बगल की सीट की बुढ़िया और महानायक की भुजिया - दिनेश डॉक्टर

29 दिसम्बर 2019   |  दिनेश डॉक्टर   (499 बार पढ़ा जा चुका है)

बगल की सीट की बुढ़िया और महानायक की भुजिया - दिनेश डॉक्टर

महानायक बरसों की तरह इस बरस भी अंदर की बात वाला वार्मर अंदर ही अंदर पहने हुए खिसियाई हुई बुढ़िया की बगल में हवाई जहाज की फर्स्ट क्लास सीट पर बिगड़ैल बच्चे की तरह भुजिया चबाकर बुढ़िया को चिढ़ाते हुए, बिजली के तार कपड़े धोने का डिटर्जेंट घर की सीलन का कैमिकल बच्चों के कपड़े जूते सरिया लोहे के पाइप सोने के गहने चॉकलेट चवयनप्राशऔर भी न जाने क्या क्या, बड़ी शिद्दत और दिलकश अंदाज़ से बेचता रहा । लोग क्योंकि उसके बेतहाशा मुरीद है और उसे दिल से चाहते है तो भुजिया न खाने वाले भी खूब भुजिया खा रहे हैं , चवयनप्राश खाकर वार्मर पहन कर बर्फ से ठंडे लोहे के पाइप भी खुशी खुशी पकड़ रहे है , डिटर्जेंट खरीदने के चक्कर में वाशिंग मशीन के ऑर्डर दे रहे है - लब्बोलुबाब ये कि महानायक का जादू देश के सर पर चढ़ कर बोल रहा है । महानायक के सामने हॉट सीट पर बैठ कर बीस तीस हज़ार के इनाम जीतने वाले भी करोड़पति से कम महसूस नही कर रहे । महानायक के दरबार में औरते पतियों को और छोकरा छोकरी मां बाप को खुले आम नीचा दिखा रहे हैं । और महानायक भी कमाल है - पेट पर बने सर्जिकल गोल्फ कोर्स और गंभीरतम बीमारियों के बावजूद भी सुबह चार बजे जिम से ट्वीट कर रहा है - स्सालों बुड्ढा होगा तुम्हारा बाप !

दरअसल महानायक हिम्मत न हारने वाला ऐसा योद्धा है जिससे कोई भी प्रेरणा ले सकता है । जहां बहुत सारे सिक्स पैक्स वाले हैंडसम हंक्स और लचीले बदन वाली विश्व सुंदरियां शून्य में ताक ताक कर एंडोर्समेंट की ई को भी तरसती रही वहां हमारे प्यारे बुढऊ सब के हिस्से का माल खुद ही बेचते हुए अपने इश्टाइल में कहते रहे -अबे बुड़बक लाइन वहीं से शुरू होती है जहां हम खड़े होते हैं ।

इसमें कोई शक नही कि महानायक सेल्युलाइड संसार का - चाहे फिल्में हों, टेलीविजन हो या फिर कमर्शियल विज्ञापन- बेताज बादशाह हैं । यार बन्दे की कमाल की स्पिरिट है, गजब का टेलेंट है और कभी न हारने वाला हौसला हैं । जिस उम्र में मेरे पिता की पीढ़ी के लोग खाट पकड़ कर 'अरे इस बुड्ढे की भी सुन लो' की पूरे पूरे दिन खांस खांस कर घर वालों, रिश्तेदारों और पड़ौसियों की हमदर्दी छीनने में लगे रहते थे, उम्र के उसी पड़ाव में महानायक सातों दिन भुजिया खाकर फिगर कांशस युवा पीढ़ी में कॉम्प्लेक्स पैदा कर रहा है ।

भइया तुम्हारी तुम जानों - हमसे तो इसकी बराबरी अगले चार पांच जन्म न हो पाएगी । हमने तो सर्दी के चक्कर में आजकल मॉर्निंग वाक भी बन्द कर दी है और घर वालों की हमदर्दी के चक्कर में खाँसना भी शुरू कर दिया है ।

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