ही से ही इस धराधाम पर अनेकों योद्धा ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपनी शक्तियों का संचय करके एक विशाल जनसमूह को अपने वशीभूत किया एवं उन्हीं के माध्यम से मानवता के विरुद्ध कृत्य करना प्रारंभ किया | पूर्वकाल में ऐसे लोगों को राक्षस या निशाचर कहा जाता था | इनके अनेक अनुयायी ऐसे भी होते थे जिनको यह न
12 नवम्बर 2019
02 दिसम्बर 2019
*हमारे देश की संस्कृति इतनी महान रही है कि समस्त विश्व ने हमारी संस्कृति को आत्मसात किया | सनातन ने सदैव नारी को शक्ति के रूप में प्रतिपादित / स्थापित करते हुए सम्माननीय एवं पूज्यनीय माना है | इस मान्यता के विपरीत जाकर जिसने भी नारियों के सम्मान के विपरीत जाकर उनसे व्यवहार करने का प्रयास किया है उसक
02 दिसम्बर 2019
21 नवम्बर 2019
*परमात्मा के द्वारा मैथुनी सृष्टि का विस्तार करके इसे गतिशील किया गया | मानव जीवन में बताये गये सोलह संस्कारों में प्रमुख है विवाह संस्कार | विवाह संस्कार सम्पन्न होने के बाद पति - पत्नी एक नया जीवन प्रारम्भ करके सृष्टि में अपना योगदान करते हैं | सनातन धर्ण के सभी संस्कार स्वयं में अद्भुत व दिव्य रह
21 नवम्बर 2019
09 दिसम्बर 2019
*इस संपूर्ण विश्व में प्रारंभ से ही भारत देश अपने क्रियाकलापों एवं दूरदर्शिता के लिए जाना जाता रहा है | विश्व के समस्त देशों की अपेक्षा भारत की सभ्यता , संस्कृति एवं आपसी सामंजस्य एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता रहा है | यहां पूर्व काल में एक दूसरे के सहयोग से दुष्कर से दुष्कर कार्य मनुष्य करता रहा है
09 दिसम्बर 2019
10 दिसम्बर 2019
*इस संपूर्ण सृष्टि की रचना पारब्रह्म परमेश्वर ने अपनी इच्छा मात्र से कर दिया | इस सृष्टि का मूल वह परमात्मा ही है | प्रत्येक मनुष्य को मूल तत्व का सदैव ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यदि मूल को अनदेखा कर दिया जाए तो जीवन सुचारू रूप से नहीं चल सकता | जिस प्रकार इस सृष्टि का मूल परमात्मा है उसी प्रकार मनुष्
10 दिसम्बर 2019
14 नवम्बर 2019
*सृष्टि के आदिकाल में वेद प्रकट हुए , वेदों का विन्यास करके वेदव्यास जी ने अनेकों पुराणों का लेखन किया परंतु उनको संतोष नहीं हुआ तब नारद जी के कहने से उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की | श्रीमद्भागवत के विषय में कहा जाता है यह वेद उपनिषदों के मंथन से निकला हुआ ऐसा नवनीत (मक्खन) है जो कि वेद
14 नवम्बर 2019
16 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य येन - केन प्रकारेण ईश्वर प्राप्ति का उपाय किया करता है | ईश्वर का प्रेम पिराप्त करने के लिए मनुष्य पूजा , अनुष्ठान , मन्दिरों में देवदर्शन तथा अनेक तीर्थों का भ्रमण किया करता है जबकि भगवान को कहीं भी ढूंढ़ने की आवश्यकता नहीं है मानव हृदय में तो ईश्वर का वास है ह
16 नवम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x