षडयंत्र :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

20 दिसम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (346 बार पढ़ा जा चुका है)

षडयंत्र :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से ही संपूर्ण विश्व में विशेषकर हमारे देश भारत में सत्ता प्राप्ति के लिए मनुष्य के द्वारा अनेक प्रकार के क्रियाकलाप किए जाते रहे हैं | कभी तो मनुष्य को उसके सकारात्मक कार्यों एवं आम जनमानस में लोकप्रियता के कारण सत्ता प्राप्त हुई तो कभी मनुष्य सत्ता प्राप्त करने के लिए साम-दाम-दंड-भेद आदि का प्रयोग भी करता हुआ देखा गया है , इसके अतिरिक्त यंत्र - मंत्र - तंत्र आदि का प्रयोग भी होता रहा है | इन्हीं क्रियाकलापों में एक प्रमुख क्रियाकलाप है जिसे समाज सकारात्मक दृष्टि से नहीं देखता उसे हमारे साहित्यकारों ने षडयंत्र का नाम दिया है | अपना कार्य सिद्ध करने के लिए किसी के भी विरुद्ध षडयंत्र करना मनुष्य की प्रवृत्ति रही है | षडयंत्र का यदि संधि विच्छेद किया जाए तो स्पष्ट है कि षड + यंत्र अर्थात ६ प्रकार के यंत्र | षडयंत्र के अंतर्गत आने वाले ६ प्रकार के यंत्रों के विषय में हमारे शास्त्रों में लिखा है कि इसमें जारण , मारण , उच्चाटन , मोहन , वशीकरण एवं विध्वंसन आदि की क्रियाएं की जाती हैं | इनके विषय में हो सकता है कि सभी ना जानते हो परंतु यह अवश्य है कि किसी के द्वारा किए गए षडयंत्र से मनुष्य एक लंबे काल तक अनभिज्ञ रहता है और उस षडयंत्र के वशीभूत होकर के ऐसे कार्य करने लगता है जो उसे नहीं करना चाहिए | त्रेता युग में मंथरा के द्वारा षडयंत्र करके कैकेई को बरगलाना एवं प्रभु राम के स्थान पर भरत को सत्ता दिलाने की कुचेष्टा करना जगत प्रसिद्ध है | षडयंत्र का इतना व्यापक प्रभाव होता है कि अपने प्राणों तथा अपने पुत्र भरत से ज्यादा प्रभु राम को मानने वाली कैकेयी ही उनके लिए बनवास मांगने को तैयार हो गयी , परंतु बाद में क्या हुआ यह किसी से छुपा नहीं है | कहने का तात्पर्य यह है कि किसी के द्वारा किया गया षडयंत्र तत्काल तो बड़ा प्रभावी हो जाता है परंतु बाद में मनुष्य पश्चाताप करने के अतिरिक्त और कुछ नहीं कर पाता |*


*आज हम जिस परिवेश में जीवन यापन कर रहे हैं यहां चारों तरफ षडयंत्रों का जाल सा बिछा दिखाई पड़ता है , कोई भी कहीं भी स्वयं को सुरक्षित नहीं मान पा रहा है | राजनीतिक दलों के द्वारा सत्ता प्राप्ति के लिए नित्य नए-नए षडयंत्र किये जा रहे हैं , इन षडयंत्रों के वशीभूत होकर के आम जनमानस भी अपना भला बुरा नहीं सोच पा रहा है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" आज अपने देश भारत की दशा एवं दुर्दशा देखकर यह कह सकता हूं कि अभी भी समय है इन कुछ चंद लोगों के षडयंत्रों को पहचान करके सावधान होते हुए कदम पीछे खींच लिया जाय अन्यथा भारत की सभ्यता एवं संस्कृति का क्या होगा यह विचारणीय विषय है | कुछ चंद लोग अपनी स्वार्थ सिद्ध के लिए एक षड्यंत्र के अंतर्गत पूरे देश को अराजक बनाने पर लगे हुए हैं और उसके साथ दुर्भाग्य यह है कि हम उनके षडयंत्रों को पहचान नहीं पा रहे हैं | मनुष्य एक विवेकवान प्राणी है , ईश्वर ने उसे बुद्धि देकर के सभी प्राणियों से विशेष बनाया है परंतु मनुष्य अपने विवेक का प्रयोग ना करके दूसरों की द्वारा चलाए जा रहे षडयंत्रों में फंस करके अपनी श्रेष्ठता को गलत सिद्ध कर रहा है | जिस प्रकार सत्य कुछ देर के लिए परेशान तो हो सकता है परंतु पराजित नहीं हो सकता उसी प्रकार किसी के भी द्वारा किया गया षडयंत्र एक कालखंड तक ही मुस्कुरा सकता है अंत में उसको पश्चाताप ही करना पड़ता है क्योंकि जिस दिन सत्यता उजागर होती है उस दिन सारे षडयंत्र स्वयं ध्वस्त हो जाते हैं |*


*मानव समाज में षडयंत्र एवं उसके परिणाम का एक लंबा इतिहास है आवश्यकता है इन षडयंत्रों को समझने की जिससे कि मानव समाज सुचारू रूप से जीवन यापन कर सकें |*

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