क्या सचमुच जो काम आप कर रहे है वो आपके स्वास्थ्य लिए सही है ?

26 नवम्बर 2019   |  शिल्पा रोंघे   (502 बार पढ़ा जा चुका है)

जब हमारा देश स्वतंत्र हुआ था, तब भारत एक कृषिप्रधान देश माना जाता था, साथ ही खेती किसानी को लोगों की आजीविका का साधान माना जाता था, दूसरा आजीविका का साधन था छोटा या बड़ा व्यवसाय, स्वतंत्रता के बाद औघोगिकरण की लहर चल पड़ी साथ ही प्राइवेट नौकरीयों का उदय भी हुआ, लेकिन ये प्राइवेटाईज़ेशन बड़े शहरों तक सीमित था, छोटे और बड़ें शहरों में प्राईवेट नौकरियों का दबदबा था, बढ़ती जनसंख्या के साथ सरकारी नौकरियों में अवसर कम हुए तब 90 के दशक में बड़ी संख्या में उच्च शिक्षित लोगों के सामने रोजगार के अवसर कम होने लगे और बेरोजगारी ने सुरसा की तरह मुंह फाड़ लिया।


ऐसे में ग्लोबलाईज़ेशन और उदारीकरण की नीति अपनाई गई और विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया गया, मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ उच्चशिक्षित युवाओं को नौकरी मिलने की दर बढ़ गई, लेकिन इन नौकरियों में भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हुए या फिर किसी नामी संस्थान से पढ़े लिखे विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाती थी, छोटे शहरों में रोजगार के लिए आज भी युवा पारंपरिक माध्यमों पर ही निर्भर है।

अब मंदी की मार जिसमे पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है उससे भारत कैसे अछूता रह सकता था भला। अब तो बड़ी बड़ी कंपनियां भी धराशयी हो रही है जिसकी मार उच्चशिक्षित लोगों पर भी पड़ रही है, जाहिर है कि नौकरियों के मौके कम होगे तो काम का दबाव भी बढ़ेगा, इसका सीधा असर शारिरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है तनाव, ब्लप्रेशर, सिरदर्द, थकान जैसी समस्याओं को न्यौता भी मिलता है। कहीं कहीं लंबी नाईट शिफ्ट के कारण भी शरीर पर बुरा असर होता है।

कहीं आप भी अपने स्वास्थ्य को दरकिनार कर ऐसी जॉब कर रहे है जो कहने को तो 9 से 5 है लेकिन अपना काम करते करते आप को रात के 12 या दो भी बज जाते है तो आप को एक बार ये सोचने की ज़रुरत ज़रुर है कि वो आपके लिए सही है या लंबे वक्त तक इस तरह किया जाने वाला काम आपको बीमार ना बना दे।

बात तब और बिगड़ जाती है जब अपने ऑफिस में ओवर टाईम भी कर रहे हो साथ साथ ऑफिस पॉलिटिक्स को भी झेलना पड़ रहा हो, आपके काम का प्रोत्साहन होना तो दूर हतोत्साहन ज्यादा हो रहा हो तो शारिरिक के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ जाता है।

अब ऐसे में सवाल ये उठ खड़ा होता है कि आखिर किया क्या जाए अगर हम अपनी जॉब नहीं करेंगे तो आजीविका कैसे चलाई जाए, कुछ लोग ये तर्क देते है कि वो बहुत ज्यादा पढ़े लिखे है या अनुभवी है तो जॉब उनके रुतबे के अनुसार होनी चाहिए, लेकिन ये तर्क देते वक्त वो ये भूल जाते है कि शारिरिक रुप से स्वस्थ होना कितना ज़रूरी है।

हम ये नहीं कह रहे है कि किसी को एकदम से अपना जॉब छोड़ देना चाहिए, लेकिन अन्य विकल्पों जैसे सेल्फ एम्पालाईड होने, या फिर अपने कार्यक्षेत्र में परिवर्तन करने के बारे में पूरी योजना बनाकर सोचना चाहिए कि उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना भी ना करना पड़े और वो अपनी रुचि का काम कर सके।

इसके लिए मौजूदा बाजार और उपभोक्ताओं की ज़रूरत और मानसिकता का अध्यन करना बेहद ज़रुरी होता है।

अगला लेख: सोने की चिड़िया ?



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
01 दिसम्बर 2019
का
काश कोई आईना ऐसा भी होता.क्या मंजूर है दुनिया बनाने वाले को,पहले से ही बता देता, दिल की उलझन को चुटकियों में ही सुलझा देता.शिल्पा रोंघे
01 दिसम्बर 2019
14 नवम्बर 2019
कर्मयोग – कर्म की तीनसंज्ञाएँजैसा कि पहले लिखा, कर्ता के भाव के अनुसार कर्म की तीन संज्ञाएँ होती हैं – कर्म, अकर्म और विकर्म | इन तीन संज्ञाओं के साथ साथ हमारेशास्त्रकारों ने कर्म के तीन रूप भी बताए हैं | इनमें प्रथम है संचित कर्म | अनेकजन्मों से लेकर अब तक के संगृहीत कर्म ही संचित कर्म कहलाते हैं |
14 नवम्बर 2019
20 नवम्बर 2019
इतिहास भले ही गुजरा हुआ वक्त होता है इसका मतलब नहीं हैकि इसके बारे में जानकारी होना हमारे लिए उपयोगी नहीं होता है, ये हमारे देश की धरोहर होता है, मानवसभ्यता के विकास और इतिहास से मिले सबक ही सुनहरे भविष्य को गढ़ने में मदद करतेहै। आज अपने इस
20 नवम्बर 2019
14 नवम्बर 2019
पिछले कई दशकों से अयोध्या मामला अटका हुआ था और अब इसका फैसला सामने आ गया है। 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया और इसमें विवादित जमीन पर रामलला मंदिर बनने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अयोध्या में ही मुस्लिम कमेटी को 5 एकड़ जमीन देने का भी आदेश दिया है। 3 महीने के अंदर राम मंदिर का कार्
14 नवम्बर 2019
13 नवम्बर 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <o:OfficeDocumentSettings> <o:RelyOnVML/> <o:AllowPNG/> </o:OfficeDocumentSettings></xml><![endif]--><!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKer
13 नवम्बर 2019
22 नवम्बर 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves></w:TrackMoves> <w:TrackFormatting></w:TrackFormatting> <w:PunctuationKerning></w:PunctuationKerning> <
22 नवम्बर 2019
19 नवम्बर 2019
नशा "नाश" का दूसरा नाम है.ये नाश करता है बुद्धि का.ये नाश करता है धन का.ये नाश करता है संबंधों का.ये नाश करता है नैतिक मूल्यों का.नाश नहीं निर्माण की तरफ बढ़ोयुवाओं तुम नशामुक्त समाज बनानेका संकल्प लो.शिल्पा रोंघे
19 नवम्बर 2019
22 नवम्बर 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves></w:TrackMoves> <w:TrackFormatting></w:TrackFormatting> <w:PunctuationKerning></w:PunctuationKerning> <
22 नवम्बर 2019
29 नवम्बर 2019
क्
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedC
29 नवम्बर 2019
29 नवम्बर 2019
क्
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedC
29 नवम्बर 2019
19 नवम्बर 2019
हुई सभा एक दिन गुड्डे गुड़ियों की.गुड़िया बोली,मैं सुंदरता की पुड़ियामुझसे ना कोई बढ़िया.इतने में आया गुड्डापहन के लाल चोला,कितनों का घमंड है मैंने तोड़ा.बीच में उचका काठी का घोड़ाअरे चुप हो जाओ तुम थोड़ा.मैंने ही हवा का रुख़ है मोड़ा.लट्टू घूमा, कुछ झूमा.बोला लड़ों
19 नवम्बर 2019
21 नवम्बर 2019
कहीं कांप रही धरती. कहीं बेमौसम बारिश से बह रही धरती. कहीं ठंड के मौसम में बुखार से तप रही धरती. कभी जल से, तो कभी वायु प्रदूषण से ज़हरीली हो रही प्रकृति. विकास के नाम पर विनाश का दर्द झेलती प्रकृति अपनी ही संतति से अवहेलना प्
21 नवम्बर 2019
12 नवम्बर 2019
*आदिकाल से ही से ही इस धराधाम पर अनेकों योद्धा ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपनी शक्तियों का संचय करके एक विशाल जनसमूह को अपने वशीभूत किया एवं उन्हीं के माध्यम से मानवता के विरुद्ध कृत्य करना प्रारंभ किया | पूर्वकाल में ऐसे लोगों को राक्षस या निशाचर कहा जाता था | इनके अनेक अनुयायी ऐसे भी होते थे जिनको यह न
12 नवम्बर 2019
14 नवम्बर 2019
जो भी इंसान इस दुनिया में आया है उसे जाना ही है और यही दुनिया का प्रावधान है। मगर जब कोई लेजेंड इस दुनिया से जाता है और यहां हम बात एक ऐसे गणितज्ञ की करने जा रहे हैं जिन्होंने 14 नवंबर को आखिरी सांस ली। महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने 74 साल की उम्र में अपनी आखिरी सांस ली। काफी समय से बीमारी के क
14 नवम्बर 2019
12 नवम्बर 2019
सांप सीढ़ी सिर्फखेल नहीं,जीवन दर्शन भी है.सफलता और विफलता दुश्मन नहीं, एक दूसरे की साथी है.हर रास्ते पर सांप सा रोड़ा, कभी मंजिल के बेहद करीब आकर भी लौटना पड़ता है.कभी सिफ़र से शिखर तो कभी शिखर से सिफ़र का सफ़र तय करना पड़ता है.सफलता का कोई
12 नवम्बर 2019
03 दिसम्बर 2019
Forensic Artist में करियर बनाकर मोटी सैलरी पाये Forensic artist kaise baneआज दुनिया मे अपराध बढ़ने के साथ - साथ forensic artist की डिमांड भी बढ़ती जा रही है। अपराधियों को पकड़ने में इनका बहुत बड़ा योगदान होता है। forensic sketch artist के द्वारा क्राइम करने वाले के चेहरे को प
03 दिसम्बर 2019
19 नवम्बर 2019
नशा "नाश" का दूसरा नाम है.ये नाश करता है बुद्धि का.ये नाश करता है धन का.ये नाश करता है संबंधों का.ये नाश करता है नैतिक मूल्यों का.नाश नहीं निर्माण की तरफ बढ़ोयुवाओं तुम नशामुक्त समाज बनानेका संकल्प लो.शिल्पा रोंघे
19 नवम्बर 2019
02 दिसम्बर 2019
*हमारे देश की संस्कृति इतनी महान रही है कि समस्त विश्व ने हमारी संस्कृति को आत्मसात किया | सनातन ने सदैव नारी को शक्ति के रूप में प्रतिपादित / स्थापित करते हुए सम्माननीय एवं पूज्यनीय माना है | इस मान्यता के विपरीत जाकर जिसने भी नारियों के सम्मान के विपरीत जाकर उनसे व्यवहार करने का प्रयास किया है उसक
02 दिसम्बर 2019
19 नवम्बर 2019
हुई सभा एक दिन गुड्डे गुड़ियों की.गुड़िया बोली,मैं सुंदरता की पुड़ियामुझसे ना कोई बढ़िया.इतने में आया गुड्डापहन के लाल चोला,कितनों का घमंड है मैंने तोड़ा.बीच में उचका काठी का घोड़ाअरे चुप हो जाओ तुम थोड़ा.मैंने ही हवा का रुख़ है मोड़ा.लट्टू घूमा, कुछ झूमा.बोला लड़ों
19 नवम्बर 2019
15 नवम्बर 2019
सो
फ्रेंच के साथ फ्रांसीसी जर्मन के साथ जर्मनवासी,जापानी भाषा के साथ जापान निवासी बना गए देश को विकसित और उन्नत.अंग्रेजी सभ्यता के बनकरअनुगामी, विकासशील से विकसित राष्ट्र का सफर अब तक क्या तय कर पाए है हिन्दुस्तानी ?
15 नवम्बर 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x