वसंत

25 जनवरी 2015   |  सुशील चन्द्र तिवारी   (438 बार पढ़ा जा चुका है)

वंदन वसंत,


वंदन वसंत ,


हे वीणावादिनि के वसंत ।





ज्ञानोदय का अभिनव प्रभात ,


हेजन जन जीवन में रहा बिखर,


आलोकित व्योम ,धरा,कण कण,


मदमाती पवन बहती निर्झर ,


तुझसे वसुधा का तिमिर अंत ।


हे वीणावादिनि.....


तेरी वीणा सुर लहरी से,


प्रस्फुटित प्राकृतिक नया साल,


आचछादित सुमन जड़ित आँचल,


बौराये तरूवर,तट,तमाल,


है पीत छँटा छाई दिगँत ।


हे वीणावादिनि.......


सतरंगी वातावरण मुदित,


करता किसलय से अभिनन्दन ,


पद्मासन श्वेत धवल धारिणि,


हे बुदधिपृदा ! कोटिश: नमन ,


तेरा आराधन युग युगंँत ।।


वंदन वसंत, वंदन वसंत,


हे वीणावादिनि हे वसंत ।।

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