कोस कोस पर बदले पानी

31 दिसम्बर 2019   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (402 बार पढ़ा जा चुका है)

कोस कोस पर बदले पानी

वर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनाएँ

कोस कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बानी

भारत में विभिन्न प्रान्तों व समुदायों के नववर्ष

आज 2019 का अन्तिम दिन है – दिसम्बर माह का अन्तिम दिवस... और कल वर्ष 2020 का प्रथम दिवस - पहली जनवरी – जिसे लगभग हर जगह नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है | सबसे पहले तो सभी को कल से आरम्भ होने वाले वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ...

कल शाम को हमारे पास किन्हीं परिचिता का फोन आया “डॉ साहब, आप तो हिन्दू रीत रिवाज़ों और संस्कारों के विषय में लिखती हैं, एक अच्छी ज्योतिषी हैं, आप भी ये अंग्रेजों का नया साल मनाने लगीं...?” पहले तो कुछ समझ नहीं आया, फिर उन्होंने ही बात स्पष्ट की “आप पिछले दो दिनों से WOW India की वेबसाइट पर नए साल की शुभकामनाएँ पोस्ट कर रही हैं | अरे हम हिन्दुओं का नया साल नहीं है ये...”

उन्हें कुछ भी समझाना हमारे बस की बात नहीं थी | लेकिन फिर भी, पहली जनवरी को नववर्ष कहे जाने का विरोध करने वालों को इतना अवश्य बताना चाहेंगे कि भारत एक ऐसा विशाल देश है जहाँ अनगिनती संस्कृतियाँ सहस्राब्दियों से परस्पर मिलजुल कर निवास करती आ रही हैं कि संसार का कोई अन्य देश इसकी “सर्वधर्मसमन्वयात्मक” संस्कृति की बराबरी नहीं कर सकता | जहाँ हर कोस पर जल का स्वाद बदला हुआ मिलता हो और हर चार कोस पर बानी यानी बोली बदली हुई मिलती हो वहाँ पर्व और त्यौहारों में विविधता पाया जाना कोई असामान्य बात नहीं है | यहाँ स्थान स्थान पर नदियों के ऐसे संगम उपलब्ध होते हैं जो दूर से अलग अलग रंगों में अकेली बहती चली आती हैं, लेकिन एक संगम स्थल पर आकर एकरंग हो जाती हैं | ऐसे में विभिन्न हिन्दू संस्कृतियों में अलग अलग तिथियों से नववर्ष का आरम्भ माना जाना कोई असामान्य बात नहीं है, क्योंकि अन्ततोगत्वा सब हैं तो “हिन्दुस्तानी” या “भारतीय” ही | उनका कैलेण्डर भी एक दूसरे से अलग हो सकता है जो उस स्थान विशेष के मौसमों तथा वहाँ की कृषि व्यवस्था के आधार पर बनाया जाता है | कुछ सौर कैलेण्डर को मानते हैं तो कुछ चान्द्र कैलेण्डर को | किन्तु यह भी सत्य है कि अधिकाँश हिन्दुओं का नववर्ष मार्च और अप्रैल से आरम्भ होता है | प्रस्तुत है सन 2020 में अलग अलग नववर्ष की एक लिस्ट...

पहली जनवरी : अधिकाँश हिन्दू ही क्या लगभग पूरा देश पहली जनवरी को नववर्ष का आरम्भ मानकर शान्ति और सुख समृद्धि की प्रार्थना ईश्वर से करता है |

पोंगल : 15 जनवरी यानी मकर संक्रान्ति का पर्व तमिलनाडु का नववर्ष |

कर्नाटक, तेलंगाना और आन्ध्र प्रदेश का उगडी या युगादि, महाराष्ट्र का गुडी पर्व और लगभग समस्त उत्तर भारत का शार्वरी नामक नव सम्वत्सर विक्रम संवत 2077 : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी 25 मार्च को, इन क्षेत्रों में इसी दिन युग का आरम्भ माना जाता है और नववर्ष का स्वागत किया जाता है | चैत्र माह की प्रतिपदा को ये पर्व मनाए जाते हैं | चन्द्रमा पर आधारित होने के कारण हर वर्ष इनकी तारीखें बदलती रहती हैं | इसके एक दिन बाद आता है चैती चाँद : 26 मार्च – सिन्धी समाज का नववर्ष का आरम्भ जो चैत्र शुक्ल द्वितीया से आरम्भ माना जाता है | चन्द्र आधारित होने के कारण इसकी भी तारीखें हर वर्ष बदल जाती हैं | भारत सरकार द्वारा मान्य शालिवाहन शक संवत 1942 भी इस दिन से आरम्भ हो जाएगा |

तमिल कैलेण्डर का वर्ष का प्रथम दिन पुथंडू या पुथुरूषम, ,मलयालम का नववर्ष का प्रथम दिन विषु और महा विशुभ संक्रान्ति उड़ीसा – ये सभी 14 अप्रैल को हैं | बैसाखी 13 अप्रैल को है | सौर कैलेण्डर होने के कारण ये पर्व नव वर्ष के आरम्भ के रूप में हर वर्ष तेरह या चौदह अप्रैल को ही मनाए जाते हैं |

नब बर्ष या पोइला बैसाख बंगाल, बोहाग बिहू असम तथा मैथिली और नेपाली नववर्ष का आरम्भ पन्द्रह अप्रैल को होगा | बंगाल के कैलेण्डर के अनुसार सन 1425 का आरम्भ होगा | सौर कैलेण्डर होने के कारण हर वर्ष 14 या 15 अप्रैल से ही इन नव वर्षों का आरम्भ होता है |

गुजरात में सोलह नवम्बर से नववर्ष का आरम्भ होगा तथा इसे भी शेष उत्तर भारत की ही भाँति विक्रम सम्वत के नाम से जाना जाता है |

इस प्रकार पूरे भारतवर्ष में विभिन्न “हिन्दू” संस्कृतियों के वहाँ की अपनी मान्यताओं के अनुसार नववर्ष के आरम्भ माने जाते हैं और वे सब लोग अपने अपने नव नववर्ष के आगमन का स्वागत पूरे हर्षोल्लास के साथ करते हैं – जो उन्हें करना भी चाहिए | ऐसे में इन सभी नववर्ष के प्रथम दिवस के पर्वों के साथ साथ यदि पहली जनवरी को पूरा देश एकजुट होकर उल्लासमय वातावरण में नववर्ष का स्वागत करना चाहता है तो इसमें कौन सी बुराई है या कौन सा हिन्दुत्व ख़तरे में पड़ जाएगा ? हम स्वयं चैत्र प्रतिपदा को नवरात्रों की घट स्थापना के साथ अपने नव सम्वत्सर का स्वागत करते हैं | लेकिन इसके साथ ही यदि सबके साथ मिलकर पहली जनवरी को नववर्ष मनाया जाए तो क्या उल्लास... उमंग... उछाह... में वृद्धि नहीं होगी...? वो भी भारत जैसे उत्सवप्रिय देश में... सोचियेगा ज़रूर इस विषय में...

एक बार पुनः आने वाले वर्ष के लिए अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ... हम सभी गत वर्ष की मीठी यादों को मन में रखकर वर्ष 2019 को विदा करें और वर्ष 2020 में स्वस्थ-समृद्ध और सुखी रहते हुए नवीन संकल्पों के साथ आगे बढ़ें और अपने लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में अग्रसर रहें...

अगला लेख: हमें अपने "हिन्दुस्तानी" होने पर गर्व होना चाहिए



दिनेश डॉक्टर
31 दिसम्बर 2019

बहुत सुंदर और सारगर्भित लेख । बहुत बहुत बधाई ।

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