गीत

04 जनवरी 2020   |  नेहाल कुमार सिंह निर्मल   (411 बार पढ़ा जा चुका है)

हर युगों में रहे आबाद-ए-दोस्ती
आबाद-ए-दोस्ती आवाज-ए-दोस्ती

श्री कृष्ण सुदामा की दोस्ती है एक मिशाल
दोस्ती में रंक राजा एक ही समान
नंगे पांव दौड़ आती है सरकार-ए-दोस्ती
आबाद-ए-दोस्ती आवाज-ए-दोस्ती

दोस्ती की लाज बचाते है अंग राज
भाई धर्म जान के भी करते रहे वार
जान दे के भी बचाए है जावाज-ए-दोस्ती
आबाद-ए-दोस्ती आवाज-ए-दोस्ती

गीता ग्रंथ हो या हो बाईवल कुरान
दोस्ती का मतलव सभी मे एक समान
मिट के भी निभाते है इमान-ए- दोस्ती
आबाद-ए-दोस्ती आवाज-ए-दोस्ती

आज की ये दोस्ती क्या खुब है यारों
माल हाथ हो तो दोस्त मिलते हजारों
बाजार मे है बिक रही ये प्यार-ए- दोस्ती
आबाद-ए-दोस्ती आवाज-ए-दोस्ती

अब आपसी का बैर मिटाए हम सभी
दोस्तो को दोस्ती सिखादे ऐ नवी
हो नेहाल हर इन्सा ऐ है पैगाम-ए- दोस्ती
पैगाम-ए- दोस्ती आवाज-ए- दोस्ती
आबाद-ए-दोस्ती आवाज-ए-दोस्ती

-- नेहाल कुमार सिंह निर्मल

अगला लेख: गीत



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x