गीत

21 दिसम्बर 2019   |  नेहाल कुमार सिंह निर्मल   (375 बार पढ़ा जा चुका है)

बाली उमर मोरी चैन अब नाहीं पिया गए मोसे दूर
सूनी सेज जब निरिखे नयन मोरी उठत जियरा मे पीर

टूट गई मोरि आस सखी री छूटे पिया के प्यार
छूट रही मेहंदी की लाली लौट सजन एक बार

बाली उमर मेरी दिल में लगी थी पिया मिलन की आस
पाऊ सजन है रात मिलन की पीहू नहीं मेरे पास
सूनी पड़ी है सेज पिया की सुनी घर संसार
लौट सजन एक बार

प्यासी अखियां आस लगाए देखत राह तुम्हारे
नीर बहे यू रात सावन की पुकारे प्रीत हमारे
आजा मेरे पास प्रीतम रे टूटे न दिल के तार
लौट सजन एक बार

यौवन उमरा रोम फरक रहे होय अखियां भारी
नजर पड़ी जब से पिया कि टूटे प्रीत हमारी
आयत पीहू नेहाल होऊ री अरज करू सौ वार
लैट सजन एक बार

छूट रही मेहंदी की लाली लौट सजन एक बार

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