मन

13 दिसम्बर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (456 बार पढ़ा जा चुका है)

यादों का उँचा पहाड़
सिमट कर मन में छुप
कर रह जाता है।
मन अटके मगर मन
चुपके से बोझिल हो
लुप्त हो जाता है।।
डॉ. कवि कुमार निर्मल

अगला लेख: येसु फिर आओ



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
04 दिसम्बर 2019
सच मिठा होता गर तो-हलाहल तक पी जाता।खारे शब्द सारे मगर-समन्दर में बहा आता।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
04 दिसम्बर 2019
25 दिसम्बर 2019
★★मसीहा फिर आओ★★येसु! बार - बार आ कर आलोक फैलाओअँधेरा छाया- फिर से ज्योत बिखराओतुमने सदा प्यार बाँट शुभ संदेश दिया हैहमने बँट कर नफ़रतभरा अंजाम दिया हैचमत्कार फिर दिखला कर होश में लाओप्रायश्चित और प्रार्थना का मार्ग बताओयेसु! बार - बार आ कर आलोक फैलाओअँधेरा छाया- फिर से ज्योत बिखराओडॉ. कवि कुमार निर
25 दिसम्बर 2019
28 दिसम्बर 2019
झड़ने दो पुराने पत्तों को.🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂गिरने दो फूलों को जमीं पर.🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼कि नए पत्ते फिर आएंगे शाखों पर.🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿कि नए फूल फिर उगेंगे डाली पर.🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹ताकेंगे आसमान की ओर.🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴गिरने से मत डरो, झड़ने से ना डरो.बीज भी जमीन में गिरकर ही पौधे
28 दिसम्बर 2019
02 दिसम्बर 2019
गु
गुरूर
02 दिसम्बर 2019
23 दिसम्बर 2019
नेहरंग-कद-नाम-जुबान-जात-देश मत तूं देखछलकते हुनर को, रुहानी ओज को रे परखबहाया नेकी का उछलता जहाँ में दरियाबदी को मैंने कबका कह दिया अलविदाहौसला है चाँद-सितारों के पार जाने काबेवफाई को नज़र-अंदाज़ करते रहानेह का फ़कीर मैं, सिद्दतें करता हीं रहाडॉ. कवि कुमार निर्मल
23 दिसम्बर 2019
02 दिसम्बर 2019
सो
खुश है कुछ लोगइंस्टाग्राम, फ़ेसबुक, और ट्विटरपर अपनी फ़ैन फॉलोइंग को गिनकर.अपनी निज़ी जिंदगी को सार्वजनिककर.मगर भूल जाते है इस वर्चुअल दुनियामें खोकर उस पड़ोस को जो सबसेपहले पूछते है उनका हाल चाल.वो स्कूल कॉलेज और दफ़्तर केदोस्त जो बिना बताएं ही जान लेते हैदिल की बात.उंगल
02 दिसम्बर 2019
04 दिसम्बर 2019
💕 💕💕💕💕💕💕💕 💕💓 नफ़रत करने वालों को 💓💓💓गले मैं लागाता हूँ।💓💓 💓💓रक़ीब गर हो,💓💓अहबाब समझ सर झुकाता हूँ।।💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕 💕 निर्मल 💕 💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕
04 दिसम्बर 2019
26 दिसम्बर 2019
येसु फिर आओ ★★मसीहा फिर आओ★★येसु! बार - बार आ कर आलोक फैलाओअँधेरा छाया- फिर से ज्योत बिखराओतुमने सदा प्यार बाँट शुभ संदेश दिया हैहमने बँट कर नफ़रतभरा अंजाम दिया हैचमत्कार फिर दिखला कर होश में लाओप्रायश्चित और प्रार्थना का मार्ग बताओयेसु! बार - बार आ कर आलोक फैलाओअँधेरा छाया- फिर से ज्योत बिखराओडॉ.
26 दिसम्बर 2019
19 दिसम्बर 2019
स्
बंद पिंजड़े से निकल जब पँक्षिआजाद हो गगन पार जाता है।मन की समस्त 'कुण्ठाओं' कोपिंजड़े में छोड़ वह आह्लादितहो गुनगुनाते उड़ता जाता है।।बँधनों से मुक्त हो- घुटन से निकस वहमुक्त प्राणी बन अराध्य तक जाता है।।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
19 दिसम्बर 2019
10 दिसम्बर 2019
प्रकृति में भांति-भांति के रंगबिखेरमन को मेरे- छोड़ दिए प्रभुसादामनमोहक संध्या हो या सुहानी भोरप्रिये बिन न रखना कभी मुझे तुम आधाडॉ. कवि कुमार निर्मल©®
10 दिसम्बर 2019
26 दिसम्बर 2019
येसु फिर आओ ★★मसीहा फिर आओ★★येसु! बार - बार आ कर आलोक फैलाओअँधेरा छाया- फिर से ज्योत बिखराओतुमने सदा प्यार बाँट शुभ संदेश दिया हैहमने बँट कर नफ़रतभरा अंजाम दिया हैचमत्कार फिर दिखला कर होश में लाओप्रायश्चित और प्रार्थना का मार्ग बताओयेसु! बार - बार आ कर आलोक फैलाओअँधेरा छाया- फिर से ज्योत बिखराओडॉ.
26 दिसम्बर 2019
18 दिसम्बर 2019
जब वे न पास हों, तुम आते हो!जब वे पास हों, चले जाते हो!!शर्म इतनी कि शर्म भी शर्माए,अपने साये से भी शर्माते हो!!!पास नहीं- छटक दूर जाते हो तुम,इशारों-इशारों से मुझे भगाते हो!रक़ीब नहीं, पर मेहरबां हो कर,क्यों (?) बिना बात यूँ जलाते हो!!मैं जब मुख़ातिब तो चुप होते,मैं सो जाऊँ तब बात करते हो!!!डॉ. कवि
18 दिसम्बर 2019
19 दिसम्बर 2019
स्
बंद पिंजड़े से निकल जब पँक्षिआजाद हो गगन पार जाता है।मन की समस्त 'कुण्ठाओं' कोपिंजड़े में छोड़ वह आह्लादितहो गुनगुनाते उड़ता जाता है।।बँधनों से मुक्त हो- घुटन से निकस वहमुक्त प्राणी बन अराध्य तक जाता है।।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
19 दिसम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
स्
20 दिसम्बर 2019
06 दिसम्बर 2019
17 दिसम्बर 2019
29 नवम्बर 2019
22 दिसम्बर 2019
26 दिसम्बर 2019
12 दिसम्बर 2019
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x