सिसकती मानवता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

09 दिसम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (438 बार पढ़ा जा चुका है)

सिसकती मानवता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म की मान्यता है कि महाराज मनु से मनुष्य की उत्पत्ति इस धराधाम पर हुई है इसीलिए उसे मानव या मनुष्य कहा जाता है | मनुष्यों के लिए अनेकों प्रकार के धर्मों का पालन करने का निर्देश भी प्राप्त होता है | प्रत्येक मनुष्य में दया , दान , शील , सौजन्य , धृति , क्षमा आदि गुणों का होना परमावश्यक है इन गुणों से ही मिलकर बना है मानव धर्म जिसे मानवता कहा गया है | जिस मनुष्य में मानवता नहीं है उसे पशु धर्म का अनुयायी या दानवी धर्म का पोषक कहा जा सकता है | प्रत्येक मनुष्य में रहने वाला असाधारण धर्म है मनुष्यत्व | हमारे शास्त्रों में स्पष्ट किया गया है कि अनंत उज्ज्वल , स्वच्छ गुण विशिष्ट मनुष्य ही मानवता का पोषक हो सकता है | मनुष्य में प्राकृतिक रूप से तीन प्रकार के गुण (सत्त्व , रज , तम) पाये जाते हैं सत्त्वगुण की प्रधानता जिनमें होती है उनमें त्याग , तपस्या , सत्य , सदाचार , परोपकार एवं अहिंसा एवं समता आदि गुण स्वाभावत: पाये जाते हैं और यही गुण मानवता के लिए आवश्यक भी है | मानव धर्म "आत्मवत् सर्वभूतेषु" की भावना से प्राणिमात्र से अपनत्व समझकर उन पर दया और प्रेमभाव का प्रसार करना ही बताया गया है | हमारे पूर्वजों ने परोपकार और सद्भावना मूलक समाज की स्थापना करके "सर्वे भवन्ति सुखिन:" की कामना की थी | यही कारण था कि पूर्वकाल में हमारा समाज उन्नतिशील एवं समतामूलक था | प्राचीनकाल के मनुष्य मानवता की सर्वात्मना रक्षा करते थे एक दूसरे के सुख एवं दु:ख में बराबर के सहयोगी की भूमिका एवं मानवता के बल पर ही अपना और समस्त विश्व का कल्याण करने में सक्षम व समर्थ हुआ करते थे | हमारे महान ऋषियों ने मानवता की रक्षा के लिए ही कठिन से कठिन से तपस्या करके मानवमात्र के लिए अनेक विधान बताये इसमें उन दिव्यात्माओं का कोई स्वार्थ नहीं होता था , परन्तु धीरे - धीरे समय परिवर्तित हो गया और हम एक तमोगुणी समाज का हिस्सा बन गये |*


*आज हम आधुनिक परिवेश में जीवन यापन कर रहे हैं जहां मनुष्य अपने मूल कर्तव्यों को भूल गया है | आज समस्त विश्व के साथ - साथ हमारे दिव्य देश भारत में जो अनर्थ - अन्याय अत्याचार व्यभिचार आदि कुकृत्य हो रहे हैं उसका मूल कारण यही है कि आज मनुष्य में मानवता नहीं रह गई है | मनुष्य होने का आधार मानवता ही है , मनुष्य आज अपने मूल धर्म मानवता एवं अपने आदर्शों को तिलांजलि दे चुका है | आज तमोगुण प्रधान समाज है पाप का स्रोत प्रबलता से प्रवाहित हो रहा है और इस पाप के प्रवाह में प्रवाहित मनुष्य अपने वास्तविक धर्म कर्म से विमुख होता जा रहा है | आज मनुष्य के कर्मों से मानवता सिसक रही है , मनुष्य के कर्म इतने विकृत हो गए हैं कि आज चारों तरफ मानवता लज्जित हो रही है | आज जो हो रहा है उसका वर्णन बहुत पहले गोस्वामी तुलसीदास जी ने कर दिया था बाबाजी मानस में लिखते हैं कि :- "कलिकाल बिहाल किए मनुजा ! नहीं मानत क्वौ अनुजा तनुजा !!" अर्थात कलयुग में वह समय आएगा जब मनुष्य को छोटे बड़े का भान होना बंद हो जाएगा और उसको कन्या या वृद्धा स्त्री में नारी का भोग्या शरीर दिखाई पड़ेगा | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" आज यह कह सकता हूँ कि जहां पूर्वकाल में हमारे पूर्वज मानव मात्र का कल्याण करने की कामना से कर्म किया करते थे वही मनुष्य आज स्वयं का कल्याण करने में भी असमर्थ लग रहा है उसका कारण एक ही है कि मनुष्य ने अपनी मानवता का त्याग कर दिया है और जब मानवता का ह्रास होता है तो देश एवं समाज दोनों की क्षति होती है | मानवता की रक्षा एवं उसका ज्ञान प्रत्येक मनुष्य को होना चाहिए क्योंकि मानवता ही मानव और अमानव में भेद करते हुए उनका परिचय कराती है | आज मनुष्य रूप में अनेक भेड़िए समाज में मानवता को कलंकित करने वाले कृत्य कर रहे हैं | आज मानवता एक दिवास्वप्न बनकर रह गई है इसके कारण मनुष्य समय-समय पर अनेकों प्रकार के आपत्ति विपत्ति , धोखा कष्ट का शिकार भी हो रहा है | यदि मनुष्य को इनसे बचना है तो पुनः मानव धर्म को स्थापित करते हुए मानवता के विषय में जानना होगा क्योंकि मानवता ही मानव को स्वाभिमान की प्रेरणा देती है | मानवता ही एक सभ्य समाज की नींव कही गई है परंतु आज मानवता बिलख रही है |*


*मानव जीवन में मानवता की विशेष आवश्यकता है और आज मानवता के रक्षण और पालन पर सब को विशेष ध्यान देकर उसको धारण करने की आवश्यकता है तभी मानव धर्म , मानव समाज तथा राष्ट्र की रक्षा हो सकती है | अतः मानवमात्र को मानवता गुण विशिष्ट धर्म को धारण करने की आवश्यकता है |*

अगला लेख: ईश्वर को समर्पित कर्म ही पूजा है :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
02 दिसम्बर 2019
*हमारे देश की संस्कृति इतनी महान रही है कि समस्त विश्व ने हमारी संस्कृति को आत्मसात किया | सनातन ने सदैव नारी को शक्ति के रूप में प्रतिपादित / स्थापित करते हुए सम्माननीय एवं पूज्यनीय माना है | इस मान्यता के विपरीत जाकर जिसने भी नारियों के सम्मान के विपरीत जाकर उनसे व्यवहार करने का प्रयास किया है उसक
02 दिसम्बर 2019
12 दिसम्बर 2019
*परमात्मा ने सुंदर सृष्टि की रचना की तो मनुष्य ने इसे संवारने का कार्य किया | सृजन एवं विनाश मनुष्य के ही हाथों में है | हमारे पूर्वजों ने इस धरती को स्वर्ग बनाने के लिए अनेकों उपक्रम किए और हमको एक सुंदर वातावरण तैयार करके सुखद जीवन जीने की कला सिखाई थी | मनुष्य ने अपने बुद्धि विवेक से मानव जीवन मे
12 दिसम्बर 2019
26 नवम्बर 2019
❌ *इस संसार परमात्मा ने अनेकानेक जीवो का सृजन किया | पशु - पक्षी ,कीड़े - मकोड़े और जलीय जंतुओं का सृजन करने के साथ ही मनुष्य का भी सृजन परमात्मा ने किया | सभी जीवो में समान रूप से आंख , मुख , नाक , कान एवं हाथ - पैर दिखाई देते हैं परंतु इन सब में मनुष्य को उस परमात्मा ने एक अमोघ शक्ति के रूप में बु
26 नवम्बर 2019
02 दिसम्बर 2019
*हमारे देश की संस्कृति इतनी महान रही है कि समस्त विश्व ने हमारी संस्कृति को आत्मसात किया | सनातन ने सदैव नारी को शक्ति के रूप में प्रतिपादित / स्थापित करते हुए सम्माननीय एवं पूज्यनीय माना है | इस मान्यता के विपरीत जाकर जिसने भी नारियों के सम्मान के विपरीत जाकर उनसे व्यवहार करने का प्रयास किया है उसक
02 दिसम्बर 2019
28 नवम्बर 2019
*इस समस्त सृष्टि में हमारा देश भारत अपने गौरवशाली संस्कृति एवं सभ्यता के लिए संपूर्ण विश्व में जाना जाता था | अनेक ऋषि - महर्षियों ने इसी पुण्य भूमि भारत में जन्म लेकर के मानव मात्र के कल्याण के लिए अनेकों प्रकार की मान्यताओं एवं परंपराओं का सृजन किया | संस्कृति एवं सभ्यता का प्रसार हमारे देश भारत स
28 नवम्बर 2019
20 दिसम्बर 2019
*आदिकाल से ही संपूर्ण विश्व में विशेषकर हमारे देश भारत में सत्ता प्राप्ति के लिए मनुष्य के द्वारा अनेक प्रकार के क्रियाकलाप किए जाते रहे हैं | कभी तो मनुष्य को उसके सकारात्मक कार्यों एवं आम जनमानस में लोकप्रियता के कारण सत्ता प्राप्त हुई तो कभी मनुष्य सत्ता प्राप्त करने के लिए साम-दाम-दंड-भेद आदि क
20 दिसम्बर 2019
26 नवम्बर 2019
क्
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedC
26 नवम्बर 2019
08 दिसम्बर 2019
*सनातन धर्म के अनुसार मनुष्य का जीवन संस्कारों से बना होता है इसी को ध्यान में रखते हुए हमारे पूर्वजों ने मनुष्य के लिए सोलह संस्कारों का विधान बताया है | गर्भकाल से लेकर मृत्यु तक इन संस्कारों को मनुष्य स्वयं में समाहित करते हुए दिव्य
08 दिसम्बर 2019
25 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर परमपिता परमात्मा ने जलचर , थलचर नभचर आदि योनियों की उत्पत्ति की | कुल मिलाकर चौरासी लाख योनियाँ इस पृथ्वी पर विचरण करती हैं , इन सब में सर्वश्रेष्ठ योनि मनुष्य को कहा गया है क्योंकि जहां अन्य जीव एक निश्चित कर्म करते रहते हैं वही मनुष्य को ईश्वर ने विवेक दिया है , कोई भी कार्य करने के
25 नवम्बर 2019
11 दिसम्बर 2019
*इस धराधाम पर मनुष्य कर्मशील प्राणी है निरंतर कर्म करते रहना उसका स्वभाव है | मनुष्य शारीरिक श्रम के साथ-साथ मानसिक श्रम भी करता है जिससे उसे शारीरिक थकान के साथ-साथ मानसिक थकान का भी आभास होता है | इस थकान को दूर करने का सबसे सशक्त साधन कुछ देर के लिए मन को मनोरंजन में लगाना माना गया है | पूर्वकाल
11 दिसम्बर 2019
09 दिसम्बर 2019
*इस संपूर्ण विश्व में प्रारंभ से ही भारत देश अपने क्रियाकलापों एवं दूरदर्शिता के लिए जाना जाता रहा है | विश्व के समस्त देशों की अपेक्षा भारत की सभ्यता , संस्कृति एवं आपसी सामंजस्य एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता रहा है | यहां पूर्व काल में एक दूसरे के सहयोग से दुष्कर से दुष्कर कार्य मनुष्य करता रहा है
09 दिसम्बर 2019
17 दिसम्बर 2019
*किसी भी देश का निर्माण समाज से होता है और समाज की प्रथम इकाई परिवार है | परिवार में आपसी सामंजस्य कैसा है ? यह निर्भर करता है कि हमारा समाज कैसा बनेगा | परिवार में प्राप्त संस्कारों के माध्यम से ही मनुष्य समाज में क्रियाकलाप करता है | हम इस भारत देश में पुनः रामराज्य की स्थापना की कल्पना किया करते
17 दिसम्बर 2019
30 नवम्बर 2019
*इस धराधाम पर परमात्मा ने अनेकों प्रकार के पशु-पक्षियों , जीव - जंतुओं का सृजन किया साथ ही मनुष्य को बनाया | मनुष्य को परमात्मा का युवराज कहा जाता है | इस धराधाम पर सभी प्रकार के जीव एक साथ निवास करते हैं , जिसमें से सर्वाधिक निकटता मनुष्य एवं पशुओं की आदिकाल से ही रही है | जीवमात्र के ऊपर संगत का प
30 नवम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x