मिराबेल पैलेस का महिला वायलन बैंड - दिनेश डॉक्टर

19 जनवरी 2020   |  दिनेश डॉक्टर   (475 बार पढ़ा जा चुका है)

मिराबेल पैलेस का महिला वायलन बैंड - दिनेश डॉक्टर

पिछले वृतांत से आगे

पहाड़ी से नीचे उतर कर पैलेस के परिसर से वापस बस स्टैंड पर आकर पच्चीस नम्बर की बस पकड़ कर साल्जबर्ग शहर के सेंटर में उतर गया । सुबह का मुफ्त का नाश्ता कभी का पच चुका था और अच्छी खासी भूख लग आयी थी । पश्चिमी देशों में रेस्तरांओं में खाना खाना आपके टूरिस्टिक बजट को अच्छा खासा हल्का कर सकता है । ऐसे में किसी साफ सुथरी जगह से स्ट्रीट फूड खरीद लें । पानी की वही छोटी से बोतल किसी रेस्तरा में दो यूरो यानी कि एक सौ साठ रुपये की मिलेगी और यदि आप किसी फ़ूड स्टोर में गए तो सिर्फ तीस पैंतीस सेंट यानी बीस या पच्चीस रुपये की । टूरिज्म करते वक़्त मै कंजूसी की हद तक खासा किफायती हो जाता हूँ । उसकी वजह है कि ज्यादा पैसा में देखने वाले स्थानों के टिकटों, यात्रा भाड़े, किसी विशेष प्रोग्राम जैसे ओपेरा या संगीत की बड़ी प्रस्तुति पर व्यय करने के लिए बचाता रहता हूँ । ऐसे कार्यक्रमों की टिकटें कई बार बहुत महंगी भी हो सकती हैं । एक व्यक्ति की एंट्री टिकट सौ यूरो यानी सात हजार पांच सौ रुपये कोई बड़ी बात नही।

बस से उतरा तो पास ही फ़ूड स्टोर था । एक क्रोसान, चीज़ और एक पानी की बोतल खरीदी और पास ही मिराबेल गार्डन में जाकर बैठ गया । सामने ही मिराबेल पैलेस था । सोचा लगे हाथ उसे भी देख लिया जाए । पैलेस तो भव्य था पर अधिकांश कमरों में सरकारी दफ्तर शिफ्ट हो गए थे । ऊपर के तल पर प्राचीन समय का एक ऑडिटोरियम था । उसे देखने गया तो पता लगा कि आठ विशिष्ट आर्टिस्ट आज शाम मोजार्ट की सिम्फनी बजा रहे हैं । चालीस यूरो की टिकट थी । फ़ौरन खरीद ली । पैलेस में कुछ और खास देखने लायक नही था । तीन घंटे बाद शाम साढ़े सात बजे से शो था तो सोचा वापस होटल चल कर आराम किया जाए । बादल घिर रहे थे और हल्की हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गयी थी । यूरोप की यात्रा में साथ सामान ले जाने की लिस्ट में आम जुखाम बुखार खांसी की दवाओं के साथ साथ, एक आल वेदर जैकेट और अच्छी क्वालिटी का एक फोल्डिंग छाता ज़रूर शामिल कर लेना चाहिए । वजह सीधी साफ  है , विदेशों में दवाएं और इलाज बहुत महंगे हैं, डॉक्टर से अपॉइंटमेंट भी जल्दी से नही मिलता और मौसम का कोई भरोसा नही कि कब बारिश शुरू हो जाये और मौसम बिना पूर्व चेतावनी के करवट ले ले ।


मिराबेल पैलेस ऑडिटोरियम होटल से बीस पच्चीस मिनट की पैदल दूरी पर था । जाने के भी दो रास्ते थे । एक बाजार के बीच से निकल कर सीधा और दूसरा साल्ज़श नदी के किनारे वाली सड़क से । मैं नदी वाला रास्ता लेकर, जो थोड़ा लम्बा था, चल पड़ा । नदी के किनारे पब्स में लाइव म्यूजिक की धुन पर बीयर और वाइन के दौर चल रहे थे । बारिश की हल्की फुहारों से बेखबर लोग बतिया रहे थे, ठहाके लगा रहे थे, बांयी तरफ साल्ज़श नदी में तैरते लट्टुओं से झिलमिलाते बड़े बड़े टूरिस्ट बज़रों की खुली डेक पर भी ऐसे ही दृश्य थे । एक तैरते बजरे पर कोई बड़ी मीठी आवाज में जर्मन भाषा में गाना गा रहा था । मैं मस्ती में सब दुख चिंताएं भूल कर लहराता चला जा रहा था । हालांकि मेरे स्पोर्ट शूज़ के सोल वाजिब थे तो भी गीले काले कोबल स्टोन की नदी किनारे की पगडंडी पर फिसलने के भय से धीरे धीरे पैर जमाते हुए ही चल रहा था।  


सामने ही हेलब्रुन पुल पर ट्रैफिक घर लौटने वालों की गहमा गहमी में कुछ ज्यादा था । वहां से आगे कुछ दूरी पर लव लॉक ब्रिज यानी कि मुहब्बत को तालों में बांधने वाला पुल नज़र आ गया । ऐसी मान्यता थी कि उस पुल की रेलिंग पर यदि प्रेमी प्रेमिका अपना नाम लिखकर ताला लगा कर चाबी नदी में फेंक दे, तो बंधन अटूट हो जाता है । पुल खासा पुराना है और सिर्फ पैदल चलने वालों के लिए ही है । दोनों तरफ की रेलिंग्स पर रंग बिरंगे पानी में भीगे हजारों ताले लटके हुए थे । हर साल शहर का प्राधिकरण मशीनों से हज़ारों तालों को काट कर हटा देता है पर साल पूरा होते होते वापस दुगने ताले लटक जाते हैं । 


बारिश रुक गयी थी। सड़क के ही किनारे एक चाइनीज़ ढाबे पर जल्दी से खाने की औपचारिकता पूरी करके मिराबेल पैलेस ऑडिटोरियम पहुंच गया । हाल खचाखच भरा हुआ था । किस्मत से मुझे सीट अच्छी मिल गयी थी । स्टेज के पास ही आगे से तीसरी कतार में । समय पर प्रस्तुति शुरू हो गयी । आठ महिलाओं की वायलन पर मोजार्ट की विभिन्न सिम्फनी या  संगीत सरंचनाओं की संगत थी । पाश्चात्य संगीत से वैसे तो मैं खासा अनभिज्ञ हूँ पर अच्छे बुरे संगीत और लयबद्ध सुरों की थोड़ी बहुत समझ मुझे है । एक के बाद एक मोजार्ट की भिन्न सिम्फनीज़ को जिस तरह आठों महिला संगीतकारों ने परफेक्ट संगत में वायलन पर बजाया वो वाकई बहुत प्रभावशाली था । मोजार्ट की सिम्फनीज़ मन की भावनाओं को जिस तरह बांध कर उनसे खिलवाड़ करती है, आरोह और अवरोह के माध्यम से बार बार मन को शांत और आंदोलित करती है, उसके अनुभव से छोटी सी उम्र में ही विश्व प्रसिद्ध हुए इस महान कलाकार के प्रति मन विस्मय और सम्मान से भर जाता है । संसार की अनेक विस्मयकारी विलक्षण प्रतिभाओं की तरह ही, मात्र ग्यारह बरस की कच्ची उम्र में अपना पहला कन्सर्ट करने वाला वुल्फगैंग मोजार्ट भी, मात्र पैंतीस बरस की छोटी उम्र में सैंकड़ो अलौकिक और प्रभावशाली सिम्फनीज़ रच कर विदा हो गया ।


बीच बीच में भी और कन्सर्ट समाप्ति के बाद भी सभी लोग बहुत देर तक तालियां बजा कर कलाकारों का अभिवादन करते रहे । पश्चिमी देशों में सभी कन्सर्टस और कार्यक्रमों में देर तक ताली बजा कर कलाकारों का सम्मान करने की बहुत विशिष्ट और स्वस्थ परम्परा है । कार्यक्रमों की समाप्ति के बाद भी कई बार कलाकारों को दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अभिवादन स्वीकार करने आना ही पड़ता है । 


मिराबेल पैलेस ऑडिटोरियम से बाहर निकला तो अच्छी खासी ठंड बढ़ गयी थी । बादल छंट चुके थे और द्वादशी का चांद स्वच्छ आकाश में शान्त स्मिता के साथ स्थिर था । तेज़ कदमों से होटल आकर सो रहा ।

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