भय बिनु होइ न प्रीति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

21 दिसम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (376 बार पढ़ा जा चुका है)

भय बिनु होइ न प्रीति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरती पर मानव समाज में वैसे तो अनेकों प्रकार के मनुष्य होते हैं परंतु इन सभी को यदि सूक्ष्मता से देखा जाय तो प्रमुखता दो प्रकार के व्यक्ति पाए जाते हैं | एक तो वह होते हैं जो समाज की चिंता करते हुए समाज को विकासशील बनाने के लिए निरंतर प्रगतिशील रहते हैं जिन्हें सभ्य समाज का प्राणी कहा जाता है , वहीं दूसरी ओर कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जिन्हें दुष्ट , शठ , कुटिल एवं कलह प्रिय कहा जा सकता है | इनका मुख्य काम होता है समाज का विघटन करना | किस प्रकार समाज में अराजकता फैलेगी ऐसे लोग इसी पर अपना ध्यान केंद्रित रखते हैं और उसी के अनुसार अपने क्रियाकलाप करते हैं | इस प्रकार के दुष्ट प्रवृति के लोग सभ्य समाज के लोगों के द्वारा समझाए जाने पर अपनी दुष्टता का त्याग नहीं कर पाते हैं | ऐसे लोगों का चरित्र चित्रण करते हुए बाबा गोस्वामी तुलसीदास जी अपने मानस में स्पष्ट कर देते हैं कि शठ के साथ निवेदन कभी नहीं करना चाहिए | वही हमारे संस्कृत सूक्ति में भी लिखा गया है "शठे शाठ्यम् समाचरेत्" अर्थात दुष्ट के साथ दुष्टता का ही व्यवहार करना चाहिए | मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने लंका की यात्रा के समय समुद्र से मार्ग देने के लिए तीन दिन तक प्रार्थना की , समुद्र अपनी उच्छृंखलता मैं व्यस्त रहा और उसने भगवान राम के निवेदन को नकार दिया | तब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने लक्ष्मण को अपना धनुष बाण लाने के लिए कहा और घोषणा कर दी कि "भय बिनु होइ न प्रीति" | धनुष उठाते ही समुद्र भगवान राम के समक्ष प्रकट हो गया और लंका जाने का मार्ग भी बता दिया | कहने का तात्पर्य यही है कि दुष्ट के साथ यदि निवेदन किया जाता है तो वह निवेदन करने वाले को मूर्ख समझ लेता है और अपनी दुष्टता को समाप्त ना करके उसमें वृद्धि ही करता रहता है | आज चारों ओर यही देखने को मिल रहा है |*


*आज का मनुष्य मनमाने ढंग से सारे कार्य संपन्न करना चाहता है | देश में इतना शक्तिशाली संविधान होने के बाद भी मनुष्य ऐसा लगता है जैसे उसको कोई भय ही नहीं है | यदि ऐसा प्रतीत हो रहा है तो उसका एक मूल कारण है कि हमारे देश के शासक लोगों को समझाने का कार्य कर रहे हैं | आज समाज में जगह-जगह अनैतिक कृत्य हो रहे हैं विरोध , हिंसा , बलात्कार एवं कत्लेआम मचा हुआ है | यह सब देखते हुए मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" यही कहना चाहता हूं इन सभी मुद्दों पर सरकार को कड़ाई से ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है | किसी बच्ची के बलात्कार के बाद उसकी निर्मम हत्या हो जाने पर बलात्कारी एक लंबे कालखंड तक सजा से बचा रहता है जबकि ऐसे किसी व्यक्ति पर उसको तत्काल दंड की आवश्यकता होती है जिससे कि समाज में एक उदाहरण प्रस्तुत हो सके | आज जगह-जगह हो रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण आम जनमानस सहमा हुआ है ऐसे में सरकार को एक कड़ा संदेश देते हुए आम जनमानस की सुरक्षा एवं अपराधियों के प्रति दंडात्मक कार्यवाही करने का प्रावधान करना चाहिए , क्योंकि जब तक मनुष्य में किसी के प्रति भय नहीं होगा तब तक उसके क्रियाकलाप इसी प्रकार होते रहेंगे जो कि एक सभ्य समाज के लिए कदापि उचित नहीं कहे जा सकते हैं | मेरे कहने का तात्पर्य यह नहीं है कि सरकार दमनात्मक कार्यवाही करें परंतु यह भी आवश्यक कि ऐसे शरारती तत्वों के प्रति कड़ाई से कार्यवाही करें जिससे कि समाज में ऐसे तत्व अपने सर न उठा सकें और सौहार्द तथा आपसी सामंजस्य का परवेश निर्मित हो सके |*


*बाबाजी द्वारा लिखित मानस कालजयी रचना है इसके एक-एक शब्द मानव जीवन पर परिलक्षित होते हैं , उनकी लिखी बातों को काटा नहीं जा सकता है |*

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