राजनेता उतने ही सच्चे है जितनी खुद को वर्जिन बताने वाली वेश्याएँ - दिनेश डॉक्टर

24 दिसम्बर 2019   |  दिनेश डॉक्टर   (475 बार पढ़ा जा चुका है)

एक आध प्रतिशत अपवाद को छोड़ दें तो दुनिया भर के सियासतदां लोग, झूठ,सफेद झूठ, काला झूठ, हरा झूठ यानि के हर रंग का झूठ रोज़ रोज़ बार बार और लगातार हर जगह और हर वक़्त बोलते है । उस पर खुद ही विश्वास भी करने लगते है और फिर दूसरों को भी विश्वास दिलाने लगते है । किसी विद्वान ने कहा था कि एक झूठ सौ बार बोलने से सच हो जाता है । ये झूठ को इतनी बार बोलते है कि खुद ही भूल जाते है कि कितनी बार बोला है, कहाँ बोला है और कैसे किस संदर्भ में बोला है । जब इनको इनके झूठ की वीडियो या ऑडियो क्लिप दिखाओ या सुनाओ तो इनके पास रटा रटाया जवाब होता है कि ये छेड़छाड़ करके डॉक्टर्ड किया हुआ है - मेरा मतलब ये नही बल्कि वो था ! मुझे ग़लत कोट किया जा रहा है ।

नकली तेल घी में डूबी झूठी खबरे खाकर, सिंथेटिक दूध के साथ बेसिरपैर के हिन्दू मुस्लिम नैरेटिव पीकर और यूरिया खोए के वायदों की मिठाइयां खाकर लोगों की याददाश्त का तो कबाड़ा हो ही चुका है । आज के अहम मुद्दे अगला इलेक्शन आते आते आम की गुठली से भी गए बीते हो जाते है । कढ़ी की तरह धरना प्रदर्शनों का उबाल भी रोज़ी रोटी, मकान के किराए, कार या मोटरसाइकिल के कर्जे की किश्त के चक्कर में अड़तालीस घंटो में दो चार हाथों में मोमबत्ती बना नज़र आता है । लोग भूल जाते है कि सियासत हाथी की चाल चलती है दो चार दस के भौंकने से कहाँ बदलती है ।

किसे याद है कि प्याज 120 से नब्बे पर आकर फिर 120 पर भाग रहा है, जीडीपी की पीपी बज रही है, ग्रोथ रेट और अर्थव्यवस्था का बैंड बजा हुआ है । बस हर दिमाग में घुसपैठियों की घुसपैठ है - नया नैरेटिव सेट है ।

अगला लेख: सेल्फियों की दुनियां



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
30 दिसम्बर 2019
सामने झक्क सफेद कलफदार कुर्ते पायजामें नेता जी बैठे थे । इंडिया किंग्स की सिगरेट की डब्बी सामने मेज पर पड़ी थी । शाम का वक्त था । स्कॉच की बोतल आधी हो चुकी थी । वो बोल रहे थे और मैं सुन रहा था । वो कह रहे थे कि उन्हें देश के लिए बहुत काम करना है । युवा पीढ़ी को नई दिशा देनी है । कौमी एकता मज़बूत करनी
30 दिसम्बर 2019
19 दिसम्बर 2019
अक्सर ही यह सुनने को मिलता है कि 'हम बहू को बेटी बनाकर रक्खेंगे' । फिर कुछ दिन बाद क्लेश शुरू हो जाता है । एक दूसरे के लिए शिकायतों के अम्बार भी लग जाते है । साल दो साल होते होते स्थिति इतनी कटु हो जाती है कि कुछ अपवादों को छोड़ दें तो बेटी बनी बहू बेटे के साथ दूसरा घर बसा लेती है ।दरअसल हम मध्यमवर्ग
19 दिसम्बर 2019
29 दिसम्बर 2019
महानायक बरसों की तरह इस बरस भी अंदर की बात वाला वार्मर अंदर ही अंदर पहने हुए खिसियाई हुई बुढ़िया की बगल में हवाई जहाज की फर्स्ट क्लास सीट पर बिगड़ैल बच्चे की तरह भुजिया चबाकर बुढ़िया को चिढ़ाते हुए, बिजली के तार कपड़े धोने का डिटर्जेंट घर की सीलन का कैमिकल बच्चों के कपड़े जूते सरिया लोहे के पाइप सोने क
29 दिसम्बर 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x