मानव सेवा माधव सेवा

06 जनवरी 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (5444 बार पढ़ा जा चुका है)

मानव सेवा माधव सेवा

मानव सेवा ही वास्तविक माधव सेवा

आज किन्हीं मित्र ने प्रश्न किया कि मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा क्यों की जाती है | तो सबसे पहले तो इस शब्द में ही इसका उत्तर निहित है – प्राणों की प्रतिष्ठा – प्राण फूँकना | कोई भी मूर्ति यदि किसी मन्दिर में रखी जाती है तो उस समय उसकी विधिवत पूजा की जाती है - जो प्राण प्रतिष्ठा कहलाती है | प्राण प्रतिष्ठा यानी किसी पत्थर में भी प्राण डाल देना - पत्थर की मूर्ति को भी जीवन्त बना देना ताकि वह मनुष्यों के द्वारा की गई प्रार्थनाओं को स्वीकार कर सके और उनकी सम्वेदनाओं और भावों को अनुभव कर सके | अन्यथा तो पत्थर तो पत्थर ही होता है | लेकिन मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही कुछ नियमों का भी पालन करना होता है | मन्दिर में गर्भ गृह - यानी जहाँ मूर्ति स्थापित है और उसकी प्राण प्रतिष्ठा कर दी गई है - उसके ऊपर कोई भवन या कमरा आदि नहीं होना चाहिए | इसीलिए आपने देखा होगा गर्भ गृह के ऊपर गुम्बद बना होता है ताकि उस पर कोई चल न सके | क्योंकि प्राण प्रतिष्ठा के द्वारा जिन्हें स्थापित किया गया है वो हमारे लिए पूज्य हो गए और इस स्थिति में उनके सर पर तो नहीं चढ़ सकता | इसी बात को ध्यान में रखते हुए घर के मन्दिर में भी यदि प्रतिमा स्थापित की जा रही है प्राण प्रतिष्ठा के द्वारा तो उसके ऊपर भी कुछ नहीं बनाया जाना चाहिए और वह स्थान टॉयलेट वग़ैरा से दूर होना चाहिए | यों, घर में प्राण प्रतिष्ठा किये बिना मूर्ति कहीं भी रखी जा सकती है और पूजा की जा सकती है...

देखा जाए तो प्राण-प्रतिष्ठा की यह परम्परा हमारी भारतीय दर्शन की उस महान सांस्कृतिक मान्यता का अनुमोदन करती है कि पूजा मूर्ति की नहीं की जाती - दिव्य सत्ता की की जाती है – महती चेतना की की जाती है | साथ ही ये भी कि भारतीय दर्शन जड़ से जड़तर वस्तु में भी प्राण शक्ति - प्राण ऊर्जा - का अनुभव करता है | इसीलिए तो पेड़ पौधों को भी पूजा जाता है | प्राचीन काल में वृक्षारोपण करते समय और उस पर एक एक पत्ती फूल फल आते समय उसी तरह संस्कार किये जाते थे जैसे गर्भाधान से लेकर जीवन भर मनुष्यों के संस्कार किये जाते हैं | और ऐसा इसीलिए किया जाता था कि जिन वृक्षों को आरोपित करने से लेकर हर पग पर अपनी सन्तान के समान उनके साथ व्यवहार किया है उन्हें अकारण ही कोई कष्ट नहीं पहुँचाया जा सकता | यही बात मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के सन्दर्भ में भी समझनी चाहिए | जिन प्रस्तर प्रतिमाओं को पूर्ण विधि विधान के साथ प्रतिष्ठित किया जाएगा उनके प्रति वास्तव में व्यक्ति के मन में आस्था उत्पन्न होगी, और आस्था जब विश्वास में परिणत हो जाएगी तो निश्चित रूप से व्यक्ति की संकल्प शक्ति इतनी दृढ़ होती जाएगी कि उसकी सकारात्मकता में वृद्धि के साथ ही उसके समस्त कार्य सम्पन्न होते जाएँगे |

वो कहते हैं न - मानो तो पत्थर में भी भगवान हैं... लेकिन प्रस्तर प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही हमें मानव सेवा को विस्मृत नहीं कर देना चाहिए... वास्तविक अर्थों में तो मानव सेवा ही सच्ची माधव सेवा और मनुष्यता का सम्मान ही वास्तविक अर्थों में ईश्वर की पूजा अर्चना है...


मानव सेवा माधव सेवा

अगला लेख: हमें अपने "हिन्दुस्तानी" होने पर गर्व होना चाहिए



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
07 जनवरी 2020
पुरुषोत्तम मास अथवा अधिक मास आज एक मित्र नेमल मास यानी अधिक मास के सन्दर्भ में कुछ वैज्ञानिक तथ्य प्रस्तुत किये, जिनमें प्रमुख है किउनका मानना है कि सूर्य जब धनु या मीन राशि में आता है तब मल मास या खर मास कहलाताहै | तो इस प्रकार तो हर वर्ष मल मास होना चाहिए क्योंकि इन दोनों ही राशियों मेंसूर्य का गो
07 जनवरी 2020
24 दिसम्बर 2019
डॉ दिनेश शर्मा बहुत से सम सामयिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय के लिए जानेजाते हैं | मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर एक बार फिर से उनकी बेबाक राय... एक बारज़रूर पढ़ें और पसंद आए तो शेयर करें..राजनेता उतने ही सच्चे है जितनी खुद को वर्जिन बताने वाली वेश्याएँ - दिनेशडॉक्टरएक आध प्रतिशतअपवाद को छोड़ दें तो दुनिया
24 दिसम्बर 2019
24 दिसम्बर 2019
शबांग्लादेश के तात्कालिक राष्ट्रपति जियाउर रहमान द्वारा 1970 के दशक में एक व्यापार गुट सृजन हेतु किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप दिसम्बर 1985 में दक्षिण एशियाई देशों के उद्धार के लिए दक्षेस जैसे संगठन को विश्व पटल पर लाया गया। यह संगठन सार्क या दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) नाम से जान
24 दिसम्बर 2019
09 जनवरी 2020
शुक्र का कुम्भ राशि में गोचर आज पौष शुक्लचतुर्दशी को सूर्योदय से पूर्व चार बजकर तेईस मिनट के लगभग गर करण और ब्रह्म योगमें समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प,सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीतितथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारक शुक्र अपने परम मित्र शनि कीएक राशि मकर से
09 जनवरी 2020
24 दिसम्बर 2019
डॉ दिनेश शर्मा बहुत से सम सामयिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय के लिए जानेजाते हैं | मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर एक बार फिर से उनकी बेबाक राय... एक बारज़रूर पढ़ें और पसंद आए तो शेयर करें..राजनेता उतने ही सच्चे है जितनी खुद को वर्जिन बताने वाली वेश्याएँ - दिनेशडॉक्टरएक आध प्रतिशतअपवाद को छोड़ दें तो दुनिया
24 दिसम्बर 2019
26 दिसम्बर 2019
डॉ दिनेश शर्माने आज ग्रहण से डरने वालों के लिए बड़ा ही सारगर्भित लेख लिखा है जो हम यहाँप्रस्तुत कर रहे हैं | हम जानते हैं अपने लाभ हानि से डरने वाले लोग ग्रहण केअंधविश्वास से बाहर नहीं निकल सकते । लेकिन विश्वास कीजिये ये खूबसूरत खगोलीय घटनाडरने के लिए नहीं है, बल्कि इसे देखकर इसके सौन्दर्य का सम्मान
26 दिसम्बर 2019
24 दिसम्बर 2019
मंगल का वृश्चिक में गोचरवर्ष 2019 केसप्ताहान्त में बहुत महत्त्वपूर्ण गोचर हो रहा है - बुधवार 25 दिसम्बर पौष अमावस्या यानी कल रात्रि 9:29 के लगभग विशाखानक्षत्र पर भ्रमण करते हुए चतुष्पद करण और गण्ड योग में मंगल शुक्र की तुला राशिसे निकल कर अपनी स्वयं की राशि वृश्चिक में प्रस्थान कर जाएगा | यहाँ भ्रमण
24 दिसम्बर 2019
05 जनवरी 2020
6 से 12 जनवरी2020 तक का सम्भावित साप्ताहिकराशिफलनीचे दिया राशिफल चन्द्रमा की राशि परआधारित है और आवश्यक नहीं कि हर किसी के लिए सही ही हो – क्योंकि लगभग सवा दो दिनचन्द्रमा एक राशि में रहता है और उस सवा दो दिनों की अवधि में न जाने कितने लोगोंका जन्म होता है | साथ ही ये फलकथन केवलग्रहों के तात्कालिक गो
05 जनवरी 2020
22 दिसम्बर 2019
23 से 29 दिसम्बर2019 तक का साप्ताहिकराशिफलनीचे दिया राशिफल चन्द्रमा की राशि परआधारित है और आवश्यक नहीं कि हर किसी के लिए सही ही हो – क्योंकि लगभग सवा दो दिनचन्द्रमा एक राशि में रहता है और उस सवा दो दिनों की अवधि में न जाने कितने लोगोंका जन्म होता है | साथ ही ये फलकथन केवलग्रहों के तात्कालिक गोचर पर
22 दिसम्बर 2019
11 जनवरी 2020
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves></w:TrackMoves> <w:TrackFormatting></w:Tr
11 जनवरी 2020
08 जनवरी 2020
शनि का मकर में गोचरकल के लेख में शनि के मकर राशि में गोचर के समय आदि के विषय में चर्चा कीथी, आज सभी राशियों पर शनि के मकर में गोचर के सम्भावित प्रभावों पर चर्चा...किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसीकुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाताअपितु उस कुण्
08 जनवरी 2020
24 दिसम्बर 2019
बुधका धनु में गोचरवर्ष 2020 का अन्तिम सप्ताह– दो महत्त्वपूर्ण गोचर – मंगल का अपनी राशि वृश्चिक में गोचर और बुध का धनु मेंगोचर जहाँ राश्यधिपति गुरु, शनि, केतु और सूर्यदेव पहले सेविराजमान हैं | यहाँ हम बात कर रहे हैं बुध के गोचर की | जी हाँ, कल पौष अमावस्या यानी पच्चीस दिसम्बर को अपराह्न 3:46 के लगभग
24 दिसम्बर 2019
26 दिसम्बर 2019
डॉ दिनेश शर्माने आज ग्रहण से डरने वालों के लिए बड़ा ही सारगर्भित लेख लिखा है जो हम यहाँप्रस्तुत कर रहे हैं | हम जानते हैं अपने लाभ हानि से डरने वाले लोग ग्रहण केअंधविश्वास से बाहर नहीं निकल सकते । लेकिन विश्वास कीजिये ये खूबसूरत खगोलीय घटनाडरने के लिए नहीं है, बल्कि इसे देखकर इसके सौन्दर्य का सम्मान
26 दिसम्बर 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x