बढ़ते यौन अपराध का कारण :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

02 दिसम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (466 बार पढ़ा जा चुका है)

बढ़ते यौन अपराध का कारण :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारे देश की संस्कृति इतनी महान रही है कि समस्त विश्व ने हमारी संस्कृति को आत्मसात किया | सनातन ने सदैव नारी को शक्ति के रूप में प्रतिपादित / स्थापित करते हुए सम्माननीय एवं पूज्यनीय माना है | इस मान्यता के विपरीत जाकर जिसने भी नारियों के सम्मान के विपरीत जाकर उनसे व्यवहार करने का प्रयास किया है उसका समूल विनाश ही हुआ है | त्रेतायुग में उच्चकुल में जन्म लेकर महान विद्वान बने रावण का विनाश उसकी कुचेष्टा के कारण ही हुआ | भरी सभा में महारानी द्रौपदी को नग्न करके अपनी जंधा पर बैठाने का आदेश देने वाला दुर्योधन हो या द्रौपदी का चीरहरण करने वाला दु:शासन हो उसका भी समूल विनाश हो गया है | जितना दोषी किसी नारी का अपमान करने वाला होता है उससे कहीं अधिक दोषी वह समाज होता है जो किसी नारी के अपमान को देख व सुनकर विरोध नहीं करता है इसका ज्वलंत उदाहरण उसी दुर्योधन की राजसभा में देखने को मिलता है जहाँ भीष्म , द्रोण जैसे धुरंधर वीरों ने इस कुकृत्य का विरोध तक नहीं किया और उनका भी वध ही हुआ है | धीरे-धीरे समय परिवर्तित हुआ त्रेता , द्वापर के बाद कलियुग में इस प्रकार के कृत्यों का चारों और बोलबाला हो गया | इसका कारण मात्र कोई एक बलात्कारी नहीं अपितु पूरे समाज को कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी | अपनी सनातन सभ्यता के लिए जाना जाने वाला देश आज इतना पतित हो गया है कि हमारे देश में बेटियां सुरक्षित नहीं है | इसका कारण कोई एक ना हो करके समाज के सभी प्राणी है | बलात्कार किसी एक बेटी का होता है परंतु उसका विरोध करने वाले बहुत कम मात्रा में देखे जाते हैं | इसका एक कारण और भी है कि आज टेलीविजन के माध्यम से घर-घर में बलात्कार दिखाया जा रहा है और लोगों मजे लेकर उसे देखते - देखते इसे देखने के अभ्यस्त हो गये हैं | ये मूर्ख लोग यह विचार नहीं कर पाते कि हमारे द्वारा देखे गए इस दृश्य को हमारा पुत्र , हमारा परिवार जिसमें हमारी पुत्री एवं बहू भी है सब देख रहे हैं | यदि इस प्रकार के कुकृत्य आज बढ़े हैं तो इसमें अश्लील साहित्य एवं घर-घर में पनपा टेलीविजन एवं उनमें दिखाए जाने वाले आपत्तिजनक दृश्यों के अतिरिक्त सबसे ज्यादा यदि कोई बेशर्मी का दृश्य होता है तो वह भोजपुरी फिल्मों में होता है | जब हम इसको देखने से स्वयं को नहीं रोक पा रहे हैं तो समाज में आए दिन हो रहे बलात्कार से बेटियों को कैसे बचा पाएंगे ? यह विचारणीय एवं यक्ष प्रश्न है |*


*आज हमारा देश भारत विदेशी सभ्यता को स्वयं में आत्मसात करने के लिए दिन रात अंधी दौड़ में सम्मिलित तो हो गया है परंतु बलात्कार पर मौन हो जाता है | बलात्कारी का कोई धर्म नहीं होता उसे निशाचर एवं राक्षस की श्रेणी में गिना जाना चाहिए | जहां विदेशों में बलात्कारियों के लिए विभिन्न तरीकों से मौत के घाट उतारने का प्रावधान है वही हमारे देश भारत नें विदेशों से सब कुछ तो सीखा परंतु यह नहीं सीख पाया क्योंकि हमारे राजनेता अपनी राजनीति के चलते कोई कठोर निर्णय नहीं ले पा रहे हैं | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" देश के उच्च पदों पर बैठे हुए सभी आदरणीयों से इतना ही कहना चाहूंगा कि बलात्कार जैसे कुकृत्य पर राजनीत से ऊपर उठकर एक कठोर कानून बनाने की आवश्यकता अब आ गई है | मोमबत्ती जलाकर किसी पीड़िता के प्रति संवेदना प्रकट करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेने मात्र से यह अपराध नहीं रुकने वाला है , इसके लिए देश में एक ऐसा कानून होना चाहिए जिसने बलात्कारी के लिए मात्र एक दंड हो और वह प्राणदंड होना चाहिए | ऐसे अपराधियों को ऐसी मृत्यु दी जानी चाहिए जिसे पूरा समाज देख सके एवं ऐसा करने वाले इस कुकृत्य को करने के पहले हजारों बार विचार करने पर विवश हो जायं अन्यथा आए दिन निर्भया , दिशा एवं प्रियंका रेड्डी जैसे शर्मसार कर देने वाली को कृत्यों को देखना विवशता हो जाएगी | सर्वप्रथम तो अश्लील साहित्य एवं टीवी चैनल पर दिखाई जाने वाली फिल्म से ऐसे दृश्य को सेंसर द्वारा अलग करने की आवश्यकता है और साथ ही अपनी संतानों को संस्कारवान बनाने की भी आवश्यकता है और यह तभी संभव होगा जब हम स्वयं संस्कारवान बनते हुए ऐसी फिल्मों एवं चैनलों का बहिष्कार करेंगे |*


*आज पूरे देश में हैदराबाद की घटना पर उबाल देखने को मिल रहा है चार दिन बीत जाने पर यह उबाल पानी के बुलबुले की तरह बैठ जाएगा और फिर कोई प्रियंका रेड्डी इन बलात्कारियों का शिकार हो जाएगी | ऐसा ना होने पाए इसके लिए मात्र सरकार को ही नहीं वरन समाज के एक-एक व्यक्ति को सोचना होगा एवं इसके लिए आर-पार की लड़ाई लड़नी होगी |*

अगला लेख: जातस्य हि ध्रुवो मृत्यु: :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
22 नवम्बर 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves></w:TrackMoves> <w:TrackFormatting></w:TrackFormatting> <w:PunctuationKerning></w:PunctuationKerning> <
22 नवम्बर 2019
18 नवम्बर 2019
*इस संसार में प्राय: दो शब्द सुनने को मिलते हैं शिक्षा एवं दीक्षा | शिक्षा एवं दीक्षा मानव जीवन की दिशा एवं दशा परिवर्तित करने में सक्षम होती है | जहाँ शिक्षा का अर्थ होता है ज्ञानार्जन करना वहीं दीक्षा का अर्थ दिशा प्राप्त करना बताया गया है | पूर्वकाल में गुरु के द्वारा पहले शिष्य की योग्यता के अनु
18 नवम्बर 2019
14 नवम्बर 2019
*सृष्टि के आदिकाल में वेद प्रकट हुए , वेदों का विन्यास करके वेदव्यास जी ने अनेकों पुराणों का लेखन किया परंतु उनको संतोष नहीं हुआ तब नारद जी के कहने से उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की | श्रीमद्भागवत के विषय में कहा जाता है यह वेद उपनिषदों के मंथन से निकला हुआ ऐसा नवनीत (मक्खन) है जो कि वेद
14 नवम्बर 2019
30 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर परमात्मा ने अनेकों प्रकार के पशु-पक्षियों , जीव - जंतुओं का सृजन किया साथ ही मनुष्य को बनाया | मनुष्य को परमात्मा का युवराज कहा जाता है | इस धराधाम पर सभी प्रकार के जीव एक साथ निवास करते हैं , जिसमें से सर्वाधिक निकटता मनुष्य एवं पशुओं की आदिकाल से ही रही है | जीवमात्र के ऊपर संगत का प
30 नवम्बर 2019
12 नवम्बर 2019
*आदिकाल से ही से ही इस धराधाम पर अनेकों योद्धा ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपनी शक्तियों का संचय करके एक विशाल जनसमूह को अपने वशीभूत किया एवं उन्हीं के माध्यम से मानवता के विरुद्ध कृत्य करना प्रारंभ किया | पूर्वकाल में ऐसे लोगों को राक्षस या निशाचर कहा जाता था | इनके अनेक अनुयायी ऐसे भी होते थे जिनको यह न
12 नवम्बर 2019
09 नवम्बर 2019
*सनातन धर्म में मानव जीवन को चार आश्रमों में बांटा गया है , जिनमें से सर्वश्रेष्ठ आश्रम गृहस्थाश्रम को बताया गया है , क्योंकि गृहस्थ आश्रम का पालन किए बिना मनुष्य अन्य तीन आश्रम के विषय में कल्पना भी नहीं कर सकता | मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है समाज का निर्माण परिवार से होता है | व्यक्ति के जीवन में
09 नवम्बर 2019
10 नवम्बर 2019
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !!*सनातन धर्म की दिव्यता विश्व विख्यात है | संपूर्ण विश्व ने सनातन धर्म के ग्रंथों को ही आदर्श मान कर दिया जीवन जीने की कला सीखा है | प्राचीन काल में शिक्षा का स्तर इतना अच्छा नहीं था जितना इस समय है परंतु हमारे पूर्वज अनुभव के आधार पर समाज के सारे कार्य कुशलता से संपन्न कर दे
10 नवम्बर 2019
17 नवम्बर 2019
*इस सकल सृष्टि में समस्त जड़ चेतन के मध्य मनुष्य सिरमौर बना हुआ है | जन्म लेने के बाद मनुष्य को अपने माता - पिता एवं सद्गुरु के द्वारा सत्य की शिक्षा दी जाती है | यह सत्या आखिर है क्या ? तीनो लोक चौदहों भुवन में एक ही सत्य बताया गया है वह है परमात्मा | जिसके लिए लिखा भी गया है :-- "ब्रह्म सत्यं जगत
17 नवम्बर 2019
03 दिसम्बर 2019
*मानव जीवन में इस संसार में उपस्थित समस्त पदार्थ किसी न किसी रूप में महत्वपूर्ण है परंतु यदि इनका सूक्ष्म आंकलन किया जाय तो सबसे महत्वपूर्ण हैं मनुष्य के संस्कार | इन्हीं संस्कारों को अपना करके मनुष्य पदार्थों से उचित अनुचित व्यवहार करने का ज्ञान प्राप्त करता है | हमारे देश भारत की संस्कृति संस्कार
03 दिसम्बर 2019
09 नवम्बर 2019
*सनातन धर्म में मानव जीवन को चार आश्रमों में बांटा गया है , जिनमें से सर्वश्रेष्ठ आश्रम गृहस्थाश्रम को बताया गया है , क्योंकि गृहस्थ आश्रम का पालन किए बिना मनुष्य अन्य तीन आश्रम के विषय में कल्पना भी नहीं कर सकता | मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है समाज का निर्माण परिवार से होता है | व्यक्ति के जीवन में
09 नवम्बर 2019
12 नवम्बर 2019
*आदिकाल से ही से ही इस धराधाम पर अनेकों योद्धा ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपनी शक्तियों का संचय करके एक विशाल जनसमूह को अपने वशीभूत किया एवं उन्हीं के माध्यम से मानवता के विरुद्ध कृत्य करना प्रारंभ किया | पूर्वकाल में ऐसे लोगों को राक्षस या निशाचर कहा जाता था | इनके अनेक अनुयायी ऐसे भी होते थे जिनको यह न
12 नवम्बर 2019
21 नवम्बर 2019
*परमात्मा के द्वारा मैथुनी सृष्टि का विस्तार करके इसे गतिशील किया गया | मानव जीवन में बताये गये सोलह संस्कारों में प्रमुख है विवाह संस्कार | विवाह संस्कार सम्पन्न होने के बाद पति - पत्नी एक नया जीवन प्रारम्भ करके सृष्टि में अपना योगदान करते हैं | सनातन धर्ण के सभी संस्कार स्वयं में अद्भुत व दिव्य रह
21 नवम्बर 2019
26 नवम्बर 2019
❌ *इस संसार परमात्मा ने अनेकानेक जीवो का सृजन किया | पशु - पक्षी ,कीड़े - मकोड़े और जलीय जंतुओं का सृजन करने के साथ ही मनुष्य का भी सृजन परमात्मा ने किया | सभी जीवो में समान रूप से आंख , मुख , नाक , कान एवं हाथ - पैर दिखाई देते हैं परंतु इन सब में मनुष्य को उस परमात्मा ने एक अमोघ शक्ति के रूप में बु
26 नवम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x