आईवीएफ ट्रीटमेंट की प्रक्रिया से पहले महिलाओं के लिए किये जाने वाले टेस्ट

31 जनवरी 2020   |  बबीता राणा   (386 बार पढ़ा जा चुका है)

ivf

आईवीएफ ट्रीटमेंट की प्रक्रिया से पहले महिलाओं को टेस्ट, अलग-अलग जांच की जाती है और कई तरह के टेस्ट करवाए जाते हैं। करने की सलाह दी जाती है। जिससे आईवीएफ की प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की समस्या न हो और ट्रीटमेंट सफल रहे। बांझपन का निदान करने के लिए किए गए परीक्षणों को आमतौर पर प्री-स्क्रीनिंग परीक्षणों के रूप में जाना जाता है। आपके शारीरिक समस्या के बारे में पता चल जाने के बाद उसके आधार पर उपचार की योजना बनाई जाती है। आईवीएफ ट्रीटमेंट से पहले महिला और पुरुष दोनों के टेस्ट करवाए जाते हैं।

आईये जानते हैं उन टेस्ट के बारे में :-


महिलाओं के टेस्ट


फैलोपियन ट्यूब की जांच – प्राकृतिक गर्भधारण में फैलोपियन ट्यूब की सबसे अहम् भूमिका होती है। भ्रूण बनने की प्रक्रिया फैलोपियन ट्यूब में होती है इसलिए ट्यूब का सही स्थिति में और सुचारू होना आवश्यक होता है। ट्यूब में संक्रमण होने या किसी तरह का ब्लॉकेज होने पर गर्भधारण नहीं हो पाता है। महिलाओं में निःसंतानता के जितने भी मामले सामने आते हैं ज्यादातर में ट्यूब में ब्लॉकेज या विकार की समस्या होती है। आईवीएफ उपचार शुरू करने से पहले महिला की ट्यूब की जांच की जाती है।


हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी - एक एक्स-रे परीक्षण होता है, जिसमें गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब के माध्यम से डाई की एक छोटी मात्रा डालकर पता लगाया जाता है कि फॉलोपियन ट्यूब खुले हैं या फिर उनमें ब्लॉकेज है।


अण्डाशय में अण्डों की जांच – अण्डाशय की स्थिति जानने के लिए अण्डाशय का अल्ट्रासाउण्ड किया जाता है। अंडों की संख्या और गुणवत्ता को जानने के लिए माहवारी के पहले कुछ दिनों के दौरान रक्त में कुछ हॉर्मोन की मात्रा की जांच की जाती है जिसमें फाॅलीकल स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन , एन्ट्रल फॉलिकल काउण्ट और एंटीमुलेरियन हॉर्मोन शामिल हैं।


गर्भाशय की जांच – आईवीएफ शुरू करने से पहले डाक्टर गर्भाशय सही तरीके कार्य कर रहा है या नहीं ये जांचते हैं। गर्भाशय की सोनोग्राफी की जाती है क्योंकि भ्रूण बनने के बाद उसे गर्भाशय में ही विकसित

होकर जन्म लेना होता है।


खून की जांच – महिला में फर्टिलिटी की अन्य जांचों के साथ रक्त की कुछ जांचे की जाती है जैसे जिसमें एचआईवी और अन्य संक्रमण, प्रोलेक्टिन, थाईरोइड आदि देखा जाता है।


पुरूषों के टेस्ट


पुरूषों के लिए केवल सीमेन की जांच किया जाता है, जिसमें शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और आकार की जांच की जा सके।


पुरूषों की तुलना में महिला के ज्यादा टेस्ट किये जाते हैं क्योंकि गर्भधारण के लिए महिला में बहुत सारे अन्य कारक भी मायने रखते हैं।(भारत में आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए हॉस्पिटल )


निःसंतानता के उपचार से पूर्व सिर्फ इतनी ही जांचे आवश्यक हैं । सामान्यतया इन जांचों से मरीज की निःसंतानता का कारण सामने आ जाता है और ईलाज शुरू किया जा सकता है।

अगला लेख: आईवीएफ व टेस्ट ट्यूब बेबी क्या है ? आईवीएफ की जरूरत किसे होती है ?



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