सन्त - असन्त :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

27 नवम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (471 बार पढ़ा जा चुका है)

सन्त - असन्त :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*ईश्वर की बनायी यह सृष्टि बहुत ही विचित्र है , यहां एक ही भाँति दिखने वाले मनुष्यों के क्रियाकलाप भिन्न - भिन्न होते हैं | मनुष्य के आचरण एवं उसके क्रियाकलापों के द्वारा ही उनकी श्रेणियां निर्धारित हो जाती है | वैसे तो मनुष्य की अनेक श्रेणियां हैं परंतु मुख्यतः दो श्रेणियों में मनुष्य बंटा हुआ है | प्रथम सज्जन एवं द्वितीय दुर्जन | सज्जन एवं दुर्जन के बीच सारा संसार चल रहा है इसी को हमारे महापुरुषों ने संत एवं असंत कहा है | मानव समाज में सन्त और असंत दो ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनमें भिन्नता स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है | जहां सन्त का व्यक्तित्व उत्कृष्ट होता है वही असंत सदैव निकृष्टता का परिचय देता रहता है | संत एवं असंत की पहचान करनी हो तो वेशभूषा से नहीं बल्कि उनके गुणों के आधार पर ही हो सकती है क्योंकि बाहरी वेशभूषा के आधार पर आडंबर करके भले ही कोई व्यक्ति सन्त बनने का प्रयास करें परंतु उसका यह प्रयास बहुत देर तक नहीं चल पाता और एक ना एक दिन उसका भेद खुल ही जाता है | सज्जन एवं दुर्जन या सन्त एवं असन्त इसी संसार में पैदा होते हैं परंतु अपने गुणों के माध्यम से आचरण करके अपनी श्रेणियां स्वयं निर्धारित कर लेते हैं | दुर्जन व्यक्ति स्वयं की वेशभूषा बनाकर संत बनने का दिखावा करके लोगों को छलने का प्रयास करता है परंतु उसकी दशा कालनेमि वाली होती है , अर्थात उसका भेद खुल जाता है | वहीं दूसरी ओर विकृत रूप बना लेने के बाद भी साधु व्यक्ति का सम्मान कम नहीं होता | जहां सन्त कल्याणकारी होते हैं वही मनुष्य के दुर्भाग्य का उदय होने पर असंतों का संग प्राप्त हो जाता है | प्रत्येक मनुष्य को किसी भी सन्त या असन्त की पहचान करने के लिए इनके चमक - दमक एवं पहनावे पर ना जाकर के उनके आचरण एवं गुणों का आकलन करना चाहिए | सन्त अपनी बड़ाई एवं गुणों का वर्णन नहीं सुनना चाहते हैं वही दूसरों के गुण एवं उसकी बड़ाई सुनने में उन्हें विशेष हर्ष होता है , क्योंकि वास्तविक संतों के हृदय में समता और शीतलता का वास होता है और यह कभी न्याय का त्याग नहीं करते हैं | सब से प्रेम करने वाले यह सन्त सरल स्वभाव के होते हुए मानव कल्याण के लिए निरंतर कार्य करते रहते हैं | आवश्यकता है संत एवं असंत के पहचान करने की | इनकी पहचान ना हो पाने पर मनुष्य सन्त के वेश में घूम रहे असंतो के द्वारा ठग लिया जाता है |*


*आज के आधुनिक युग में सबसे कठिन है संत एवं असंत में भेद करना | आज के चमक दमक भरे युग में अनेक लोग सन्त वेश में घूम रहे हैं जिनका चरित्र बिल्कुल भी समाज का हितेषी नहीं कहा जा सकता | अपनी दुर्जनता के कारण गृहस्थ धर्म का त्याग करके सन्त बने कुछ लोग भोली - भाली जनता को कुछ चमत्कार दिखा के स्वयं के आधीन कर रहे हैं | प्रायः लोग विचार करते हैं कि संत और असंतों में भेद किया जाय ?? ऐसे सभी लोगों को मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस में संतों के लक्षण बताने का प्रयास करूंगा ! जहां बाबा जी ने बताया है कि :- "षट विकार ज़ित अनघ अकामा ! अचल अकिंचन सूचि सुखधामा !!" अर्थात :- सन्त सदैव षट विकारों ( काम , क्रोध , लोभ , मोह , मद और मत्सर पर विजय प्राप्त करके पापरहित , कामनारहित , निश्चल (स्थिरबुद्धि) अकिंचन (सर्वत्यागी) भीतर एवं बाहर से पवित्र , सुख के धाम , असीम ज्ञानवान , इच्छारहित मिताहारी , सत्यनिष्ठ , कवि , विद्वान एवं योगी होते हैं | यह लक्षण जिस भी सन्त के भीतर दिखाई पड़े उसे ही सन्त मांगना चाहिए , अन्यथा सन्त वेश में जीवन यापन करने वाले दुर्जन ही हो सकते हैं | जिन गुणों की चर्चा बाबा जी ने मानस में की है आज के परिवेश में वह सारे गुण एक साथ किसी भी सन्त में मिल पाना असंभव दिख रहा है | आज प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के विषयों में लिप्त होकर के जीवन यापन कर रहा है | जहां संतों का कार्य होता था मानव मात्र का कल्याण करना वहीं आज संत समाज भी स्वार्थ बस कार्य करने लगा है | अतः एक बुद्धिमान व्यक्ति का यह कर्तव्य बनता है कि किसी भी संत की वेशभूषा , चमक-दमक पर ना जाकर के उनके चरित्रों एवं गुणों का आकलन करके ही उनकी शिष्यता या उनका सानिध्य प्राप्त करें , क्योंकि सत्संग संतो के माध्यम से ही प्राप्त होता है इसलिए संतो से सत्संग एवं असंतों से दूरी बनाए रखने में ही मनुष्य का कल्याण है |*


*जिस प्रकार कुल्हाड़ी द्वारा चन्दन को काट देने पर भी चन्दन अपना गुण उसे देकर के सुगंधित और सुवासित कर देता है उसी प्रकार अपना अहित होने पर भी सन्त अपनी छाप अहित करने वाले पर भी छोड़ देता है | इसका सदैव ध्यान रखना चाहिए |*

अगला लेख: जातस्य हि ध्रुवो मृत्यु: :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
02 दिसम्बर 2019
*हमारे देश की संस्कृति इतनी महान रही है कि समस्त विश्व ने हमारी संस्कृति को आत्मसात किया | सनातन ने सदैव नारी को शक्ति के रूप में प्रतिपादित / स्थापित करते हुए सम्माननीय एवं पूज्यनीय माना है | इस मान्यता के विपरीत जाकर जिसने भी नारियों के सम्मान के विपरीत जाकर उनसे व्यवहार करने का प्रयास किया है उसक
02 दिसम्बर 2019
28 नवम्बर 2019
*ईश्वर द्वारा बनाई गयी सृष्टि बहुत ही देदीप्यमान एवं सुंदर है | मनुष्य के जन्म के पहले ही उसे सारी सुख - सुविधायें प्राप्त रहती हैं | जन्म लेने के बाद मनुष्य परिवार में प्रगति एवं विकास करते हुए पारिवारिक संस्कृति को स्वयं में समाहित करने लगता है | मनुष्य का जीवन ऐसा है कि एक क्षण भी कर्म किये बिना
28 नवम्बर 2019
16 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य येन - केन प्रकारेण ईश्वर प्राप्ति का उपाय किया करता है | ईश्वर का प्रेम पिराप्त करने के लिए मनुष्य पूजा , अनुष्ठान , मन्दिरों में देवदर्शन तथा अनेक तीर्थों का भ्रमण किया करता है जबकि भगवान को कहीं भी ढूंढ़ने की आवश्यकता नहीं है मानव हृदय में तो ईश्वर का वास है ह
16 नवम्बर 2019
28 नवम्बर 2019
*इस समस्त सृष्टि में हमारा देश भारत अपने गौरवशाली संस्कृति एवं सभ्यता के लिए संपूर्ण विश्व में जाना जाता था | अनेक ऋषि - महर्षियों ने इसी पुण्य भूमि भारत में जन्म लेकर के मानव मात्र के कल्याण के लिए अनेकों प्रकार की मान्यताओं एवं परंपराओं का सृजन किया | संस्कृति एवं सभ्यता का प्रसार हमारे देश भारत स
28 नवम्बर 2019
25 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर परमपिता परमात्मा ने जलचर , थलचर नभचर आदि योनियों की उत्पत्ति की | कुल मिलाकर चौरासी लाख योनियाँ इस पृथ्वी पर विचरण करती हैं , इन सब में सर्वश्रेष्ठ योनि मनुष्य को कहा गया है क्योंकि जहां अन्य जीव एक निश्चित कर्म करते रहते हैं वही मनुष्य को ईश्वर ने विवेक दिया है , कोई भी कार्य करने के
25 नवम्बर 2019
10 दिसम्बर 2019
*इस संपूर्ण सृष्टि की रचना पारब्रह्म परमेश्वर ने अपनी इच्छा मात्र से कर दिया | इस सृष्टि का मूल वह परमात्मा ही है | प्रत्येक मनुष्य को मूल तत्व का सदैव ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यदि मूल को अनदेखा कर दिया जाए तो जीवन सुचारू रूप से नहीं चल सकता | जिस प्रकार इस सृष्टि का मूल परमात्मा है उसी प्रकार मनुष्
10 दिसम्बर 2019
17 नवम्बर 2019
*इस सकल सृष्टि में समस्त जड़ चेतन के मध्य मनुष्य सिरमौर बना हुआ है | जन्म लेने के बाद मनुष्य को अपने माता - पिता एवं सद्गुरु के द्वारा सत्य की शिक्षा दी जाती है | यह सत्या आखिर है क्या ? तीनो लोक चौदहों भुवन में एक ही सत्य बताया गया है वह है परमात्मा | जिसके लिए लिखा भी गया है :-- "ब्रह्म सत्यं जगत
17 नवम्बर 2019
08 दिसम्बर 2019
*सनातन धर्म के अनुसार मनुष्य का जीवन संस्कारों से बना होता है इसी को ध्यान में रखते हुए हमारे पूर्वजों ने मनुष्य के लिए सोलह संस्कारों का विधान बताया है | गर्भकाल से लेकर मृत्यु तक इन संस्कारों को मनुष्य स्वयं में समाहित करते हुए दिव्य
08 दिसम्बर 2019
09 दिसम्बर 2019
*इस संपूर्ण विश्व में प्रारंभ से ही भारत देश अपने क्रियाकलापों एवं दूरदर्शिता के लिए जाना जाता रहा है | विश्व के समस्त देशों की अपेक्षा भारत की सभ्यता , संस्कृति एवं आपसी सामंजस्य एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता रहा है | यहां पूर्व काल में एक दूसरे के सहयोग से दुष्कर से दुष्कर कार्य मनुष्य करता रहा है
09 दिसम्बर 2019
11 दिसम्बर 2019
*आदिकाल में परमपिता परमात्मा ने इस धरती पर जीवन की सृष्टि करते हुए अनेकों प्राणियों का सृजन किया | पशु पक्षी जिन्हें हम जानवर कहते हैं इनके साथ ही मनुष्य का भी निर्माण हुआ | मनुष्य ने अपने बुद्धि कौशल से निरंतर विकास किया और समाज में स्थापित हुआ | यदि वैज्ञानिक तथ्यों को माना जाय तो मनुष्य भी पहले प
11 दिसम्बर 2019
09 दिसम्बर 2019
*सनातन धर्म की मान्यता है कि महाराज मनु से मनुष्य की उत्पत्ति इस धराधाम पर हुई है इसीलिए उसे मानव या मनुष्य कहा जाता है | मनुष्यों के लिए अनेकों प्रकार के धर्मों का पालन करने का निर्देश भी प्राप्त होता है | प्रत्येक मनुष्य में दया , दान , शील , सौजन्य , धृति , क्षमा आदि गुणों का होना परमावश्यक है इन
09 दिसम्बर 2019
16 नवम्बर 2019
*परमात्मा की बनाई यह सृष्टि निरन्तर क्षरणशील है | एक दिन सबका ही अन्त निश्चित है | सृष्टि का विकास हुआ तो एक दिन महाप्रलय के रूप में इसका विनाश भी हो जाना है , सूर्य प्रात:काल उदय होता है तो एक निश्चित समय पर अस्त भी हो जाता है | उसी प्रकार इस सृष्टि में जितने भी जड़
16 नवम्बर 2019
26 नवम्बर 2019
❌ *इस संसार परमात्मा ने अनेकानेक जीवो का सृजन किया | पशु - पक्षी ,कीड़े - मकोड़े और जलीय जंतुओं का सृजन करने के साथ ही मनुष्य का भी सृजन परमात्मा ने किया | सभी जीवो में समान रूप से आंख , मुख , नाक , कान एवं हाथ - पैर दिखाई देते हैं परंतु इन सब में मनुष्य को उस परमात्मा ने एक अमोघ शक्ति के रूप में बु
26 नवम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x