ध्यान के आसन को सुविधाजनक बनाना

16 दिसम्बर 2019   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (482 बार पढ़ा जा चुका है)

ध्यान के आसन को सुविधाजनक बनाना

ध्यान के आसन को और अधिक सुविधाजनक बनाने के कुछ सुझाव :

अभी तक हम ध्यान के लिए उपयुक्त आसनों के विषय में चर्चा कर चुके हैं | अब आगे, एक अनुकूल आसन का चयन तो हमने कर लिया, लेकिन यदि उसे और अधिक सुविधाजनक बनाना हो तो उसके लिए क्या करना चाहिए...

यदि आप तह किये हुए कम्बल को ज़मीन पर गद्दे की भाँति रखकर उस पर बैठते हैं तो आपके लिए ज़मीन पर बैठना सरल हो जाएगा | या फिर एक मोटा कुशन अथवा तकिया कूल्हों के नीचे रख सकते हैं जिससे कि शरीर का वह भाग भूमि से तीन चार इंच ऊपर उठ जाए | इस विधि से कूल्हों को उठाने से कूल्हों के जोड़ों और घुटनों पर दबाव कम हो जाता है | इस विधि से आसन में बैठने पर आप आश्चर्यजनक रूप से परिवर्तन का अनुभव करेंगे | कूल्हों के नीचे मोटा कुशन रखने से आप अपनी रीढ़ को भी सीधा रख सकते हैं | जिस आसन पर आप बैठे हों वह स्थिर हो लेकिन कठोर न हो, न ही इधर उधर हिलने डुलने वाला हो | आसन इतना ऊँचा भी न हो कि आपके शरीर की स्थिति में बाधक हो |

जैसे जैसे आपके शरीर में लचीलापन आता जाएगा और बैठने में आपको सुविधा का अनुभव होने लगेगा आप पतले कुशन अथवा सीधे ज़मीन पर बैठकर भी ध्यान के अभ्यास कर सकेंगे | आसन जैसा भी हो इतना ध्यान रहे कि आपका मेरुदण्ड सीधा रहे और उसमें बल न पड़ने पाए | अन्यथा आपको आसन लगाने में असुविधा होगी | आरम्भ में मोटे कुशन के बिना रीढ़ को सीधा रखना कठिन होता है | अपने आसन में अभ्यस्त होने के लिए धैर्य रखिये | आप देखेंगे कि धीरे धीरे आपका शरीर लचीला होता जा रहा है और तब आप लम्बी अवधि के लिए भी ध्यान के लिए सुविधापूर्वक बैठ सकते हैं |

शरीर को खींचने (Stretch) के अभ्यास और हठयोग के आसनों से भी आपके शरीर में लचीलापन लाने में सहायता मिलेगी और आप ध्यान में बैठने में सुविधा का अनुभव करने लगेंगे |

ध्यान लेटकर क्यों नहीं करना चाहिए :

कुछ विशेष कारणों से आपको लेटकर ध्यान करने की सलाह नहीं दी जाती है | जिनमें सबसे प्रमुख कारण है कि इस स्थिति में आपको बार बार नींद आ सकती है और आपके लिए चैतन्य स्थिति में बने रहना कठिन हो सकता है | निश्चित रूप से, यदि आपमें आलस्य है अथवा आप सो रहे हैं तो इस स्थिति में आप ध्यान लगा ही नहीं सकते |

एक और विशेष कारण ये है कि जब ध्यान की स्थिति में गहनता आती है उस समय आवश्यक हो जाता है कि आपका मेरुदण्ड यानी रीढ़ सीधी रहे, क्योंकि इससे एक विशेष प्रकार की ऊर्जा को शरीर में ऊपर की ओर प्रवाहित होने में सहायता मिलती है |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/12/16/meditation-and-its-practices-26/

ध्यान के आसन को सुविधाजनक बनाना

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बहुत सुन्दर लिखा है..
आपने ठीक लिखा है कि कम्बल को ज़मीन पर गद्दे की भाँति रखकर उस पर बैठने से बहुत सुविधा होती है. मैं ऐसा ही दरी की तह बना कर करता हूँ.
परन्तु कूल्हों के नीचे गद्दा रखने का विचार कुछ ठीक नहीं लग रहा है. फोटो में भी आप देखें यह तो काफी असुविधाजनक स्थिति है.
कमर की सपोर्ट के लिए कुषाण लगाने पर आपका क्या विचार है?
वीरेन्द्र

कुशन भी ठीक है । लेकिन हम कम्बल ज़्यादा पसन्द करते हैं । तह लगाने से कम्बल न तो अधिक सॉफ्ट होता है न हार्ड । लेकिन कुशन भी बहुत सुविधाजनक ऑप्शन है । जिन लोगों को कोई समस्या हो वे चाहें तो गद्दे पर बैठ सकते हैं, लेकिन गद्दा ज़्यादा सॉफ्ट हो जाता है तो कमर झुक जाती है ये सच है ।

कुशन भी ठीक है । लेकिन हम कम्बल ज़्यादा पसन्द करते हैं । तह लगाने से कम्बल न तो अधिक सॉफ्ट होता है न हार्ड । लेकिन कुशन भी बहुत सुविधाजनक ऑप्शन है ।

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