रानी बेटी ,लाडो बेटी असुरक्षित क्यों ?

09 दिसम्बर 2019   |  शोभा भारद्वाज   (474 बार पढ़ा जा चुका है)

रानी बेटी ,लाडो बेटी असुरक्षित क्यों ?

रानी बेटी ,लाडो बेटी असुरक्षित क्यों ?

डॉ शोभा भारद्वाज

देश में एक ही प्रश्न पूछा जा रहा है देश की लगभग 48% आबादी महिलायें हैं |हर क्षेत्र में महिलायें पुरुष समाज से कमतर नहीं है कई क्षेत्रों में आगे हैं |देश के विकास में उनका बराबर का योगदान है नेवी में एक महिला पायलेट बनी , फाईटर पायलेट हैं लेकिन असुरक्षित क्यों ?दरिन्दे अचानक झपट कर उनकी अस्मिता को तार-तार कर देते हैं अब तो सबूत मिटाने के लिए जलाने भी लगे लगे हैं | नन्हीं बच्चियों के साथ आये दिन नीचता की खबरें आती हैं बच्ची पकड़ी, हवस मिटा कर मरोड़ कर कूड़े की तरह फेंक दीं|

16 दिसम्बर की सर्द रात फिजियोथेरेपिस्ट निर्भया , पांच लोगों ने नृशंसता की हदें पार कर दी रेप से पहले निर्भया एवं उसके साथी के विरोध करने पर उन्हें बुरी तरह पीटा फिर चलती बस में रेप करते रहे उसकी चीखें बस में घुट कर रह गयीं ,चलती बस से सड़क पर फेंक दिया इस काण्ड में एक नाबालिग दरिंदा भी शामिल था ऐसे कुकर्म से दिल्ली दहल गयी | समूचे भारत में विरोध प्रदर्शन हुए दिल्ली में माता ,पिता ,भाई ,सर्व साधारण लोग कई दिन तक अपराधियों के विरुद्ध सड़कों पर निकले |इलाज के दौरान भयंकर दर्द झेलती सिसकती सदैव के लिये निर्भया शांत हो गयी वह जीना चाहती थी आज भी उस दर्द को समाज महसूस करता है बलात्कारियों में नाबालिग को तीन वर्ष की सजा के बाद मुक्त कर दिया गया क्योकिं न्याय प्रणाली उसको अधिकार देती है | निर्भया के एक अपराधी ने तिहाड़ जेल में फांसी लगा ली लेकिन तीन अपराधी फांसी का इंतजार कर रहे हैं | अफ़सोस 16 दिसम्बर को अमानुषिक अपराध को सात वर्ष पूरे हो जायेंगे आज तक अपराधियों को फांसी की सजा नहीं दी गयी |अपराध उसी तरह बढ़ रहे है| सख्त कानून बने थें कागज पर सजायें भी दी जाती रहीं हैं लेकिन सजा कब दी जायेगी ?शायद अब प्रशासन की नीद खुले क्योकि आज समाज फिर से आंदोलित है |

हाल ही में एक और दरिंदगी हैदराबाद की महिला पशु चिकित्सक के साथ की गयी जिसने हैदराबाद ही नहीं समूचे भारत को हिला दिया | चार आरोपियों द्बारा महिला चिकित्सक की रेप के बाद हत्या के सबूत मिटाने के लिए शव को पेट्रोल पंप से बोतल में पेट्रोल खरीद कर जला दिया | हर तरफ रोष ही रोष था अपराधी पकड़े गये पुलिस अपराधियों को भोर से पहले तीन बजे के बाद उस स्थान पर ले गयीं जहाँ अपराध को अंजाम दिया गया था पुलिस के अनुसार उन्होंने भागने एवं पुलिस पर हमला करने की कोशिश की थी पुलिस द्वारा अपराधियों को ढेर कर दिया (एन्काऊन्टर) | सुबह टीवी चैनलों द्वारा देश में जिसने भी समाचार सुना उसने ठंडी सांस ली उसे संतोष हुआ | हैदराबाद की जनता ने पुलिस पार्टी पर फूल बरसाये उन्हें कंधों पर उठा लिया मिठाईयां बांटी गयी महिलाओं ने राखी बांधी कुछ ने पुलिस वालों के पैर छुए मानवाधिकारबादियों एवं न्याय प्रणाली से जुड़े लोगों ने निंदा की पुलिस के पास उनके हर प्रश्न का उत्तर था |जनता द्वारा त्वरिक न्याय को उचित ठहराया जा रहा है | एक और जघन्य अपराध उन्नाव की रेप पीडिता के साथ हुआ था उसके साथ गैंग रेप किया गया था आरोपी जेल में था जमानत पर छूटते ही आरोपी ने अपने साथियों के साथ लड़की पर कैरोसिन डाल कर आग लगा दी जीवन बचाने की कोशिश में लड़की आधा किलोमीटर भागी अंत में गिर गयी 95% जली अवस्था में लड़की दिल्ली के सफदरजंग लाई गयी यहाँ लड़की ने तड़फ-तड़फ कर दम तोड़ दिया |राजनैतिक दलों ने विरोध कर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने की कोशिश की लेकिन लड़की नहीं रही उसके साथ होने वाली दरिंदगी ,अपराधियों को उनकी करनी का दंड न्याय मिलेगा या नहीं आज एक प्रश्न समाज के सामने है| लड़की के माता पिता को मुआवजा देकर संतुष्ट करने की कोशिश की जा रही है |

पुलिस ने महिलाओं को सतर्कता बरतने की सलाह दी है |ऐसे देश जहाँ अपराधी को कठोर दंड सार्वजनिक रूप से दिए जाते हैं वहाँ की महिलाओं के साथ घिनौने अपराध नहीं होते मैं कई वर्ष ऐसे देश में रही हूँ जहां मेरे 10 वर्ष प्रवास के दौरान दो रेप के केस हुये ,जिसने पूरे देश में हलचल मचा दी अपराधी पकड़े गये| उनमे एक अपराध उस प्रदेश में हुआ जहाँ हम रहते थे | एक परिवार का मुखिया सरकार के खिलाफ बंदूक लेकर जंगल में निकल गया आये दिन साथियों के साथ वहाँ के सुरक्षा बलों पर मौका देख कर हमले करता था पीछे उसकी बीबी बच्चों को अकेला समझ कर परिवार के ही पाँच लड़कों ने मौके का फायदा उठा कर बच्चों की माँ को कमरे में बंद कर उस घर को बारह बरस की बेटी के साथ नीचता कर उसका एवं उसके छोटे भाई का गला घोंट कर सुबह शोर मचा दिया विद्रोही कुकर्म कर गये उन्हें भय नहीं था पिता सरकार का दुश्मन है उसकी बीबी और बच्चों का कौन सहायक है ? एक दिन बाद ही अपराधी पकड़ लिए गये दस दिन बाद फांसी निश्चित कर दी गयी न दाद न फरियाद फांसी के एक दिन पहले ढिंढोरा पिटवाया गया अमुक मैदान में अमुक दिन पाँचो अपराधियों को मृत्यू दंड दिया जाएगा लोग दूर दराज से फांसी देखने के लिए इकठ्ठा होने लगे |

मैं प्रवासी प्रजातांत्रिक देश की वासी उत्सुकता वश उस देश की दंड व्यस्था एवं कातिल दरिंदों को देखने अपनी लोकल सहेलियों के साथ चली गयी विशाल मैंदान में पांच क्रेन खड़ी थीं जिन पर फंदे लटक रहे थे अपराधियों को घेरे हुए सुरक्षा गार्ड घसीट कर मैदान में लाये गये उनके मर्द और महिलाओं से मैंदान खचाखच भरा था अपराधी चीख रहे थे रहम करों ,रहम करों हमें बख्श दो उत्तेजित पब्लिक चीख रही थी मारो – मारो हरेक के हाथ में जमीन पर पड़ी मिटटी और ढेले थे मैने भी मिट्टी उठा ली मैं भी अब उसी भीड़ का हिस्सा थी उनको स्टूल पर चढ़ा कर उनका अपराध सुनाया गया बच्चों की माँ चेहरा ढके हुए रो रही थी अपराधियों के चेहरे को काले कपड़ें के नकाब से ढक दिया अब भीड़ चुपचाप खड़ी हो गयी उनकी अंतिम गुहार सुनी रहम करो उसके साथ ही लोग हाथ की मिटटी और पत्थर उन पर फेकने लगे बिलखती माँ ने मुख्य अपराधी के नीचे से मेज खींची उसके साथ क्रेन ऊपर उठ गयीं अब हवा में शव झूल रहे थे कई घंटे इसी तरह शव लटकते रहे परिवारों ने मृतक अपराधियों के शव लेने से इनकार कर दिया | क्या ऐसे दंड के बाद कोई अपराध की सोच सकता ?

अगस्त 1978 मेरे विवाह को कुछ ही दिन हुए थे एक काण्ड से दिल्ली समेत समूचे भारत में सनसनी फैला दी उन दिनों अखबार एवं दूरदर्शन ही समाचार का माध्यम थे नेवी के अधिकारी के दो बच्चों गीता एवं संजय चोपड़ा का फिरोती के लिए अपराधियों बिल्ला एवं रंगा ने अपहरण कर लिया जब जाना दोनों बच्चे नौसेना अधिकारी के बच्चे हैं दोनों की हत्या कर दी ,हत्या से पहले बेटी का रेप कर शव फेंक दिया |कुछ समय बाद यह अपराधी रेलवे कम्पार्टमेंट में झगड़ते हुए पकड़े गये |मेरे पति पुलिस अस्पताल के डाक्टर मेडिको लीगल एक्सपर्ट थे दोपहर की ड्यूटी में दोनों अपराधी मेडिकल के लिए लाये गये उनके पीछे उत्तेजित भीड़ थी उनका मेडिकल कर उनके नाखूनों एवं बालों के सैम्पल लिए गये क्योंकि बच्ची ने उन दुष्टों का जम कर विरोध किया था उसकी बंद मुठ्ठी में अपराधियों के बाल एवं नाखूनों में रक्त के कण मिली मॉस की खुरचन थी अत: टेक्निकल ग्राउंड पर उन्हें 1982 में चार साल बाद फांसी दे दी गयी

ऐसे ही 14 वर्ष तक एक रेप का मुकदमा चला था जिसमें रेपिस्ट धनंजय को एक नाबालिग स्कूली छात्रा के रेप एवं हत्या के अपराध में सभी सुनवाइयां पूरी होने के बाद कोलकता के अलीपुर जेल में 14 अगस्त 2004 को फांसीं दी गयी थी जिसका मानवाधिकारवादियों ने मोमबत्तियाँ जला विरोध किया था | एक रेप के बाद हत्या पुणे में बीपीओ में काम करने वाली लड़की की कैब ड्राईवर एवं उसके दोस्त द्वारा की गयी थी |हत्या के बाद पहचान मिटाने के लिए उसका सिर कुचल दिया उज्जल निगम सरकारी वकील थे हत्या एवं रेप का मुकदमा चला बचाब पक्ष ने सजा कम करवाने की कोशिश की लेकिन उन्हें फांसी की सजा दी गयी दया याचिका दायर हुई फांसी बरकरार रही लेकिन फांसी नहीं दी गयी अंत में फांसी की सजा आजीवन कारावास में बदल गयी|

हैदराबाद पुलिस द्वारा किये गये एन्काउंटर के बाद जनता का रिएक्शन स्पष्ट करता है यदि न्याय प्रणाली इसी तरह मंथर गति से चलती रही अपराधियों को कठोरता से दंडित नहीं किया गया एक दिन जनता अपने हाथों में कानून ले लेगी | जब जघन्य अपराध पर मृत्यू दंड नहीं दिया जाएगा अपराध कम कैसे होंगे रेप एवं नृशंस हत्यायें रुकने का नाम नहीं ले रहीं एक केबाद दर्दनाक घटनायें रोंगटे खड़े कर रहीं है एक वर्ग मानाधिकारवादी फांसी का विरोध कर रहे हैं उन्हें दरिंदों के अधिकारों की चिंता है उनकी नहीं जिनके साथ दरिंदगी कर उनसे जीने का अधिकार ले लिया गया था हुई है क्या वह इन्सान नहीं थे ?अब समझ में आया है कठोर दंड देने बात करना पर्याप्त नहीं है जघन्य अपराध के लिए तुरंत न्याय एवं शीघ्र कठोर दंड ,दंड का प्रचार |

अनेक टीवी चैनलों एवं समाचार पत्रों में महिलाओं के साथ बढ़ते अपराधों पर चर्चाएँ हो रही हैं |

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