मौन के रुप अनेक

07 जनवरी 2020   |  शिल्पा रोंघे   (4988 बार पढ़ा जा चुका है)

एक ही मौन के देखो कितने रूप.

कभी ध्यान है,

कभी निद्रा है मौन,

कभी उपासना है मौन,

कभी भोर

तो कभी रात का काला सन्नाटा है मौन,

ना पूरा "हां" ना पूरा "ना"

है मौन.

ना पूरा है ना अधूरा है

सचमुच एक रहस्य ही है मौन.


शिल्पा रोंघे

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सच में अच्छी पंक्तियाँ

धन्यवाद

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