हानि लाभ, जन्म मृत्यु, मान अपमान , बीमारी दुर्घटना को किसी ग्रहण से मत जोड़ें - दिनेश डॉक्टर

26 दिसम्बर 2019   |  दिनेश डॉक्टर   (445 बार पढ़ा जा चुका है)

ग्रहण को लेकर जितने वहम हिंदुस्तानियों ने - वो भी खास तौर पर हिंदुओं ने पाल रक्खे है उनका मुकाबला दुनिया भर में नही । ग्रहण सीधे सीधे एक एस्ट्रोनॉमिकल या खगोलीय घटना है जो घूमते घूमते कभी पृथ्वी के बीच में आने से चन्द्रमा के साथ तो कभी चंद्रमा के बीच में आने से सूर्य के साथ घटती है । इसको किन किन चीजों से जोड़कर धर्म के धंधे में लग जाते है वो बड़ी हैरानी पैदा करता है । यहां तक कि पढ़े लिखे समझदार लोग भी इन वहमों के शिकार होकर सूतक, पातक जैसे शब्द का प्रयोग शुरू कर देते हैं । कुछ लोग तो ग्रहण की आशंकाओं से डर कर मंदिरों और ज्योतिषियों के चक्कर काटने शुरू कर देते है और अच्छे खासे मूर्ख बन जाते है । जितने मुंह उतनी ही बाते । कोई कुछ कहेगा तो कोई कुछ । कोई कहेगा सारा खाना फेंक दो तो कोई कहेगा कि शुद्धि के लिए किसी पवित्र नदी में स्नान कर लो । कोई दान पुण्य या मंत्रजाप करने को कहेगा - जो वैसे भी आस्था के हिसाब से ग्रहण के बिना भी किया जा सकता है तो कोई अपने मन से बनाया कुछ नया फंडा रच देगा ।

वैसे तो जो आप को करना है वो आप करें क्योंकि परिवार की सदियों पुरानी आस्थाओं ने आपके सोच को इतना कुंद कर रखा है कि उनके विरुद्ध जाने का साहस जुटाना हरेक की बस में नही है । भय और आशंकाएं अक्सर हमें इतना मजबूर कर देती है कि कभी इस तो कभी उस धारणा में कैद होकर हम न चाहते हुए भी वहम के शिकार हो ही जाते है । मेरी मानें तो किसी वहम में न पड़े और जो रोजमर्रा का आपका सामान्य रूटीन है उसी के हिसाब से चलते रहें । जीवन में हानि लाभ, जन्म मृत्यु, मान अपमान , बीमारी और दुर्घटनाएं होती ही रहती है । उन्हें किसी सूर्य ग्रहण या चन्द्र ग्रहण से मत जोड़ लेना ।

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बिल्कुल सही लिखा है । ये ग्रहण तो एक बड़ी खूबसूरत खगोलीय घटना है फिर इससे इतना भय क्यों ? इसका तो आनंद लेना चाहिए इसकी ख़ूबसूरती का सम्मान करके ।

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