शुक्राणु दान की प्रक्रिया क्या होती है?

10 फरवरी 2020   |  पूजा शर्मा   (423 बार पढ़ा जा चुका है)

शुक्राणु डोनेट की प्रक्रिया कैसे होती है:-



शुक्राणु एक स्वस्थ पुरुष के द्वारा एक शुक्राणु बैंक या प्रजनन क्लिनिक के द्वारा महिला को दान किया जाता है।

डोनर स्पर्म का प्रयोग महिला के शरीर के अंदर एक अंडे को फर्टिल्लाइज़ करने के लिए किया जाता है।

इसे मुख्यता डोनर इन्सेमिनेशन केनाम से जाना जाता है।

शुक्राणु डोनेट की प्रक्रिया में शुक्राणु को एक अच्छी और सुरक्षित प्लास्टिक ट्यूब से गुजारा जाता है जो महिला के गर्भाशय ग्रीवा में प्रवेश करती है और महिला के गर्भ में पहुंच जाती है।

महिला के गर्भधारण की संभावना को बढ़ाने के लिए डोनर स्पर्म तभी दिया जाता है, जब महिला ओव्यूलेट करती हैं।

इस समय चिकित्सक आपको फर्टिलिटी ड्रग्स लेने की भी सलाह दे सकते हैं।

आईवीएफ के माध्यम से एक प्रयोगशाला में अंडे को फर्टिलाइज किया जाता है।

इसका अर्थ यह है कि महिला के अंडों को सर्ज़री के माध्यम से शरीर से बाहर निकालकर एक प्रयोगशाला में शुक्राणु द्वारा फर्टिलाइज किया जाता है।

उसके बाद अंडे को पुर्णरूप से विकसित होने के लिए गर्भ में फिर से वापस रख दिया जाता है।

यह ट्रीटमेंट परिणाम देने में समय लगा सकता है।


स्पर्म डोनर कितने पैसे कमा सकते हैं

स्पर्म डोनेशन के द्वारा पुरुष कितना पैसा कमा सकते हैं, यह प्राप्त करने वाले कपल और स्पर्म बैंक पर निर्भर करता है।

यह स्पर्म डोनर के नयन-नक्श, कद-काठी और योग्यता और शुक्राणुओं के स्वास्थ्य होने पर भी निर्भर करता है कि डोनर को कितने पैसे मिल सकते हैं।

एक स्पर्म डोनर 500 रुपये से लेकर 5000 तक अपना स्पर्म डोनेट कर के कमा सकता है।

भारत के महिला,पुरुष के जोडों को शुक्राणु डोनेट करने कि तुलना में यदि आप अपने शुक्राणु को किसी विदेशी जोड़े को डोनेट करते हैं, तो शुक्राणु दाता को अधिक कमायी होती है।

यदि कोई पुरुष बार-बार अपने स्पर्म का दान करता है तो वह कम से कम 40,000/ प्रति वर्ष आसानी से कमा सकता है।


अगला लेख: आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब शिशु अन्य आम शिशुओं से कैसे भिन्न होते हैं?



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