नूतन वर्ष का अभिनंदन

30 दिसम्बर 2019   |  शिल्पा रोंघे   (415 बार पढ़ा जा चुका है)


वहीं खड़े है वृक्ष सभी तनकर.


वहीं खिल रहे है फूल सुंगध फैलाकर.


सदियों से वहीं खड़े पर्वत विशाल.


उसी समुद्र में जाकर मिल रही तरंगिणी.


उसी डाल पर बैठा है पक्षी घरौंदा बनाके,


उसी नभ में उड़ रहा है पंख फैलाकर.


कुछ नहीं बदलता नवीन वर्ष के साथ

हां बस संकल्प निश्चित ही हो जाते है दृढ़.


बीते वर्ष में मिली सीखें मानो

बन जाती है, नवीन वर्ष के जीवन का पाठ.


शिल्पा रोंघे

अगला लेख: अलविदा 2019



शिल्पा जी सत्य कहा, संकल्प ही सिद्ध होते हैं...,

शिल्पा जी सत्य कहा, संकल्प ही सिद्ध होते हैं...,

शिल्पा रोंघे
31 दिसम्बर 2019

धन्यवाद पूर्णिमा जी

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
16 दिसम्बर 2019
बढ़ती जनसंख्या परस्वास्थ्य सुविधाएं पड़ रही कम.महंगी हुई शिक्षा और अच्छे स्कूल हुए कम.ट्रेनों में बैठने को हुई जगह कम.महानगरों में रहने को मकान पड़ रहे कम.पेड़ और पौधे हुए कम.पीने का पानी हुआ कम.सिकुड़ रहे खेत खलिहान, अनाज हुआ कम.बढ़ रही गरीबी और महंगाई.किसी ने धर्म को तो किसी ने जातिको देश की बदहाल
16 दिसम्बर 2019
31 दिसम्बर 2019
सा
चंद्र की शुभ्र किरणेंले रही विदा दुल्हन की तरह.रात्री की डोली मेंबैठकर उन्हें सूर्योदय के घर जाना है.तम तो प्रकाशतक जाने का प्रतिदिन का साधन है.किंतु आज पिछले बरस कोसबको नवीनवर्ष से मिलवानाहै.शिल्पा रोंघे
31 दिसम्बर 2019
31 दिसम्बर 2019
सा
चंद्र की शुभ्र किरणेंले रही विदा दुल्हन की तरह.रात्री की डोली मेंबैठकर उन्हें सूर्योदय के घर जाना है.तम तो प्रकाशतक जाने का प्रतिदिन का साधन है.किंतु आज पिछले बरस कोसबको नवीनवर्ष से मिलवानाहै.शिल्पा रोंघे
31 दिसम्बर 2019
19 दिसम्बर 2019
कहते है जो ये कि वक्त के पंजों से बचालेंगे तुम्हेंवहीं सबसे बड़ेशिकारी होते हैं.शिल्पा रोंघे
19 दिसम्बर 2019
11 जनवरी 2020
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves></w:TrackMoves> <w:TrackFormatting></w:Tr
11 जनवरी 2020
09 जनवरी 2020
रॉक गार्डन पर कविता- फ़र्क बस नज़रिये का था.टूटी हुई चीज़ समझकर बेज़ान मान लिया गया.इक शख़्स ने जोड़ जोड़कर मुझे खूबसूरत बागीचा बना लिया.शिल्पा रोंघे
09 जनवरी 2020
21 दिसम्बर 2019
सा
साथी उसे बनाओं जो सुख दुख में साथ दे.ना कि उसे जो सिर्फ तस्वीरों में आपकी शोभा बढ़ाएं.शिल्पा रोंघे
21 दिसम्बर 2019
24 दिसम्बर 2019
“चकाचौंध” पत्रिका अपने प्रकाशन के चार साल पूरेकर चुकी थी, किसी को उम्मीद भी नहीं थी कि इस पत्रिका की बिक्री इतनी बढ़ जाएगी,अब ऐसे में सभी सदस्यों को मीटिंग में बुलाया गया और उनके योगदान के लिए बधाई दीगई। तभी मीटिंग में एक व्यक्ति ने पत्रिका
24 दिसम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x