Panchatantra Short Stories in Hindi With Moral / चुड़ैल और बन्दर की कहानी

06 फरवरी 2020   |  अभिषेक पाण्डेय   (3386 बार पढ़ा जा चुका है)

Panchatantra Short Stories in Hindi With Moral Values एक जंगल में ढेर सारे जानवरों के साथ एक परी रहती थी। वह अपने एक छोटे से घर में रहती थी और जानवरों की खूब देखभाल करती थी।


जब भी जानवरों को किसी चीज की जरूरत पड़ती तो सबसे पहले वह मदद के लिए आती थी। जानवर परी से बहुत खुश रहते थे . एक दिन की बात है उस परी को ढूंढते हुए एक चुड़ैल उस जंगल में आई।


उसने अपने जादुई शक्ति से परी का घर पता कर लिया और वह परी के घर पर पहुंची। परी उसे देखते ही आश्चर्यचकित रह गई और उसने कहा ” मैंने तो तुम्हें कैद कर दिया था। तुम फिर कैसे छूटी ? ”


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” मुझे मेरे गुरु ने छुड़ाया और अब मैं तुम्हें कैद करूंगी ” चुड़ैल गुस्से में बोली और इतना कह कर उसने एक जादुई पिजड़े में परी को कैद कर लिया।

परी अपनी तमाम शक्तियों का प्रयोग करने लगी लेकिन वह जादुई पिंजड़ा टूटने का नाम ही नहीं ले रहा था। इसपर परी ने कहा, ” कोई बात नहीं। मेरे दोस्त मुझे जरूर बचा लेंगे। तुम मारी जाओगी। ”


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इस पर वह चुड़ैल खूब जोर से हंसी और कहा, ” अब मैं ऐसा करुँगी जिससे वे मुझे पहचान ही नहीं पाएंगे और तुम्हारे सामने ही उनके ऊपर अत्याचार करुँगी। ”

यह कहकर चुड़ैल ने अपना रूप बदला और परी के रूप में आ गई और उसके बाद वह जंगल में घूमने लगी और जानवरों को बहुत परेशान करने लगी।


वह किसी को वह मूर्ति बना देती तो किसी को पेड़ की डाल से चिपका देती तो किसी को पेड़ पर लटका देती थी। इससे जानवरों में परी का आतंक छा गया और वे परी से नफ़रत करने लगे।


उन्हें यह ज्ञात नहीं था कि परी नहीं बल्कि चुड़ैल है। परेशान होकर जंगल के सभी जानवरों ने एक मीटिंग की और परी का रूप धारण की चुड़ैल को भगाने का निर्णय लिया और यह कार्य शेर पर सौंपा गया।


शेर जंगल में इधर – उधर उस परी को ढूंढने लगा। कुछ देर बाद उसे परी मिल गयी। उसने एक हिरन को मूर्ति में बदल दिया था। यह देखकर शेर को बहुत गुस्सा आया।


चुड़ैल और बन्दर की कहानी


उसने परी से कहा कि तुम जानवरों को बहुत परेशान करने लगी हो इसीलिए सब जानवरों ने तुम्हें यहां से भगाने का फैसला एकमत से लिया है। तुम्हे तुरंत ही यह जंगल छोड़ना होगा।


इस पर परी बहुत तेज है हंसी और उसने शेर से से कहा तुम मुझे भगाओगे और इतना कह कर उसने उसे एक पेड़ पर टांग दिया और इसके बाद वह फिर वह परी के घर के पास गई।


उसने परी के घर को ही अपना निवास बना लिया था। वह रोज परी अपने द्वारा किये गए कुकर्मों को सुनाती। इससे परी को बहुत दुःख होता और वह रोने लगती। यह देखकर चुड़ैल खूब खुश होती और जोर – जोर से हंसती।


जब वह परी के घर के पास आ जाती तो वह परी का रूप छोड़कर चुड़ैल बन जाती। शेर को पेड़ पर टांगने के बाद वह जब परी के घर के पास आयी तो अपने रूप में आ गई और फिर घर में घुस गई।


एक चालाक बन्दर चुपके से उसका पीछा कर रहा था। उसे शक हो गया था कि यह परी नहीं बल्कि कोई और है। क्योंकि परी अचानक से इतनी कठोर नहीं हो सकती है।

चुड़ैल को रूप बदलते बंदर ने देख लिया और वह सारा माजरा समझ गया। उसने फिर एक उपाय लगाया और वह पीछे-पीछे परी के घर में घुस गया और चुड़ैल के पास आकर बोला, ” महारानी की जय हो। महारानी की जय हो। ”


बन्दर को देखते ही चुड़ैल गुस्सा हो गयी और क्रोध में बोली, ” बन्दर तू यहां कैसे आया ? तूने मेरा असली रूप जान लिया है। अब तेरा यहां से बाहर जाना मेरे लिए खतरनाक होगा। इसलिए अब तू यहीं पिजड़े में सड़ेगा। ”


यह सुनते ही बन्दर बोला, ” क्षमा क्षमा महारानी क्षमा। मैं तो बस यह बताने आया था कि मैं आपका शुभचिंतक हूं। मैं आपकी सेवा करना चाहता हूं। मुझे तो यह परी बिल्कुल पसंद नहीं। इसके यहां कैद होने से सबसे ज्यादा तो मैं खुश हूं क्योंकि यह मेरे ऊपर बहुत रौब जमाती थी। अपनी ताकत की धौंस दिखाती थी। ”


यह सुनकर परी को बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन वह कुछ कर पाने में असमर्थ थी। वह बस गुस्सा हो रही थी। यह देखकर चुड़ैल बड़ी प्रसन्न हुई, लेकिन उसे नहीं पता था कि यह बंदर की चाल है।


बंदर की चापलूसी भरी बातों से चुड़ैल बहुत खुश हुई और उसके बाद चुड़ैल और बंदर साथ-साथ रहने लगे और वे दोनों जानवरों को बहुत परेशान करने लगे।

चुड़ैल की नज़रों में अच्छा बनने के लिए बन्दर जानवरों को और भी अधिक सताता। उसे जानवरों के बारे में सबकुछ पता था इसलिए वह उन्हें अधिक परेशान करता।


इससे जंगल के जानवर बंदर से बेहद खफा हो गए लेकिन वह बंदर का कुछ नहीं कर सकते थे इसलिए चुप थे। धीरे-धीरे बंदर ने चुड़ैल का विश्वास जीत लिया और चुड़ैल उस पर अत्यधिक विश्वास करने लगी।


एक दिन उसने ऐसे ही बातों – बातों में कहा, ” आपने इस परी को कैसे कैद किया ? यह परी तो बड़ी ताकतवर थी। ” चुड़ैल बंदर पर बहुत विश्वास करती थी और उसने कहा कि मैंने एक जादुई शक्ति से इसे कैद कर लिया।


इसपर बन्दर ने चुड़ैल की खूब तारीफ़ की और अपनी चापलूसी भरी बातों में फँसाकर उसने चुड़ैल से कहा, ” यह शक्ति मुझे भी सिखा दो जिससे जानवरों को और भी अधिक परेशान कर सकूंगा। वे मुझे कभी मार नहीं पाएंगे और ना ही हरा पाएंगे। ”


चुड़ैल बन्दर की बातों में आ गयी और उसने कहा, ” ठीक है मैं यह तुम्हें सिखा दूंगी लेकिन इतना ध्यान रहे कि यह बहुत ही ताकतवर मंत्र है। मन्त्र पढ़ते समय बहुत सावधानी रखनी होती है।


इस मंत्र की एक खाशियत यह भी है कि जो कोई किसी को कैद करेगा सिर्फ वही उसे आज़ाद कर सकता है। दूसरा कोई उसे आज़ाद नहीं कर सकता।

इसपर बन्दर ने कहा ठीक है। मैं पूरा ध्यान रखूंगा। चुड़ैल ने बन्दर को मंत्र सीखा दिया। बन्दर बहुत खुश हुआ और उसने एक झटके में ही मंत्र से चुड़ैल को पिंजरे में कैद कर दिया।


यह मंजर देखते ही चुड़ैल घबरा गयी और परी हैरान रह गयी। दोनों को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। बन्दर खड़े – खड़े मुस्कुरा रहा था। यह देखकर चुड़ैल गुस्से से बोली, ” मुझे आज़ाद कर। ”


बन्दर ने कोई प्रतिक्रया नहीं दी। चुड़ैल अपनी तमाम शक्तियों का प्रयोग करने लगी लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ। यह देखकर बन्दर बोला, ” तुम्हारी शक्तियां इसमें काम नहीं करने वाली है। अब तुम परी और जंगल के जानवरों को मुक्त करो। तब मैं तुम्हें यहां से आजाद करूंगा। जबतक तुम उन्हें मुक्त नहीं करोगी तुम आज़ाद होने की बात भूल जाओ। ”


इस पर चुड़ैल बोली, ” मैं उन्हें किसी भी कीमत पर आज़ाद नहीं करुँगी। ” तब बन्दर ने तुरंत ही दिमाग लगाया और बोला, ” कोई बात नहीं मैं जाता हूँ। मैं यहाँ से सीधे अपने गुरु के पास जाऊंगा। वे इन्हे जानवरों को आज़ाद कर देंगे और हम परी को ऐसे ही अपने साथ रखेंगे लेकिन तुम्हे बहुत दुःख देंगे। ”


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यह सुनकर चुड़ैल घबरा गयी और बोली, ” ठीक है। मैं इन्हे आज़ाद करती हूँ , लेकिन वादा करो कि तुम भी मुझे आज़ाद कर दोगे। ” तब बन्दर बोला, ” निःसंदेह मैं तुम्हे आज़ाद कर दूंगा लेकिन तुम्हे यह जंगल छोड़कर जाना होगा। ”


चुड़ैल मान गयी और उसने सभी को आज़ाद कर दिया। अचानक से आज़ाद होते ही जानवरों में आश्चर्य छा गया। सभी आश्चर्यचकित रह गए। परी भी बहुत खुश हुई।

लेकिन बन्दर की योजना अभी पूरी नहीं हुई थी। सबको आज़ाद करने के बाद चुड़ैल ने बन्दर से कहा, ” अभी मैंने सबको आज़ाद कर दिया। अब मुझे भी आज़ाद करो। ”


तब बन्दर ने कहा, ” जरूर, लेकिन इसके लिए तुम्हे जंगल में जानवरों के बीच चलना होगा। मैं तुम्हे लेकर चलूँगा। जिससे मैं अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से मुक्त हो जाऊं। तुम तो चली जाओगी लेकिन मुझे इसी जंगल में रहना है। ”


इसके बाद बन्दर परी के साथ पिंजड़े में कैद चुड़ैल को लेकर जंगल में आता है और सबको पूरी बात बताता है। परी और चुड़ैल उसकी बातों की गवाही देती हैं।

जंगल के सारे जानवर बहुत खुश होते हैं। उसके बाद बन्दर ने कहा, ” इस चुड़ैल ने परी और जानवरों को बहुत परेशान किया। इसकी वजह से मुझे भी जानवरों को परेशान करना पड़ा। इसलिए अब चुड़ैल को सजा देने का वक्त आ गया है। ”


सभी जानवरों ने हामी भरी। चुड़ैल बहुत घबराने लगी और हाथ जोड़कर माफ़ी मांगने लगी। लेकिन सभी जानवर चुड़ैल से बहुत नाराज और क्रोधित थे।

उसके बाद बन्दर ने चुड़ैल को एक गुफा में बंद करने का फैसला किया। सभी जानवर इससे सहमत हो गए। उसके बाद बन्दर तथा अन्य जानवर चुड़ैल को जंगल के बाहर एक गुफा में कैद कर दिया।


उसके बाद सभी जानवर और परी पहले की तरह फिर से जंगल में रहने लगे। मोरल – इस कहानी से यही सीख मिलती है कि भगवान् के घर देर है अंधेर नहीं।




1- Hindi Short Stories For Class 3 With Moral / सच्चा शासक हिंदी कहानी

2- Panchatantra short stories in Hindi with moral values


Panchatantra Short Stories in Hindi With Moral / चुड़ैल और बन्दर की कहानी

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Panchatantra Short Stories in Hindi With Moral / चुड़ैल और बन्दर की कहानी

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