विश्व के महान शासक नेपोलियन बोनापार्ट का जीवन-परिचय

23 दिसम्बर 2019   |  स्नेहा दुबे   (1615 बार पढ़ा जा चुका है)

विश्व के महान शासक नेपोलियन बोनापार्ट का जीवन-परिचय

अभी तक आपने भारत के कई महान योद्धाओं के बारे में जाना और पढ़ा होगा लेकिन दुनिया के जो महान शासक थे उनके बारे में शायद ही आपने सुना हो। इनका नाम नेपोलियन बोनापार्ट था जो फ्रांस के एक महान शासक थे। नेपोलियन ने कभी हारना सीखा ही नहीं था, उन्होंने अपने मजबूत इरादे और अटूट दृढ़संकल्पों के साथ दुनिया के बड़े हिस्से पर अपना दबदबा कायम किया। विश्व को अपनी ताकत और बहादुरी का परिचय भी दिया, कि उनमें एक अद्भुत साहस था। इनके सामने दुश्मन भी खौफ खाते थे। नेपोलियन बोनापार्ट एक साधारण आदमी थे लेकिन दुनिया के सबसे शक्तिशाली और ताकतवर बादशाह बनने में उन्हें समय नहीं लगा। यहां हम आपको Nepolian bonapart in Hindi बताने जा रहे हैं जो आपको जरूर पसंद आएगा।


नेपोलियन बोनापार्ट की जीवनी | Nepolian bonapart Biography


नेपोलियन बोनापार्ट का जन्म 15 अगस्त, 1769 को फ्रांस के कोर्सिका द्वीप के अजैक्सियों में हुआ था। इनके पिता कार्लो बोनापार्ट फ्रांस के राजा के दरबार में कोर्सिका द्वीप के प्रतिनिधि थे। नेपोलियन का जन्म रईस खानदान में हुआ था इस वजह से इनका बचपन काफी सुखद रहा, इन्हें अच्छी शिक्षा मिली और इनके परिवार वालों ने इनकी योद्धा प्रवृत्ति को देखते हुए इन्हें फ्रांस की एक मिलिट्री एकेडमी में सैनिक अफसर बनने के लिए भेजा गया था। इसके बाद नेपोलियन ने पेरिस के एक कॉलेज से साल 1785 में अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की और फिर रेजीमेंट तोपखाने में उन्हें सबलेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति मिल गई। नेपोलियन के पिता की मौत हो जाने से इनके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। इनके ऊपर 7 भाई-बहनों की जिम्मेदारी थी जिनका पालन-पोषण इन्होंने ही किया। नेपोलियन ने जोसेफीन के साथ शादी की लेकिन इन्हें कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने लुऊस के साथ दूसरी शादी की और पिर नेपोलियन पिता बनने में कामयाब हुए।


फ्रांस में नेपोलियन की क्रांतिकारी के रूप में भूमिका


Napoleon Bonaparte


साल 1786 में नेपोलियन कोर्सिका आ गए और इसके तीन ही साल बाद फ्रांस की लोकतांत्रिक क्रांति शुरु हो गई थी। इस विद्रोह का मकसद फ्रांस की राजशाही को पूरी तरह से खत्म करके लोकतंत्र की स्थापना करना था। फ्रांस में ये विद्रोह साल 1799 तक चला जिसमें नेपोलियन ने एक खास भूमिका निभाई थी। फ्रांस के विद्रोह के समय वे फिर फ्रांस आए और वहां उनकी सैन्य प्रतिभा को देखते हुए उन्हें विद्रोही सेना की एक टुकड़ी का कमांडर बनाया गया। इसके बाद साल 1793 में जब इंग्लैंड की सेना से फ्रांस के टाउलुन शहर पर कब्जा किया तो नेपोलियन ने अंग्रेजों को बाहर निकालनकर जीतने की जिम्मेदारी ली, इसके बाद उन्होंने अपने अद्भुत युद्ध कौशल और अदम्य सैन्य प्रतिभा का प्रदर्शन करके वहां अंग्रेजों को खदेड़कर भगा दिया। नेपोलियन के कारण फ्रांस को एक नाउम्मीद जीत हासिल हुई। इस जीत के बाद फ्रांस के राजा इनसे काफी प्रभावित हुए और सिर्फ 24 साल के नेपोलियन को बिग्रेडियर जनरल बना दिया, वहीं इसके बाद नेपोलियन साल 1796 में इटली पर भी विजय हासिल करके वहां के बादशाह बने। इससे उनकी शौहरत और प्रसिद्धि बढ़ती चली गई।


नेपोलियन इस तरह बने फ्रांस के बादशाह


साल 1799 में फ्रांस की राजधानी पेरिस के हालत खराब होने लगे, इससे वहां की सरकार जिसे डायरेक्ट्री कहा जाता था असहाय और कमजोर होने लगी थी। ऐसे समय में नेपोलियन बोनपार्ट ने अपनी रणनीति कुशलता से वहां पर नई सरकार की स्थापना कर दी। इसके बाद नेपोलियन ने फ्रांस की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई बड़े परिवर्तन किए और शिक्षा का प्रसार भी किया। लोगों को उनके अधिकार दिलवाए, इतना ही नहीं उन्होंने फ्रांस की एक ताकतवर सेना भी तैयार की। इनकी लोकप्रियता लोगों के बीच बढ़ने लगी और साल 1804 में उन्होंने फ्रांस में अमन कायम करने के लिए खुद को सम्राट घोषित किया। फ्रांस के सम्राट बनने के बाद साल 1805 में अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई जीती, जिसमें ऑस्ट्रेलिया और रूस की विशाल सेनाओं को अपने रणनीतिक कौशल से पराजित कर डाला। इस विद्रोह में नेपोलियन ने दुश्मन के 26 हजार सैनिकों को मार दिया और अपनी बहादुरी का परिचय पूरी दुनिया में दिया। साल 1805 से लेकर 1811 तक नेपोलियन बेताज बादशाह बन चुका था जिसने हॉलैंड, जर्मनी, इटली और ऑस्ट्रेलिया जैसे तमाम बड़े देशों में फ्रांसीसी साम्राज्य का विस्तार करके यूरोप में अपना दबदबा बना लिया था।


इस तरह बिखरी नेपोलियन की बादशाहत


Napoleon Bonaparte


ब्रिटेन के शांति समझौता नहीं होने पर साल 1812 में नेपोलियन ने ब्रिटेन के व्यापार को पूरी तरह से रोकने का फैसला किया। इसकी आर्थिक नाकेबंदी के लिए रूस की मनाने के लिए रूस की सीमा पर फ्रांस के करीब 6 लाख सैनिक तैनात किए। मगर रूस के मोर्चे पर नेपोलियन को कोई खास कामयाबी नहीं मिली बल्कि भयानक सर्दी होने के कारण नेपोलियन को पीछे हटना पड़ा था। इतना ही नहीं इसी दौरान नेपोलियन की भारी सेना भुखमरी का शिकार हो गई, वहीं से नेपोलियन की बादशाहत बिखरने लगी थी। हम सभी ने स्कूल के दिनों में इतिहास की किताबों में कई महान युद्धों की तारीखें याद की हंगी लेकिन समय के साथ हम स्कूल में पढ़ी किताबें भूल गए। स्कूल के दिनों में हम सभी ने फ्रांस के सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट और वाटरलू की लड़ाई के बारे में पढ़ा था। वाटरलू की लड़ाई ऐसी लड़ाई थी जिसने अधिकांश यूरोप को जीतने वाले नेपोलियन की कहानी को खत्म किया था। लंदन के एक भूवैज्ञानी मैथ्यू येंज की रिसर्च में ये बात सामने आई थी कि वाटरलू ने नेपोलियन को एक बारिश के कारण हरा दिया था। दरअसल, 19वीं शताब्दी के शुरुआत में यूरोप के आधे से ज्यादा हिस्सों पर राज करने वाले फ्रांसीसी शासक नेपोलियन बोनापार्ट को उसके ही देश से निकाल दिया गया था। नेपोलियन को एल्बा द्वीप भेजा गया, साल 1815 में नेपोलियन ने 70 हजार सैनिकों के साथ नीदरलैंड पर हमला करने का निर्णय लिया। इसी बीच नेपोलियन के खिलाफ विद्रोह की हवा चलने लगी और उसके सपने चकनाचूर हो गए। ये चकनाचूर एक गठबंधन के कारण हुआ और ये गठबंधन बेल्जियम, ब्रिटिश, जर्मन और डच सेनाओं के बीच था। जिसका सामना नेपोलियन की सेना को करना था।

बेल्जियम, ब्रिटिश, जर्मन और डच सेनाओं की इस गठबंधन वाली सेना का नेतृत्व उस समय वेलिंग्टन के ड्यूक और मार्शल गेभार्ड वॉन ब्लूचर कर रहे थे। ऐसा माना जाता है कि इस गठबंधन वाली सेना और नेपोलियन की सेना के बीच वाटरलू की लड़ाई करीब 10 घंटे तक चली थी। उसी बीच तेज बारिश होने के कारण नेपोलियन को सेना से लड़ने में परेशानी होने लगी। लड़ाई के दौरान नेपोलियन की एक गलती ये हो गई कि उसने अपने घुड़सवारों का उपयोग काफी देर से किया। जमीन गीली होने के कारण नेपोलियन के सैनिक लड़ने में कमजोर होने लगे, हालांकि उस समय नेपोलियन की हार की वजह मौसम को नहीं ठहराया गया था। वाटरलू की लड़ाई के 200 सालों के बाद एक रिसर्च में ये बात सामने आई कि नेपोलियन की हार की वजह तेज बारिश ही थी। रिसर्च में सामने आया कि साल 1815 में गर्मी के महीने में जो बारिश हुई थी उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।


नेपोलियन बोनपार्ट की मृत्यु | Napoleon Bonaparte Death


Napoleon Bonaparte


वाटरलू की लड़ाई हारने के बाद ब्रिटेन ने नेपोलियन को करीब 6 साल तक दक्षिण अटलांटिक के सेंट हेलेना नाम के द्वीप में कैद करके रखा था। फिर साल 1821 में पेट के कैंसर के कारण इस महान सम्राट की मौत हो गई थी। मृत्यु के बाद नेपोलियन को सेंट हेलेना द्वीप में ही दफना दिया गया था लेकिन साल 1840 में उनके अवशेषों को फ्रांस में एक बार फिर दफनाया गया था। इस तरह नेपोलियन ने अपने जीवनकाल में अपनी अद्भुत शक्ति और अदम्य शक्ति का परिचय देकर यूरोप में अपना नाम स्थापित किया। इतिहास के सबसे महान बादशाहों में नेपोलियन बोनापार्ट का नाम भी लिया जाता है। नेपोलियन बोनापार्ट 5 फुट 6 इंच का था और इन्होंने एक रोमांटिर नॉवेल क्लिसन एट यूजीन भी लिखी थी। फ्रांस में किसी भी सुअर का नाम नेपोलियन रखना गैरकानूनी माना जाता है।

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