'माया तेरे तीन नाम- चरती, चरता और श्री चरत राम' - दिनेश डॉक्टर

08 जनवरी 2020   |  दिनेश डॉक्टर   (446 बार पढ़ा जा चुका है)

'माया तेरे तीन नाम- चरती, चरता और श्री चरत राम'  - दिनेश डॉक्टर

कुछ भी कह लो सुन लो या पढ़ लो पर सच्चाई तो यही है कि ज्यादातर लोग अक्ल के बजाय पैसे और शक्ल से न चाहते हुए भी प्रभावित हो ही जाते हैं । किसी के पास महंगी गाड़ी देखी तो इंप्रेस हो गए , किसी की शक्ल फिल्मी हीरो हीरोइन जैसी नज़र आयी तो इम्प्रेस हो गए । किसी स्वामी जी या बाबा जी का फाइव स्टार जैसा भव्य आश्रम देखा तो श्रद्धा में डूब गए और सादगी से रहने वाले किसी विद्वान संत को देख कर भी अनदेखा कर दिया । बाबा लोग भी आम जनों की इस मूर्खता को पहचान कर सोने की मोटी चैनें पहनने लगे है, मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू की सवारी करने लगे है और शाही शानोशौकत से सजे आश्रमनुमा बंगलो में शिफ्ट हो गए हैं । भक्त लोग बाबा जी के ऐश्वर्य से धन्य होकर आंख मूंद कर फिल्मी गानों की धुन पर बने भजनों की ताल पर डोलने लगे हैं ।

खुद को शिव का अवतार प्रसिद्ध करने वाले नित्यानंद के किस्से से तो आप सब वाकिफ ही होंगे - अरे वही जिसकी साउथ की फिल्मी हीरोइन के साथ सेक्स सीडी वाइरल हुई थी और जिसने हाल ही में एक छोटा सा द्वीप खरीद कर अपना पचास आदमियों का 'देश' बसाया है । न्यूयोर्क में एक मित्र इसके बड़े भक्त थे और जब मैं उनके घर ठहरा हुआ था तो ये अपने पूरे लाव लश्कर के साथ वहां आया । मित्र और उसकी पत्नी - दोनो इसके चरणों में लेट गए और उन दोनों को बहुत बुरा लगा क्योंकि मैंने इसको बैठे बैठे दूर से ही प्रणाम कर दिया । बाद में मैंने उन्हें समझाया भी कि यह आदमी टोटल फ्राड है । पर वे दोनों इसके भव्य ग्लैमर से इतने प्रभावित थे कि मुझसे ही नाराज़ हो गए । जब इसकी पोल खुली और सेक्स टेप वाइरल हुई तो इन पति पत्नी की हालत देखने लायक थी ।

किस्सा बहुत पुराना है पर आज भी प्रासंगिक है । अष्टावक्र एक बहुत पहुंचे हुए , विलक्षण और ज्ञानवान महाविद्वान थे पर जैसा नाम से ही विदित है - गर्भ में ही पिता के शाप के कारण उनका शरीर आठ स्थानों से टेढ़ा हो गया था । अष्टावक्र गीता आज भी अद्वैत वेदांत के विद्यार्थियों के लिए गागर में सागर जैसी महान कृति है । जब अष्टावक्र महाराजा जनक के दरबार में 'बंदी' से शास्त्रार्थ करने पहुंचे तो भरी सभा ने उनका बहुत अपमान किया । एक तो अष्टावक्र की उम्र कम थी दूसरे शरीर अजीब तरह से टेढ़ा मेढा था साथ ही 'बन्दी' कभी भी न हारने वाला प्रमुख दरबारी विद्वान था । अपमान से परेशान हुए बिना अष्टावक्र ने कहा कि महाराज जनक के दरबार में सिर्फ चर्मकारों को देखकर उसे भारी निराशा हुई है । जब जनक ने सब दरबारियों को 'चर्मकार' कहने की वजह पूछी तो अष्टावक्र ने कहा कि जो लोग बिना किसी की विद्या या गुण समझे सिर्फ शरीर का चर्म देखकर उसका सम्मान या अपमान करें तो वे चर्मकार नही तो और क्या है ? जब अष्टावक्र ने कम उम्र में ही इतने अपराजेय विद्वान को शास्त्रार्थ में आसानी से हरा दिया तब लोग उनकी विद्वत्ता का लोहा मानने को मजबूर हुए ।

ऐसे ही बहुत से किस्से या वृतांत हर धर्म, देश, और सामाजिक सभ्यता की पुस्तकों में पढ़ने को मिल जाएंगे जिनका सार होगा कि माया तेरे तीन नाम चरती - चरता और श्री चरत राम । चरती की कहानी तो आपने सुनी ही होगी । गांव का गरीब हल जोतने वाला किसान था । नाम तो उसका चरत राम था पर गरीबी की वजह से सब गांव वाले उसे हल्के में लेकर चरती चरती ही कहते थे । एक दिन किस्मत ने पलटी खाई और उसे हल जोतते वक़्त सोने की अशर्फियों से भरा एक मटका खेत की मेंड़ के पास मिल गया । जैसे ही उसके दिन फिरे और उसने अपनी कच्ची फूस की झोपड़ी की जगह पक्का दोमंजिला मकान बनवाना शुरू किया तो गांव के लोगो ने उसे चरती से चरता जी कहना शुरू कर दिया । कुछ दिन बाद जब उसने एक ऊंची तगड़ी घोड़ी और दोनाली बंदूक खरीद ली और सरपंच का चुनाव लड़ा तो गाँव के वही लोग उसे श्री चरत राम जी कहने लगे । चुनाव जीतने पर जब उसने पहला भाषण दिया तो सिर्फ यही कहा 'माया तेरे तीन नाम- चरती, चरता और श्री चरत राम' ।

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वाह... वास्तव में प्रासंगिक...

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