काली बिल्ली रास्ता काट गयी ( सच्ची लघू कहानी)

18 दिसम्बर 2019   |  शोभा भारद्वाज   (6791 बार पढ़ा जा चुका है)

काली बिल्ली रास्ता काट गयी ( सच्ची लघू कहानी)

काली बिल्ली रास्ता काट गई, (सच्ची लघु कथा)


डॉ शोभा भारद्वाज


मेरे डाक्टर पति भारत सरकार की तरफ से ईरान भेजे गये थे अत: हम बर्षो परिवार सहित ईरान के खुर्दिस्तान प्रांत में रहे थे उन दिनों ईरान एवं ईराक में युद्ध चल रहा था हम इराक ईरान की सीमा से अधिक दूर नहीं रहते थे लेकिन युद्ध असर यहाँ कम था बमवर्षक विमान आते ऊपर से निकल जाते लेकिन शिया बाहुल्य क्षेत्रों का हाल अच्छा नहीं था लोग अपने घर छोड़ कर हमारे एरिया में आ गये हरी भरी पहाड़ियों से घिरी घाटी पहाड़ियों से झरने झरते थे| बहार (बसंत) के मौसम में हर फलदार वृक्षों की डालियाँ सफेद फूलों से भर जाती थी जमीन पर फूलों के गलीचे बिछ जाते थे घाटी हर माह रंग बदलती थी हर फूल फल था, शहर के छोर पर अस्पताल था अस्पताल में मेरे डाक्टर पति अस्पताल के इंचार्ज थे अस्पताल में ही घर था| घाटी में पहाड़ी नदी जिसे रुद्खाना कहते थे घर से कुछ कदम नीचे बहती थी | यहाँ के खुर्द नौजवान ईरान सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे उनकी मांग एक अलग आजाद खुर्दिस्तान थी जिसमें ईराकी खुर्द भी शामिल थे लेकिन इराक की सद्दाम सरकार की नीति थी यहाँ के लोगों को तंग न किया जाये जबकि अपने क्षेत्र के खुर्दों के लिए वह सख्त था अजब राजनीति थी |ईरान के टीवी स्टेशन पर मौलानाओं ने इराक सरकार पर इल्जाम लगाया खुर्द तो सद्दाम के अपने हैं यहाँ बमबारमेंट क्यों होगा अब खुर्दिस्तान पर भी खतरा मंडराने लगा


खुर्दिस्तान की राजधानी सनन्दाज से कुछ किलोमीटर की दूरी पर हम रहते थे अस्पताल के नीचे की रोड से सननदाज के लिए मिनी बस चलती थी |अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही थी डाक्टर एवं अस्पताल स्टाफ बेहद व्यस्त था | मेरे तीनों बच्चे दूध बहुत पीते थे यहाँ गाय का दूध मिलता था भैंस वहां कभी देखी नहीं |सननदाज में दुकानों पर दूर दराज से दूध आता रोज मिलता था कभी ऐसी मुश्किल ही नहीं आई गाड़ी से 12 दूध आ जाता था 6 किलो प्रतिदिन दूध का खर्च था दहीं अलग से वहाँ के लोग कहते थे आगा डाक्टर के घर अंडा या गोश्त खाया नहीं जाता केवल दूध पीते हैं इसीलिए यह अच्छी इंग्लिश जानते हैं |अब क्या करें गाड़ी एवं ड्राईवर व्यस्त थे हाँ मैं दूध ला सकती थी | मैने गेट से कुछ कदम आगे बढ़ी भयानक आँखों वाली काली डरावनी बिल्ली रास्ता काट गयी | बचपन से सुना था कहीं जा रहे हो बिल्ली रास्ता काट थे अशुभ संकेत है मैं परेशान हो गयी सामने से मिनी बस आ रही थी अब क्या करूं दूध की जरूरत ,आज तो मरना ही है मन को शहादत के लिए तैयार किया बस में भगवान का नाम लेकर बैठ गयी |मुश्किल से 20 मिनट का रास्ता था आगे वहाँ शेयरिग टैक्सी चलती थी हमारे यहाँ की ई रिक्शा समझ लीजिये | मैं दूकान पर पहुंची दूकान के मालिक ने दुआ सलाम के बाद दूध डालते हुए कहा खानम आपने बहुत बड़ा खतरा उठाया है कल इराक के खुर्दी प्रोग्राम में टीवी ने सावधान किया था आपको किसी ने बताया नहीं मैने कहा नहीं इंशाअल्लाह |


बस स्टाप के लिए टैक्सी में बैठी उसमें और भी सवारियां थे टैक्सी कुछ मीटर ही चली थी खतरे का सायरन बजने लगा टैक्सी वाला जल्दी से बस स्टाप तक टैक्सी ले आया अचानक दूर से फाईटर प्लेन के आने की आवाज आने लगी सब जल्दी से उतर कर सुरक्षित स्थान की और भागने लगे उन्होंने मुझसे भी आग्रह किया ,इतने में देखा जिस मिनी बस से मैं आई थी वह लौट कर गोल चक्कर काटती हुई मेरी तरफ आ रही थी दो आदमी बस से उतरे एक ने दूध का डिब्बा पकड़ा दूसरे ने मेरा हाथ पूरी तेजी से मै उनके साथ भाग कर बस में चढ़ गयी कुछ ही दूरी तल बस पहुंची थी पीछे मुड़ कर देखा आठ बमवर्षक विमान नापाम बम बरसा कर हमारे ऊपर से निकल गये| अधिक जाने नहीं गयीं लेकिन कई घर टूट गये |


ड्राईवर ने बताया आप हमारे साथ आई थी अचानक खतरे का सायरन बजने लगा हम चल दिये ध्यान आया आप हमारे साथ नहीं हैं मैने तेजी से गाड़ी घुमाई आप दिख गयी खुदा का शुक्र है हम सब लोग सलामत है |मैने उनका धन्यवाद किया |घर पहुंची सभी परेशान थे मुझे देख कर जान में जान आई मैने भी बहादुरी दिखाते हुए कहा खतरा हिच मै नहीं डरती मौत क्या है कुछ नहीं ? मैने बम्बर प्लेनों की तेज आवाज सुनी और देखा एक पायलेट एंगल लगा रहा था उसके बाद नापाम बम गिराये गये | मेरे पति ने कहा फेंकू वह क्या मिसाईल मार रहे थे उन्होंने बम गिराय हैं | बिल्ली चिनार के पेड़ पर बैठी तृप्ति से पंजा चाट रही थी मैं उसके लिए कटोरे में दूध लेकर आई उसको पुचकारा उसने दूध की तरफ देखा भी नहीं |एक महिला मरीज ने हैरान होकर कहा ‘खानम गोरबे क्षीर नमी खोरे ‘ गोश्त मी खोरे (‘बिल्ली दूध नहीं पीती है यह गोश्त खाती है ) हो सकता है विदेशी बिल्ली है ठंडा प्रदेश था चूहे मुझे दिखाई नहीं दिए हाँ गोश्तखोर मुल्क था जानवर बहुत कटते थे |


हमारा अपने वतन लोटने का समय आ गया गाड़ी तैयार खड़ी थी अचानक चिनार के पेड़ कूद कर बिल्ली रास्ता काट गयी शायद वह ‘गुड बाई’ करने आई थी मैंने इसे शुभ शगुन समझा उसका धन्यवाद किया मुल्क को हमने खुदा हाफिज हमेश कहा|

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अच्छी कहानी. बेकार का वहम था ये !

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