अन्न साक्षात परब्रह्म :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

27 नवम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (3509 बार पढ़ा जा चुका है)

अन्न साक्षात परब्रह्म :-- आचार्य अर्जुन तिवारी


*इस संसार में जन्म लेने के बाद मनुष्य कथा - प्रवचन / सतसंग के माध्यम से सद्गुरुओं के मुखारविन्द से प्राय: सुना करता है कि "ब्रह्म सत्यं जगत् मिथ्या" अर्थात :- ब्रह्म ही सत्य है शेष सारा संसार छूठा है | दूसरा शब्द सुनने को मिलता है कि "एको ब्रह्म द्वितीयोनास्ति" अर्थात :- एक वहीं ब्रह्म चराचर में व्याप्त है कहीं भी कोई दूसरा है ही नहीं | कहीं भगवान राम को ब्रह्म की उपमा देते हुए तुलसीदास जी लिखते हैं "राम ब्रह्म परमारथ रूपा" तो कहीं ब्रह्म को आदि अनादि कहा गया है | हमारे ऋषि - महर्षियो ने इस ब्रह्म को जानने के लिए अनेको जन्म व्यतीत कर दिए हैं परंतु ब्रह्म को पूर्ण रूप से जान पाने में कितना सफल हुये है यह कह पाना कठिन है | ब्रह्म को प्राप्त करने के लिए मनुष्य अनेकानेक उपाय करता है | हमारे ऋषियों ने कर्म के साथ-साथ कठिन से कठिन तपस्या भी किया है ब्रह्म को जानने एवं पाने के लिए | ब्रह्म की खोज करने के लिए महर्षि भृगु ने अनेकानेक ग्रंथों का धर्म शास्त्रों का अध्ययन किया परंतु उन्हें ब्रह्म का बोध नहीं हो पाया तब उन्होंने अपने पिता वरुण से पूछा कि हे पिताजी ! मैं जिस ब्रह्म को खोजने या जानने का प्रयास कर रहा हूं वह हमको कहीं दिख नहीं रहा है ! तो आप हमको बताइए कि आखिर ब्रह्म है क्या ? अपने पुत्र महर्षि भृगु के प्रश्न को सुनकर के वरुण देवता ने बहुत ही विस्तार से सरल भाषा में उनको बताया कि हे पुत्र ! "अन्नम् प्राणम् चक्षु: श्रोभं मनो वचमिति" अर्थात :- अन्न , प्राण , तप , विज्ञान , आनन्द , मन और वाणी ही ब्रह्म है | इन सबमें श्रेष्ठ अन्न ही है क्योंकि मनुष्य अन्न का सेवन करके ही जीवित रहता है और जब मनुष्य जीवित रहेगा तभी वह तप - तप , या ज्ञान - विज्ञान का अध्ययन करके मन में आनन्दित हो सकता है | साधारण सी बात है कि प्राण के बिना शरीर का कोई महत्त्व नहीं है और अन्न के बिना प्राण रह पाना भी असम्भव है इसलिए अन्न को ब्रह्म कहा गया है | पारब्रह्म को जान पाना तो शायद आज के मनुष्य के बस की बात नहीं है परन्तु साक्षात उपस्थित अन्न रूपी ब्रह्म का दर्शन तो सभी कर रहे हैं | जिस प्रकार पारब्रह्म परमात्मा बिना भेदभाव के समान रूप से सभी जीवों जल , वायु आदि प्रदान करते हैं उसी प्रकार इस धराधाम पर अन्न भी सभी प्राणियों को बिना भेदभाव किये समान रूप से पोषित करता है | इसीलिए अन्न इस धराधाम का साक्षात ब्रह्म है हृदय से अन्न को ब्रह्म मानकर प्रत्येक मनुष्य को इसका आदर करना चाहिए क्योंकि एक दिन यदि यही अन्न नहीं मिलता है तो मनुष्य उसके लिए अनेकों प्रकार के उद्यम करने पर यहाँ तक कि भिक्षा मांगने तक को विवश हो जाता है | अत: अन्न रूपी ब्रह्म का निरादर कभी नहीं करना चाहिए |*


*आज जिस प्रकार गांवों का शहरीकरण हो रहा है उस से आने वाली निकट भविष्य में यदि अन्न का संकट उत्पन्न हो जाय तो यह कहना गलत ना होगा | अन्न का उत्पादन करने वाले किसान को ग्रामदेवता कहा गया है तो अन्न को ब्रह्म मान करके यदि इसकी पूजा ना की जाय तो कम से कम इसक आदर अवश्य किया जाय | अन्न का क्या महत्व होता है इसको कोई भूखा मनुष्य ही बता सकता है | आज कई देश अन्न की कमी के चलते भुखमरी की कगार पर है | हमारा देश भारत कृषि प्रधान देश कहा जाता है जहां अन्न का उत्पादन किसान बड़ी श्रद्धा एवं लगन के साथ करते हैं | परंतु आज के आधुनिक युग में खेतों का अस्तित्व भी संकट में है | इसके अतिरिक्त मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" देख रहा हूं कि आज बड़े-बड़े आयोजन विवाह आदि बहुत ही भव्यता से किया जा रहे हैं जिसमें बहुतायत भोजन बर्बाद होता दिख रहा है | पूर्वकाल में जहां लोग आने वाले मेहमानों को प्रेम से बैठा कर भोजन परोस कर खिलाते थे वहीं आज की परंपरा यह है कि पांडालों में स्वयं भोजन परोस कर लोग खा रहे हैं | भोजन के समय एक साथ इतनी भीड़ हो जाती है कि लोग ज्यादा से ज्यादा मात्रा में भोजन अपनी थाली में परोस लेना चाहते हैं , जिसका परिणाम यह होता है कि उनकी थाली का सारा भोजन वह स्वयं नहीं खा पाते हैं और उसे फेंक देते हैं | विचार कीजिए कि हम नित्य पूजा पाठ करके ब्रह्म को पाने का उपाय तो करते हैं परंतु साक्षात ब्रह्म अर्थात अन्न का निरादर जाने - अनजाने प्रतिदिन कर रहे हैॉ | यदि हमारे द्वारा ऐसा होता है तो हम ब्रह्म के विषय में क्या जान पाएंगे ? और उसे कैसे प्राप्त कर पाएंगे ? जब ब्रह्म के छोटे स्वरूप अन्न का आदर नहीं कर पा रहे हैं और उसे बर्बाद कर रहे हैं तो आने वाले दिनों में क्या स्थिति होगी यह सोचकर ही भय लगता है | यदि किसी वर्ष अन्न का उत्पादन दुर्भाग्यवश कम होता है तो किसान के साथ साथ पूरा देश महंगाई की अग्नि में जलने लगता है | अत: अन्न के महत्व को समझकर के इसकी सुरक्षा एवं आवश्यकता के अनुसार उपयोग करके मनुष्य एक प्रकार से ब्रह्म की उपासना कर सकता है , अन्यथा ब्रह्म को जान पाना कठिन ही नहीं बल्कि असंभव भी है |*


*अन्न को साक्षात् ब्रह्म मान करके इसका आदर करना प्रत्येक मनुष्य का धर्म है | मनुष्य धर्माधिकारी तो बन बैठा है परंतु इस छोटे धर्म का पालन आज उसके द्वारा नहीं हो पा रहा है | यह चिंतनीय विषय है |*



अन्न साक्षात परब्रह्म :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

अगला लेख: जातस्य हि ध्रुवो मृत्यु: :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



अनूप दीक्षित
28 नवम्बर 2019

जय जय सियाराम

जय जय सियाराम दीक्षित जी

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
21 नवम्बर 2019
*सनातन धर्म में सोलह संस्कारों का वर्णन मिलता है इन संस्कारों में एक महत्वपूर्ण संस्कार है विवाह संस्कार | मनुष्य योनि में जन्म लेने के बाद वैवाहिक संस्कार महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि सनातन धर्म में बताए गए चार आश्रम में सबसे महत्वपूर्ण है गृहस्थाश्रम | गृहस्थाश्रम में प्रवेश करने के लिए विवाह संस
21 नवम्बर 2019
12 नवम्बर 2019
*आदिकाल से ही से ही इस धराधाम पर अनेकों योद्धा ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपनी शक्तियों का संचय करके एक विशाल जनसमूह को अपने वशीभूत किया एवं उन्हीं के माध्यम से मानवता के विरुद्ध कृत्य करना प्रारंभ किया | पूर्वकाल में ऐसे लोगों को राक्षस या निशाचर कहा जाता था | इनके अनेक अनुयायी ऐसे भी होते थे जिनको यह न
12 नवम्बर 2019
21 नवम्बर 2019
*परमात्मा के द्वारा मैथुनी सृष्टि का विस्तार करके इसे गतिशील किया गया | मानव जीवन में बताये गये सोलह संस्कारों में प्रमुख है विवाह संस्कार | विवाह संस्कार सम्पन्न होने के बाद पति - पत्नी एक नया जीवन प्रारम्भ करके सृष्टि में अपना योगदान करते हैं | सनातन धर्ण के सभी संस्कार स्वयं में अद्भुत व दिव्य रह
21 नवम्बर 2019
01 दिसम्बर 2019
*आदिकाल से इस धरा धाम पर सनातन धर्म की स्थापना मानी जाती है | सनातन धर्म ने सदैव देव पूजा के साथ-साथ प्रकृति पूजा को भी महत्व दिया है | पृथ्वी पर जन्म लेकर के मनुष्य बड़ा होता है , इसीलिए पृथ्वी को माता की संज्ञा दी गई है , उसी की गोद में मनुष्य का बचपन व्यतीत होता है | इसके अतिरिक्त पहाड़ों , नदिय
01 दिसम्बर 2019
28 नवम्बर 2019
*ईश्वर द्वारा बनाई गयी सृष्टि बहुत ही देदीप्यमान एवं सुंदर है | मनुष्य के जन्म के पहले ही उसे सारी सुख - सुविधायें प्राप्त रहती हैं | जन्म लेने के बाद मनुष्य परिवार में प्रगति एवं विकास करते हुए पारिवारिक संस्कृति को स्वयं में समाहित करने लगता है | मनुष्य का जीवन ऐसा है कि एक क्षण भी कर्म किये बिना
28 नवम्बर 2019
25 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर परमपिता परमात्मा ने जलचर , थलचर नभचर आदि योनियों की उत्पत्ति की | कुल मिलाकर चौरासी लाख योनियाँ इस पृथ्वी पर विचरण करती हैं , इन सब में सर्वश्रेष्ठ योनि मनुष्य को कहा गया है क्योंकि जहां अन्य जीव एक निश्चित कर्म करते रहते हैं वही मनुष्य को ईश्वर ने विवेक दिया है , कोई भी कार्य करने के
25 नवम्बर 2019
26 नवम्बर 2019
❌ *इस संसार परमात्मा ने अनेकानेक जीवो का सृजन किया | पशु - पक्षी ,कीड़े - मकोड़े और जलीय जंतुओं का सृजन करने के साथ ही मनुष्य का भी सृजन परमात्मा ने किया | सभी जीवो में समान रूप से आंख , मुख , नाक , कान एवं हाथ - पैर दिखाई देते हैं परंतु इन सब में मनुष्य को उस परमात्मा ने एक अमोघ शक्ति के रूप में बु
26 नवम्बर 2019
26 नवम्बर 2019
*इस संसार परमात्मा ने अनेकानेक जीवो का सृजन किया | पशु - पक्षी ,कीड़े - मकोड़े और जलीय जंतुओं का सृजन करने के साथ ही मनुष्य का भी सृजन परमात्मा ने किया | सभी जीवो में समान रूप से आंख , मुख , नाक , कान एवं हाथ - पैर दिखाई देते हैं परंतु इन सब में मनुष्य को उस परमात्मा
26 नवम्बर 2019
27 नवम्बर 2019
*ईश्वर की बनायी यह सृष्टि बहुत ही विचित्र है , यहां एक ही भाँति दिखने वाले मनुष्यों के क्रियाकलाप भिन्न - भिन्न होते हैं | मनुष्य के आचरण एवं उसके क्रियाकलापों के द्वारा ही उनकी श्रेणियां निर्धारित हो जाती है | वैसे तो मनुष्य की अनेक श्रेणियां हैं परंतु मुख्यतः दो श्रेणियों में मनुष्य बंटा हुआ है |
27 नवम्बर 2019
17 नवम्बर 2019
*इस सकल सृष्टि में समस्त जड़ चेतन के मध्य मनुष्य सिरमौर बना हुआ है | जन्म लेने के बाद मनुष्य को अपने माता - पिता एवं सद्गुरु के द्वारा सत्य की शिक्षा दी जाती है | यह सत्या आखिर है क्या ? तीनो लोक चौदहों भुवन में एक ही सत्य बताया गया है वह है परमात्मा | जिसके लिए लिखा भी गया है :-- "ब्रह्म सत्यं जगत
17 नवम्बर 2019
16 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य येन - केन प्रकारेण ईश्वर प्राप्ति का उपाय किया करता है | ईश्वर का प्रेम पिराप्त करने के लिए मनुष्य पूजा , अनुष्ठान , मन्दिरों में देवदर्शन तथा अनेक तीर्थों का भ्रमण किया करता है जबकि भगवान को कहीं भी ढूंढ़ने की आवश्यकता नहीं है मानव हृदय में तो ईश्वर का वास है ह
16 नवम्बर 2019
30 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर जन्म लेकर मनुष्य परमपिता परमेश्वर को प्राप्त करने के लिए अनेकों प्रकार के उपाय करता है यहां तक कि कभी-कभी वह संसार से विरक्त होकर के अकेले में बैठ कर परमात्मा का ध्यान तो करता ही रहता है साथ ही वह भावावेश में रोने भी लगता है और मन में विचार करता है कि हमको परमात्मा ने इस संसार में क्यो
30 नवम्बर 2019
21 नवम्बर 2019
*सनातन धर्म में सोलह संस्कारों का वर्णन मिलता है इन संस्कारों में एक महत्वपूर्ण संस्कार है विवाह संस्कार | मनुष्य योनि में जन्म लेने के बाद वैवाहिक संस्कार महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि सनातन धर्म में बताए गए चार आश्रम में सबसे महत्वपूर्ण है गृहस्थाश्रम | गृहस्थाश्रम में प्रवेश करने के लिए विवाह संस
21 नवम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x