बामपंथी

10 जनवरी 2020   |   भरत का भारत   (382 बार पढ़ा जा चुका है)

बामपंथी


प्रायः यह शब्द सुनकर अधिकतर रूस या चीन या कोरिया की छवि हमारे मन-मस्तिष्कीय रेखाओं पर अंकित होती है वस्तुतः भारत भूमि से इस शब्द का जुड़ाव एक अलग प्रसार-प्रचार को परिभाषित करता है |
{ हिंन्दु विरोध } { पंथ निर्पेक्ष छवि } { इस्लामिक ईसाई शक्तियाँ } = राष्ट्रदोही अस्तित्व

पढ़ने में अजीब अवश्य लग सकता है पंरतु सत्य बहुत सामान्य व सजग होता है | संसार में कहीं भी बामपंथी राष्ट्रवाद के विरुद्ध नही पाए गए हाँ विचार व परिस्तिथियाँ अलग अलग हो सकती हैं परंतु राष्ट्भावना के विपरीत नही |

बामपंथी शब्द व उससे जुड़े दल ; व्यक्ति-विशेष ; संगठन इत्यादि सभी का सिर्फ एक एजेंडा रहा है आगे भी रहेगा कि सनातन भारतीय सभ्यता व संस्कृति का पूर्णपतन व हिन्दू जनमानस का मानसिक व वैचारिक कुविमोचन 1200 वर्षो का शिक्षा में प्रचलित इतिहास क्या है ? इन्ही बामपंथी इतिहासकारो की देंन | वैदिक ग्रंथो व इतिहास से जुड़ी भ्रांतियां कहाँ से प्रसारित हुई ? इन्ही बामपंथियों की देंन | अधिकतर हिंदू जनमानस स्वयं को सेक्युलर दिखाना पसंद करता है कारण अनेको हैं इसके पीछे तो प्रायः बामपंथी इसी आधार पर अपनी जड़े जमाये ऊपरी भागों से जिहादी व मिशनरीज़ शक्तियों को पूणसमर्थन देते रहे है आगे भी देते रहेंगे |

वर्तमान में मुख्य चुनौती अर्बन नक्सलस है अगला युद्ध यही है ! जागो तो अच्छा है अन्यथा सब सच्चा है !
वंदे मातरम जय माँ भारती

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