वाह विएना ! वाह !!

29 जनवरी 2020   |  दिनेश डॉक्टर   (404 बार पढ़ा जा चुका है)

वाह विएना ! वाह !!

श्वेडन प्लाटज़ बड़ा स्टेशन था । यहां से मुख्य ट्रेन स्टेशन , बस स्टेशन और हवाई अड्डे के लिए अंडर ग्राउण्ड ट्यूब रेलवे के नेटवर्क थे । बगल में ही डेन्यूब के किनारे छोटा सा नाव पोर्ट था जहां से हंगरी में बुडापेस्ट और स्लोवाकिया में ब्रात्सिलावा के लिए जेट बोट्स चलती थी । बुडापेस्ट पांच घंटे में और ब्रात्सिलावा अढ़ाई तीन घंटे में पहुंचा जा सकता था । 

शुक्रवार की शाम यानी कि वीकेंड की शाम थी और विएना छुट्टी के मूड में आ चुका था । श्वेडन प्लाटज़ पर बहुत गहमा गहमी थी । ट्राम से ही स्टीफेंसडॉम की ऊंची ऊंची मीनारें नज़र आ गयी थी । छोटे छोटे कियोस्क्स पर बियर और हॉट डॉग्स बिक रहे थे । आइसक्रीम के पार्लर्स पर लंबी लंबी लाइने लगी थी । रेस्तराओं के बाहर सजी कुर्सी मेजों पर सिगरेट के धुएं और ठहाकों के बीच शराब, वाइन, बियर, पिज़्जा, सेंडविचेज के दौर चल रहे थे । व्हाट्सएप पर जालन्धर से मित्र हरदीप ओबराय का फोन आ गया तो वीडियो चैट पर उसे भी इस मस्ती भरे माहौल में शामिल कर लिया और सब लाइव दिखाता रहा । 

बांयी तरफ मुड़ कर वो सड़क पकड़ ली जो सीधे स्टीफन्स डॉम की तरफ जाती थी । आइसक्रीम पार्लर्स, पब्स, रेस्तराओं और पैदल चलने वालो के बीच से निकलता हुआ खूब चौड़े और भव्य सेंट स्टीफन्स प्लाटज़ के स्क्वायर पर पहुंच गया । यहाँ तो कार्निवाल जैसा माहौल था । लम्बे ऊंचे घोड़े और खूबसूरत बग्घियां थी, रंग बिरंगे रिक्शे थे, क्लेरियट बजाने वाले स्ट्रीट म्यूजिशियन थे, सैंकड़ो की तादाद में नेपथ्य में उठते संगीत पर थिरक थिरक कर चलते लड़के लड़कियां, स्त्री पुरुष, बच्चे बूढ़े और उनके साथ चैन से नियंत्रित कुत्ते थे । जैसे कि एक बड़ा मेला जैसा लगा हुआ था । मेरे बांयी तरफ एक सौ सात मीटर ऊंची मीनारों वाला विशाल स्टीफन्सडॉम पूरी भव्यता के साथ खड़ा था।  लगभग नौ सौ बरस पहले तेईस सालों में पूरा हुआ स्टीफन्सडॉम, विएना की रोमन कैथोलिक परंपरा के आर्चबिशप का प्रतिष्ठित मठ है और पिछली नौ शताब्दियों से विएना का सबसे महत्वपूर्ण लैंडमार्क भी । 

इधर उधर घूमता जायजा ले ही रहा था कि सेंट स्टीफन्स केथेड्रेल के भारी भरकम घंटो की आवाज चारों तरफ गूंजने लगी । विशाल नक्काशीदार आरचेस के नीचे बने बड़े दरवाजे से भीतर दाखिल हुआ तो हाल की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई और उसकी कलात्मक भव्यता को देख कर सही मायनों में हक्का बक्का रह गया । सामने दूर आल्टर पर मुख्य पादरी जर्मन भाषा में कोई धार्मिक संदेश पढ़ रहे थे । उनके साथ पांच और सहायक पादरी भी मौजूद थे । बीच बीच में दांयी तरफ एक ऊंचे पाइप ऑर्गन से कर्ण प्रिय स्वर लहरियां उठती थी । तरतीब से बिछी ठोस महंगी लकड़ी की बेहद पुरानी पर कलात्मक बेंचो पर सैंकड़ों आस्थावान चुपचाप शांति और धैर्य से बैठे दत्तचित्त हो धार्मिक संदेश सुन रहे थे । न कोई किसी से बतिया रहा था और न ही किसी के हाथ में कोई सेल फोन ही था । धीरे धीरे चलकर में भी पिछली वाली बेंच पर खाली स्थान देख कर बैठ गया । पाइप ऑर्गन की ह्रदय को गहरे तक छूने वाली उठती गिरती स्वर लहरियों पर लगभग एक घंटे पूरा धर्म संदेश और कुछ धार्मिक रिचुअल्स चली । हालांकि सब जर्मन भाषा में था और मुझे कुछ भी समझ नही आया पर उस गरिमापूर्ण शांत माहौल की आध्यात्मिक कशिश ने मुझे लगातार बांध कर रक्खा और अंत तक उठ ही नहीं पाया । अंत में आशीर्वाद और प्रसाद वितरण की प्रक्रिया थी । मैं भी लाइन में लग गया । उपस्थित लोगों में न तो किसी को हड़बड़ी थी और न ही कोई अव्यवस्थित था । मेरा नम्बर आने पर पादरी ने जर्मन भाषा में कुछ वाक्य बोलकर मेरे मुंह में एक गोल पतला ब्रेड का फीका टुकड़ा रख दिया । थोड़ी देर में वो स्वयम ही मुंह में घुल गया । प्रार्थना समाप्त हो चुकी थी । पाइप ऑर्गन बजाने वाले ने ऑर्गन के की बोर्ड को अंदर खिसका कर लॉक कर दिया । बहुत देर तक घूम घूम कर अंदर की पुरानी कलात्मक पेंटिंग्स, खिड़कियों के प्रसिद्ध और बेहतरीन ग्लास वर्क तथा क्रिश्चियन संतो की खूबसूरत मूर्तियों को निहारता रहा ।

बाहर आया तो भीड़ बढ़ गयी थी और मौज मस्ती करने वालों के हजूम ने स्टीफन्स प्लाटज़ स्क्वायर के चारों तरफ फैले रेस्तराओं के बाहर बिछी सब कुर्सियों पर कब्ज़ा जमा लिया था । परिवार बच्चों के साथ घोड़ा बग्घियों में सवारी का लुत्फ उठा रहे थे । बैटरी से चलने वाले रंगबिरंगे खूबसूरत रिक्शे भी शौकीन लोगों को विएना की पुरानी गलियों और स्क्वॉयर्स की सैर करवा रहे थे । देर रात तक इधर उधर घूमता रहा, फोटुएं खींचता रहा , महंगी ब्रांडेड दुकानों की विंडो शॉपिंग करता रहा । थक गया तो श्वेडन प्लाटज़ पर पहुंच वापस नम्बर 2 ट्राम पकड़कर इंन्न स्ट्रासे के स्टाप पर उतरकर कमरे में आ कर सो गया । 

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