जितना भी घूम लो - यूरोप से मन नही भरता : दिनेश डॉक्टर

12 जनवरी 2020   |  दिनेश डॉक्टर   (483 बार पढ़ा जा चुका है)

जितना भी घूम लो - यूरोप से मन नही भरता : दिनेश डॉक्टर

प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे खूबसूरत वीसबादन शहर के प्राचीन गिरजे घरों , संडे मार्केट, पास ही बहती राइन नदी और थोड़ी ही दूर पर हरे भरे पर्वतों की श्रंखला, बेहतरीन बियर और सुस्वादु भोजन परोसते रेस्तराओं के खूबसूरत अनुभव डॉक्टर भतीजे के खुशदिल परिवार के साथ हुए । मस्तीभरा वीकेंड बिताकर वापस पेरिस लौट आया ।

पेरिस में काम उम्मीद से पहले ही समाप्त हो गया। मन में आया कि अभी समय है और मौका भी है और पैसों की भी समस्या नही है तो लगे हाथ यायावरी का और आनन्द ले लिया जाए । तो एक सुबह फ्रांसीसी मित्र फिलिप के घर से ट्रेन पकड़ने पेरिस के गार दी ईस्ट यानि के पूर्वी पेरिस स्टेशन के लिए निकल पड़ा । सुबह के साढ़े चार बजे थे । सर्दी तो थी पर ज्यादा नही । पास ही ट्यूब स्टेशन था । वहीं से लोकल ट्रेन लेकर गार दी ईस्ट स्टेशन पर पहुंचना था । ऐसी यात्राओं में अगर बहुत ही ज़रूरी न हो तो टेक्सी वगैरा लेने में सारा रोमांच ही खत्म हो जाता है ।

अंडर ग्राउंड ट्यूब स्टेशन का दरवाजा बंद था । यह अनपेक्षित था क्योंकि मेरे विचार से पेरिस में रात भर ट्यूब ट्रेन चलती थी । फिलिप को फोन कर पुनः परेशान नही करना चाहता था । तो 'गूगलम शरणम गच्छामि' मन्त्र का जाप किया और तुरन्त ज्ञान का प्रकाश हुआ कि उस स्टेशन से पहली ट्रेन सवा पांच बजे है । शायद इसीलिए स्टेशन के सड़क के दोनों किनारे के गेट्स बन्द थे । पेरिस इस वक़्त बिल्कुल शांत था । जिस इलाके में मित्र फिलिप का घर है वो वैसे भी पेरिस का आउट स्कर्ट है । पांच बजे काले सूट टाई में प्रौढ़ावस्था का एक व्यक्ति हाथ में काफी का गिलास लिए धीरे धीरे बड़ी फुर्सत में चलता हुआ आया । मैंने सोचा कि ये भी मेरी ही तरह कोई यात्री होगा । पर वो स्टेशन अटेंडेंट था । उसने ताला खोल कर दरवाजे के शटर का बटन दबाया । मैंने उसे प्रणाम किया और पीछे पीछे स्टेशन में दाखिल हो गया । एक घंटे बाद साल्जबर्ग की तरफ जाने वाली ट्रेन में खिड़की वाली सीट पर बैठा पौ फटती देख रहा था और ट्रेन 290 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से भाग रही थी । मेरा मन बहुत प्रसन्न था कि मैं पुनः अपने स्वभाव में उतर रहा हूँ ।

पेरिस से साल्जबर्ग करीब एक हज़ार किलोमीटर दूर है और ट्रेन द्वारा स्टुटगार्ट होते हुए यह यात्रा सवा सात घंटे में पूरी होनी थी । पेरिस से स्टुटगार्ट छह सौ पचास किलोमीटर दूर है और इस यात्रा में तीन घंटे दस मिनट लगते हैं । स्टुटगार्ट पहुंच कर नौ मिनट के अंतराल पर वहां से साल्जबर्ग के लिए दूसरी धीमी गति की ट्रेन लेनी थी और अगली तीन सौ पचास किलोमीटर की यात्रा को चार घंटे लगने थे । यूरोप में अगर सब सामान्य हो तो नौ मिनट का अंतराल ट्रेन बदलने के लिए ठीक ठाक होता है । पर रास्ते में ट्रेन ट्रेक में कोई तकनीकी कमी की वजह से ट्रेन खड़ी हो गयी । थोड़ी देर बाद आभास हो ही गया कि स्टुटगार्ट से साल्जबर्ग वाली ट्रेन अब पकड़ना मुश्किल है । ट्रेन अटेंडेंट पास ही के ही डिब्बे में मौजूद था । सौभाग्य से उसे थोड़ी बहुत अंग्रेजी आती थी । उसने तुरंत ट्रेन शेड्यूल चेक कर बताया कि फिक्र की कोई बात नही।अब तक ये ट्रेन आधा घंटा लेट हो चुकी थी । उसने मेरे टिकट पर नोटिंग कर दी और बताया कि इस ट्रेन के पहुचने के पच्चीस मिनट बाद म्यूनिख की ट्रेन ले लूँ और म्यूनिख से साल्जबर्ग की ट्रेन फिर अगले आधा घंटे बाद मिल जाएगी । वैसा ही किया ।

म्यूनिख से साल्जबर्ग का ज्यादातर रास्ता खूबसूरत हरी भरी और ऊपर जाकर बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं के बीच से गुजरता है । हालांकि ट्रेन लेट होने के चक्कर में दो घंटे देर से साल्जबर्ग पहुंचा पर किसे परवाह देर सबेर की जब मन घुमक्कड़ हो ही गया हो । फोन में गूगल मैप था ही तो जैसे ही ट्रेन साल्जबर्ग पहुंची तो गूगल गुरु ने बताया कि जिस होटल में मेरी बुकिंग थी वो सिर्फ पंद्रह मिनट पैदल की दूरी पर है । बैक पैक कमर पर लादा और चल पड़ा । गूगल मैप में सारा रास्ता साफ नजर आ ही रहा था । जैसे ही स्टेशन से बाहर निकला तो सामने बर्फ से ढके खूबसूरत पहाड़ों के दर्शन होते ही मन प्रसन्न हो उठा । आधे रास्ते पहुंचा तो बांयी तरफ सड़क के किनारे एक टेवर्न नज़र आया । शाम के चार साढ़े चार का वक्त होगा । अंदर लोग कुर्सियों पर जमे हुए बियर का लुत्फ ले रहे थे । एक सज्जन कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रहे थे । मेरे अंदर घुसते ही उसने मुझे अपनी टेबल पर आमंत्रित कर लिया । में भी मस्ती में चला गया । बाते शुरू हो गयी । मैंने अपने बारे में बताया कि भारत से हूँ और सीधे स्टेशन से उतर कर चला आ रहा हूँ और होटल की तरफ जा रहा हूँ । मैंने जल्दी ही महसूस कर लिया कि हुज़ूर अच्छे खासे सुरूर में हैं । इससे पहले कि मैं कुछ ऑर्डर करता, भाई साहब ने मेरे लिए भी बियर मंगा दी । फिर साहब धीरे धीरे खुले । पता चला कि शादी टूटने के 'गम' को सेलिब्रेट कर रहे है और दोपहर से लगातार पी रहे हैं । जल्दी जल्दी बियर खत्म की, बिल पे किया और मौका मिलते ही खिसक लिया और होटल पहुंच गया । कमरा तो खैर अल्टास्टड होफव्रट होटल में बुक था ही ।

अगला लेख: हेलब्रुन्न पैलेस और पानी का जादू : दिनेश डॉक्टर



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
13 जनवरी 2020
वैसे तो साल्जबर्ग हमेशा से ही बेहद खूबसूरत शहर रहा है पर हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री जूली एंड्रयूज़ की 1965 में रिलीज हुई सुपर हिट फिल्म साउंड ऑफ म्यूजिक , के बाद और भी प्रसिद्ध हो गया । फ़िल्म की अधिकांश शूटिंग इसी शहर में हुई थी और 55 साल बाद आज भी बहुत सी टूरिस्ट कम्पनियां 'साउंड ऑफ म्यूजिक' टूर पर
13 जनवरी 2020
08 जनवरी 2020
कुछ भी कह लो सुन लो या पढ़ लो पर सच्चाई तो यही है कि ज्यादातर लोग अक्ल के बजाय पैसे और शक्ल से न चाहते हुए भी प्रभावित हो ही जाते हैं । किसी के पास महंगी गाड़ी देखी तो इंप्रेस हो गए , किसी की शक्ल फिल्मी हीरो हीरोइन जैसी नज़र आयी तो इम्प्रेस हो गए । किसी स्वामी जी या बाबा जी का फाइव स्टार जैसा भव्य आश्
08 जनवरी 2020
30 दिसम्बर 2019
सामने झक्क सफेद कलफदार कुर्ते पायजामें नेता जी बैठे थे । इंडिया किंग्स की सिगरेट की डब्बी सामने मेज पर पड़ी थी । शाम का वक्त था । स्कॉच की बोतल आधी हो चुकी थी । वो बोल रहे थे और मैं सुन रहा था । वो कह रहे थे कि उन्हें देश के लिए बहुत काम करना है । युवा पीढ़ी को नई दिशा देनी है । कौमी एकता मज़बूत करनी
30 दिसम्बर 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x