अब महिला सम्मान को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए ।

06 दिसम्बर 2019   |  शिल्पा रोंघे   (685 बार पढ़ा जा चुका है)


महिलाओं के प्रति अपमान की भावना एक दिन में नहीं पनपती है, ये जहर धीरे-धीरे उसके मन में पनपता है कहीं ना कहीं घर से ही इसकी शुरुआत होती है, हमारे समाज में सारी पाबंदियां लड़कियों पर ही लगाई जाती है चाहे वो स्कूल, समाज, ऑफिस ही क्यों ना हो महिलाओं को ही हद में रहने की सलाह दी जाती है। जैसे कि महिलाओं को अपनी निगाह नीची रखनी चाहिए, धीरे बोलो, धीरे हंसो, अरे लड़की हो तो पूरी तरह ढके हुए कपड़े पहनों, लड़कों से दोस्ती ना रखो, रात होने से पहले घर वापस आओ, लिस्ट काफी लंबी है। थोड़ी सी तमीज़ लड़को को भी सिखाने की कोशिश क्यों नहीं करते है वो लोग।


अगर माता- पिता को लड़की के प्रेम प्रसंग की भनक लग जाए तो वो उसे मारने पर आमदा हो जाते है ऑनर किलिंग के कितने केस अखबार में पढ़ने को मिलते है, उसी समाज से पूछिए कि क्या उन्होंने अपने बेटे को किसी लड़की पर भद्दे कमेंट करने, घूरने या फिर सीटी बजाने पर क्या एक थप्पड़ लगाने की हिम्मत भी की है ? वो कितना कमा रहा है इसके बजाए उसका चाल चलन कैसा है ये जानने की कोशिश की है।


कुछ महिलाएं भी आज पुरातनपंथी सोच में जी रही है जिनका मानना है कि महिलाओं का काम सिर्फ पति की सेवा करना और बच्चों की लालन पालन करना है चाहे उनका पति कैसा भी बर्ताव करे उन्हें बर्दाश्त करते रहना चाहिए, अगर कोई महिला अपने पति के बुरे बर्ताव के चलते पति से अलग हो जाए तो उसकी आलोचना करने में घंटो बर्बाद कर देंगी लेकिन किसी के पति को टोकने की हिम्मत उनको नहीं होगी।


अब लगता है कि स्कूलों के पाठ्यक्रम में महिला सम्मान कैसे करे? इस विषय को भी जोड़ना होगा, जो कि हमारा समाज उन्हें सीखने से रहा, चाहे स्कूल सरकारी हो या प्राईवेट, गांव का हो या शहर हर जगह इसे जोड़ना पड़ेगा। उन्हें बताना होगा महिला भी उनकी तरह एक इंसान है कोई भोग की वस्तु या किसी की गुलाम नहीं है।


शराब, बीड़ी, तम्बाकू जैसी नशीली आदतों के प्रति आगाह करना होगा जो कि आज फ़ैशन बन गया है और अपराधिक प्रवृत्ति पनपने में महती भूमिका निभाता है।


सिर्फ लड़कियों को संभाल कर रहने की चेतावनी से कुछ नहीं होने वाला है। क्या कोई गारंटी ले सकता है कि कौन सा स्थान उनके लिए सुरक्षित है? इलाज़ तो केवल उस पुरूषवादी कुंठित मानसिकता करना होगा जिसके चलते वो महिलाओं का अपमान करते है।

अगला लेख: जोगी बनना कहां आसान है ?



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
26 नवम्बर 2019
क्
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedC
26 नवम्बर 2019
22 नवम्बर 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves></w:TrackMoves> <w:TrackFormatting></w:TrackFormatting> <w:PunctuationKerning></w:PunctuationKerning> <
22 नवम्बर 2019
27 नवम्बर 2019
सु
है जुटे हुए कुछ लोगसुधार में.है जुटे कुछ लोग आधुनिकताकी दुहाई देकर पंरपराओं कोप्राचीन बताने में.तो कुछ पंरपराओं की आड़ लेकरबदलाव को ठुकराने में.है जुटे हुए कुछ लोगअपनी ही बात सही मनवाने में.उनकी इच्छाओं का नहीं कोईअंत, सिर्फ इसलिए जुटे है व
27 नवम्बर 2019
01 दिसम्बर 2019
का
काश कोई आईना ऐसा भी होता.क्या मंजूर है दुनिया बनाने वाले को,पहले से ही बता देता, दिल की उलझन को चुटकियों में ही सुलझा देता.शिल्पा रोंघे
01 दिसम्बर 2019
30 नवम्बर 2019
क्या अब नारी सिर्फ देव लोक में हीसम्मानित रह गई है ?मां की कोख में होतब भ्रूणहत्या की बात सोचकर सहम जाती है.गर दुनिया में आने का सौभाग्य पा जाए तोतब अस्मत को लेकर जाती है सहम.चढ़ती है डोली तबदहेज जैसे दानव को देखकर जाती है सहम.दुनिया मे
30 नवम्बर 2019
17 दिसम्बर 2019
हर बार सच्चाई की सफाई देना जरुरी नहीं.कभी कभी सही वक्त सब कुछसाफ कर देता हैअपने आप ही.सूरज को ढकनेकी कोशिश करता हैबादल हर कभी, लेकिन उसे रोशनी देनेसे रोक सका हैक्या वो कभी.शिल्पा रोंघे
17 दिसम्बर 2019
23 नवम्बर 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <o:OfficeDocumentSettings> <o:RelyOnVML/> <o:AllowPNG/> </o:OfficeDocumentSettings></xml><![endif]--><!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKer
23 नवम्बर 2019
26 नवम्बर 2019
क्
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedC
26 नवम्बर 2019
16 दिसम्बर 2019
बढ़ती जनसंख्या परस्वास्थ्य सुविधाएं पड़ रही कम.महंगी हुई शिक्षा और अच्छे स्कूल हुए कम.ट्रेनों में बैठने को हुई जगह कम.महानगरों में रहने को मकान पड़ रहे कम.पेड़ और पौधे हुए कम.पीने का पानी हुआ कम.सिकुड़ रहे खेत खलिहान, अनाज हुआ कम.बढ़ रही गरीबी और महंगाई.किसी ने धर्म को तो किसी ने जातिको देश की बदहाल
16 दिसम्बर 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x