मौन के रुप अनेक

07 जनवरी 2020   |  शिल्पा रोंघे   (4996 बार पढ़ा जा चुका है)

एक ही मौन के देखो कितने रूप.

कभी ध्यान है,

कभी निद्रा है मौन,

कभी उपासना है मौन,

कभी भोर

तो कभी रात का काला सन्नाटा है मौन,

ना पूरा "हां" ना पूरा "ना"

है मौन.

ना पूरा है ना अधूरा है

सचमुच एक रहस्य ही है मौन.


शिल्पा रोंघे

अगला लेख: अलविदा 2019



सच में अच्छी पंक्तियाँ

धन्यवाद

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
09 जनवरी 2020
रॉक गार्डन पर कविता- फ़र्क बस नज़रिये का था.टूटी हुई चीज़ समझकर बेज़ान मान लिया गया.इक शख़्स ने जोड़ जोड़कर मुझे खूबसूरत बागीचा बना लिया.शिल्पा रोंघे
09 जनवरी 2020
30 दिसम्बर 2019
नू
वहीं खड़े है वृक्ष सभी तनकर.वहीं खिल रहे है फूल सुंगध फैलाकर.सदियों से वहीं खड़े पर्वत विशाल.उसी समुद्र में जाकर मिल रही तरंगिणी.उसी डाल पर बैठा है पक्षी घरौंदा बनाके,उसी नभ में उड़ रहा है पंख फैलाकर.कुछ नहीं बदलता नवीन वर्ष के साथ हां बस संकल्प निश्चित ही हो जाते है दृढ़.बीते वर्ष में मिली सीखें मा
30 दिसम्बर 2019
11 जनवरी 2020
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves></w:TrackMoves> <w:TrackFormatting></w:Tr
11 जनवरी 2020
24 दिसम्बर 2019
“चकाचौंध” पत्रिका अपने प्रकाशन के चार साल पूरेकर चुकी थी, किसी को उम्मीद भी नहीं थी कि इस पत्रिका की बिक्री इतनी बढ़ जाएगी,अब ऐसे में सभी सदस्यों को मीटिंग में बुलाया गया और उनके योगदान के लिए बधाई दीगई। तभी मीटिंग में एक व्यक्ति ने पत्रिका
24 दिसम्बर 2019
08 जनवरी 2020
जी
ललचाती,सकुचाती,सीखाती,भरमाती,इठलाती,अंततः,सुस्ताती चीर निंद्रा!!जीवन यात्रा।अंदाज अलग,भागमभाग,चैन औ सुकूं की,अंततः,नींद उड़ाती!!जीवन यात्रा।अनुभव बांटे,भविष्य को बांचती,वर्तमान भुलाती,अंततः,मन भटकाती!!जीवन यात्रा।कहकहे लगाती कभी,मन कचोटती कभी,हंसाती कभी, रुलाती,अंततः,मिट्टी मिश्रित होती!!जीवन यात्रा।
08 जनवरी 2020
25 दिसम्बर 2019
मो
उसकी मोहोब्बत ने मुझे इस तरह जकड़ा हुआ था। में सुबह ये भूल जाता था कि रात में किस बात पर झगड़ा हुआ था।।
25 दिसम्बर 2019
09 जनवरी 2020
रॉक गार्डन पर कविता- फ़र्क बस नज़रिये का था.टूटी हुई चीज़ समझकर बेज़ान मान लिया गया.इक शख़्स ने जोड़ जोड़कर मुझे खूबसूरत बागीचा बना लिया.शिल्पा रोंघे
09 जनवरी 2020
28 दिसम्बर 2019
झड़ने दो पुराने पत्तों को.🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂गिरने दो फूलों को जमीं पर.🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼कि नए पत्ते फिर आएंगे शाखों पर.🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿कि नए फूल फिर उगेंगे डाली पर.🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹ताकेंगे आसमान की ओर.🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴गिरने से मत डरो, झड़ने से ना डरो.बीज भी जमीन में गिरकर ही पौधे
28 दिसम्बर 2019
06 जनवरी 2020
ग़
फना करके कई सपने मेरा किरदार ज़िंदा है।।कहानी में महज अब तो मेरा यह प्यार ज़िंदा है।। गिरेबाँ तक किसी के हाथ को आने नहीं दूंगा। तुझे किस बात का डर है तेरा ये यार ज़िंदा है।।किसी को दोष क्या दूं मै मुकद्दर है यही मेरा। कि अपना घर जला करके मेरा फनकार ज़िंदा है।।
06 जनवरी 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x