नादान उठो।

25 जनवरी 2020   |  जानू नागर   (380 बार पढ़ा जा चुका है)

नादान उठो

सोये हुए को जगाना आसान है, अलसाए हुए को उठाना मुश्किल है। बोलियां चलती है तो लोग कहते है बकवास है, गोलियां चलती है तो कहते इनका दिल मर गया है। मांगते है तो, भिखारी कहते है। अगर छीनने में उतर आए, तो हैवान कहते है। पढ़ते नही तो अनपढ़ है, पढ़े लिखे तो बेरोजगार, मेहनत से कमाए तो मजदूर , मिल गई सरकारी नौकरी या बन गए नेता तो खून चूस कर कमाए। काम के प्रति अलाल बन गए। किसान के पास फसल तो दाम गिर गए , जमा ब्यापारी के पास तो भाव आसमान छूने लगे। कब तक नादान बने रहोगे? जागों उठो समाज को नही। अपने असितत्व को बचाओ वरना रजाई में नही सड़क के किनारे दिखोगे। मौत भी पास नही आयेगी जीने की दुआएं मांगोगे।

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