नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कोरी रजनीति

22 दिसम्बर 2019   |  शोभा भारद्वाज   (5508 बार पढ़ा जा चुका है)

नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कोरी रजनीति

नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कोरी राजनीति

डॉ शोभा भारद्वाज

‘अनेक बुद्धिजीवी जिनमें मुस्लिम भी शामिल हैं ’नें मुस्लिन समाज को समझाने की कोशिश की है नागरिकता संशोधन विधेयक का किसी भी भारतीय की नागरिकता से कोई सम्बन्ध नहीं है फिर भी विरोध प्रदर्शन के बहाने तोड़फोड़ हिंसा क्यों ?मुस्लिम समाज कई राजनीतिक दलों के लिए वोट बैंक रहा है उनके हितों की चिंता के बजाय उनका हितचिंतक बताने की कोशिश करते हैं जबकि देश संविधान से चलता है संविधान की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय है |कई दलों की अपनी राजनीतिक जमीन खिसक रही है नागरिकता कानून के बहाने देश में अस्थिरता फैला कर कुछ अपनी लीडरशिप चमकाने के लिए विधेयक को संविधान के विरुद्ध सिद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं | अनुच्छेद 368 के तहत संवैधानिक संशोधन, भारतीय संविधान की एक मूल संशोधन प्रक्रिया है, संशोधन प्रस्ताव साधारण बहुमत, विशेष बहुमत सेपास किया जाता है, प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है संसद के दोनों सदनों में पास होने के बाद कार्यपालिका अध्यक्ष राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद विधेयक अधिनयम बन जाता है नागरिकता संशोधन बिधेयक संशोधन प्रक्रिया से पास हुआ | एक प्रक्रिया संविधान के उन अनुच्छेदों में संशोधन के लिए है जो संघात्मक संगठन से संबंद्ध हैं जिसमें संसद के दोनों सदनों में संशोधन प्रस्ताव पास होने के बाद आधे से अधिक राज्य विधान सभा की स्वीकृति की आवश्यकता होती है | विधेयक के विपरीत तर्क दिए जा रहे हैं यह संशोधन, संविधान के अनुच्छेद 14 किसी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म, लिंग, स्थान आदि के आधार पर भेदभाव का विरोध करता है सुप्रीम कोर्ट में याचिकायें दायर की जा रही हैं निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगा तब भी मुस्लिम समाज को डरा कर गुमराह किया जा रहा है |अफगानिस्तान में नाम मात्र के ही हिन्दू एवं सिख रह गये है |पकिस्तान का जन्म धर्म के आधार पर हुआ था बंगला देश पहले पूर्वी पाकिस्तान था अब आजाद देश मुस्लिम देश | इन तीनों देशों में गैर इस्लामिक की हालत बहुत खराब है यहाँ कट्टरपंथियों के प्रभाव में कुफ्र , काफिर , सबाब,जेहाद की सोच जनमानस पर हावी हो रही है | गैर इस्लामिक की बेटियों को उठा ले जाना उनका बड़ी उम्र के आदमियों से निकाह पढ़वाना कितना बड़ा संताप है यह आम होता जा रहा है | हिन्दू ,बौद्ध,जैन सिख पारसी ,ईसाई उत्पीड़ित हैं उनकी बेटी, रोटी,जर जमीन घर और धर्म संकट में हैं वह क्या करें ?यह मूलत: अखंड भारत के वासी थे |भारत सरकार की नैतिक जिम्मेदारी दारी है उन्हें शरण दे यदि वह चाहे तो उन्हें नागरिकता दी जाये यही सरकार की कोशिश है| जिसका अनेक राजनीतिक दल विरोध कर रहे हैं मुस्लिम समाज को समझने ही नहीं दे रहे हैं यह कानून यहाँ के बाशिंदों के खिलाफ नहीं है |इन तीनों मुस्लिम देशों के निवासी गैर मुस्लिम के लिए भारत ही शरणस्थली है उन्हें नागरिकता देना देश की सरकार का कर्त्तव्य है |हैरानी होती है राजनीतिक दल आन्दोलन के नाम पर स्टूडेंट को भड़का रहे हैं इनमें दो तीन ही लीडर बन सकेंगे बाकी का कैरियर खत्म हो जाएगा |सार्वजनिक सम्पत्ति की तोड़ फोड़ टैक्स पेयर के साथ अन्याय है |
'जी न्यूज चैनल में नागरिक संशोधन अधिनयम पर बहस श्री तारिक फतेह के साथ'

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