महिलाओं के लिए आईयूआई उपचार से पहले किए जाने वाले टेस्ट और जांच!

12 फरवरी 2020   |  बबीता राणा   (439 बार पढ़ा जा चुका है)


आईयूआई की प्रक्रिया की ओर रूख करने से पहले डॉक्टर की ओर से महिला को कई तरह के टेस्ट करने की सलाह दी जाती है। ये टेस्ट इसलिए किये जाते हैं ताकि प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की समस्या न हो और ट्रीटमेंट सफल हो सके।


1. सामान्य स्क्रीनिंग टेस्ट - संक्रामक, आनुवंशिक


संक्रामक स्क्रीन

आप और आपके साथी दोनों की संक्रामक रोग स्क्रीनिंग की जाती है। इनमें शामिल है, क्लैमाइडिया एंटीबॉडी , गोनोरिया , हेपेटाइटिस बी , हेपेटाइटिस सी , सिफलिस सीरोलॉजी, एचआईवी टेस्ट आदि।


प्री-प्रेगनेंसी स्क्रीनिंग

इसके अंतर्गत कम्पलीट ब्लड काउंट , ब्लड टाइप और आरएच फैक्टर , रूबेला टाइटर टेस्ट किए जाते हैं। ये टेस्ट गर्भावस्था के दौरान भ्रूण को गंभीर जटिलताओं और एनीमिया और अन्य संभावित विकारों से बचाने के लिए किए जाते हैं।


पिट्यूटरी/थायरॉइड स्क्रीनिंग

प्रोलैक्टिन, टीएसएच ,फ्री थायरोक्सिन, हार्मोनल परीक्षण गर्भावस्था को प्रभावित करने वाले असामान्यताओं का पता लगाते हैं।


जेनेटिक स्क्रीनिंग

टे सैक्स सिस्टिक फाइब्रोसिस ,सिकल सेल, के लिए टेस्ट किए जाते हैं। अगर आपका मेडिकल हिस्ट्री के अनुसार आपको आनुवंशिक , ओटो-इम्म्यून डिसीज़ या मेडिकल डिसीज़ का ख़तरा हो सकता है तो साइकिल शुरू करने से पहले अन्य टेस्ट कराने की भी सलाह दी जा सकती है।


पैप स्मीयर टेस्ट

ये टेस्ट सर्वाइकल कैंसर, सर्विक्स से जुड़ी अन्य समस्याओं या यौन संचारित रोगों का पता लगा सकता है। इनमें से कोई भी समस्या आपके गर्भवती होने में बाधा उत्पन्न कर सकती है।


2. ओवेरियन फंक्शन और ओवरयिन रिजर्व टेस्टिंग

लगभग 30-35 % महिला से संबंधित बाँझपन ओवेरियन डिसॉडर के कारण होता है। ऐसे में टेस्ट उद्देश्य हमें जानकारी देना है कि आप ओवुलेट कर रहे हैं या नहीं।

ओवरयिन रिजर्व टेस्टिंग के अंतर्गत निम्न टेस्ट किए जाते हैं : -


बेसलाइन अल्ट्रासाउंड

अल्ट्रासाउंड, पीरियड साइकिल के दूसरे, तीसरे या चौथे दिन किया जाता है। इससे अंडाशय के आकार, मात्रा और फॉलिकल की संख्या (मासिक धर्म चक्र के शुरुआती समय के अपरिपक्व अंडे) की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।


तीसरे दिन ब्लड वर्क

एफएसएच (FSH), एलएच (LH), ई2 (E2) टेस्ट किए जाते हैं। हार्मोन के स्तर जैसे कि फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन, ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन और एस्ट्राडियोल को

मासिक धर्म चक्र की शुरुआत में देखकर, डॉक्टर को एक महिला के डिम्बग्रंथि रिजर्व की जानकारी मिल मिलती है।


3. फॉलोपियन ट्यूब मूल्यांकन

फैलोपियन ट्यूब से जुड़े मुद्दे, महिला बांझपन की लगभग 30% समस्याओं का कारण हो सकते हैं। सामान्य समस्याएं ट्यूबल ब्लॉकेज या पिछले अनडायगनोस्ड पेल्विक संक्रमण से होने वाली स्कारिंग, पेट के संक्रमण जैसे एपेंडिसाइटिस , पहले हुई सर्जरी, एक्टोपिक प्रेगनेंसी या एंडोमेट्रियोसिस से संबंधित होती हैं।


हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी

एक एक्स-रे परीक्षण होता है, जिसमें योनि और सर्विक्स के माध्यम से एक पतली ट्यूब को अन्दर डालकर, गर्भाशय में कंट्रास्ट मटेरियल या डाई इंजेक्ट किया जाता है। इस टेस्ट से पता लगाया जाता है कि फॉलोपियन ट्यूब खुले हैं या फिर उनमें ब्लॉकेज है।


4. गर्भाशय का मूल्यांकन

गर्भाशय को एंडोमेट्रियम नामक कोशिकाओं की एक विशेष परत द्वारा पंक्तिबद्ध किया जाता है, जहां भ्रूण का प्रत्यारोपण होता है और गर्भावस्था में विकसित होना शुरू होता है। भ्रूण के आरोपण के संभावित दोषों या बाधाओं के लिए गर्भाशय गुहा का पूरी तरह से मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण होता है। डिफेक्ट्स के उदाहरण जैसे- यूटेरिन स्कार टिश्यू (पिछले गर्भधारण या प्रक्रियाओं से), पोलिप्स, फ़िब्रोइड्स और गर्भाशय में अन्य संरचनात्मक दोष ।


आपकी विशिष्ट स्थिति के आधार पर, मूल्यांकन में निम्नलिखित परीक्षण शामिल हो सकते हैं:


पेल्विक अल्ट्रासाउंड

आमतौर पर मेंस्ट्रुअल साइकिल शुरू होने के दूसरे, तीसरे या चौथे दिन पर पेल्विक अल्ट्रासाउंड किया जाता है। यह चिकित्सक को गर्भाशय गुहा की दिशा और लंबाई के बारे में जानकारी देता है।


हिस्टेरोस्लिंग्पोग्राम - एचएसजी

हिस्टेरोस्लिंग्पोग्राम - एचएसजी से गर्भाशय गुहा के बनावट से संबंधित दोषों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। सोनोहिस्ट्रोग्राफी / सोनोहिस्टोग्राम/सैलाइन सोनोग्राफी - यूटेरस में कम मात्रा में स्टेराइल फ्लूइड डालकर यूटरिन वॉल और इनर यूटरिन कैविटी का मूल्यांकन किया जाता है। यह परीक्षण यूटरिन वॉल और एंडोमेट्रियल कैविटी, दोनों की असामान्यताओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है।


डायग्नोस्टिक हिस्टेरोस्कोपी

परीक्षण आईवीएफ जैसे प्रजनन उपचार से गुज़रने वाली महिलाओं के लिए या जिन लोगों को सोनोहिस्ट्रोग्राफी पर संदेह है, उनके लिए सिफारिश की जाती है।


एंडोमेट्रियल बायोप्सी

एंडोमेट्रियल बायोप्सी टेस्ट केवल कुछ परिस्थितियों में एंडोमेट्रियम के विकास में समस्याओं का निदान करने के लिए किया जाता है, जिसे ल्यूटल फेज़ डिफेक्ट कहा जाता है या एंडोमेट्रियल लाइनिंग के संभावित संक्रमण का पता लगाने के लिए किया जाता है।

अगला लेख: ओवुलेशन स्पॉटिंग क्या है व कैसे करें पहचान!



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