आईयूआई की प्रक्रिया के बारे में जाने !

27 जनवरी 2020   |  बबीता राणा   (6564 बार पढ़ा जा चुका है)

आईयूआई ट्रीटमेंट जिसे कृत्रिम गर्भधारण भी कहा जाता है यह प्रजनन उपचार का एक प्रकार है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें पुरुष शुक्राणुओं को प्लास्टिक की पतली कैथेटर ट्यूब के जरिए महिला की ओवेरी में इन्जेक्ट किया जाता है। इस प्रक्रिया को करते वक्त डॉक्टर इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि इसे महिला के ओव्यूलेशन के समय पर किया जाए। इस प्रक्रिया के लिए कुछ मिनट लगते हैं और इससे असुविधा नहीं होती है।


आईयूआई का उपचार कराने की सलाह निम्न स्थितियों में दी जा सकती है : -

  • पुरुष बांझपन
  • प्रतिकूल ग्रीवा बलगम
  • अस्पष्टीकृत बांझपन
  • यदि प्रजनन दवाओं के साथ उपचार सफल नहीं है।

नोट : अगर फैलोपियन ट्यूब में किसी तरह की रुकावट का होना, गंभीर एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis), यदि पहले कभी पेडू का संक्रमण हुआ हो तो इन स्थितियों में IUI की सलाह नहीं दी जाती है।


आईये अब जानते हैं आईयूआई प्रक्रिया के बारे में !


आईयूआई प्रक्रिया वैसे तो काफी आसान होती है लेकिन डॉक्टर्स इसे संवेदनशील भी जरूरत कहते हैं। इस प्रक्रिया में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि शुक्राणुओं की लैब में सही तरह से जांच हो। क्योंकि इस प्रक्रिया में शुक्राणुओं को साफ कर गर्भाश्य छिद्र (utetrine cavity) में इंजेक्ट करना होता है। आईयूआई प्रक्रिया में डॉक्टर पुरुष के सीमेन का सैंपल लेते हैं। इसके बाद इस सीमेन को लैब में ले जाकर साफ किया जाता है। यदि आपके पार्टनर आईयूआई वाले दिन आपके साथ नहीं रह सकते तो वह एक दिन पहले भी डॉक्टर को सीमेन दे सकते हैं। इस स्थिति में डॉक्टर सीमन को इस तरह फ्रिज़ रखते हैं जिससे शुक्राणु अगले एक दिन तक एक्टिव रहें। हालांकि यह तरीका डॉक्टर पर निर्भर करता है, क्योंकि इसके लिए जिस तकनीक की ज़रूरत होती उसका डॉक्टर के पास होना जरूरी है। यदि किसी कारणवश आपके पति के स्पर्म उस गुणवत्ता के नहीं है जो गर्भधारण के लिए आवश्यक है तो ऐसी स्थिति में आप स्पर्म डोनर की भी मदद ले सकते हैं। स्पर्म डोनर के साथ भी वही प्रक्रिया होती है। यानि कि डोनर शुक्राणुओं को भी लैब में पहले साफ किया जाता है। फिर शुक्रणुओं को गर्भाश्य छिद्र (यूटीरिन कैविटी) में इंजेक्ट किया जाता है।(जाने भारत में IUI के खर्च के बारे में !)

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