रंग मंच

13 मार्च 2020   |  ललिता बोथरा   (273 बार पढ़ा जा चुका है)

जीवन एक रंग मंच है हम सारे कलाकार है ।मंच पर
आते हैं और अपना किरदार निभाते हैं और फिर चले जाते हैं।
जीवन रंग बिरंगे किरदारो से भरा हुआ है ।स्टेज बहुत छोटा है ईमानदारी से अपने आपको जीवित करना है।
करेक्टर में पूरी तरह उदारता नहीं दिखाई तो रंग मंच पर
सफल नहीं हो सकते। कोई हंसते हुए आता है तो कोई रोते हुए सब अपने कर्मों के अनुसार रोल करते हैं।
मेरा नाम जोकर फिल्म इतिहास में उदाहरण है।
इतनी मार्मिक ह्रदय को छु लेने वाली हैं। राजकपूर साहब के किरदार ने जैसे मुर्दों में भी जान डाल दी।।
जोकर बनकर बहुत हंसाया साथ ही दुसरो के लिए
जीना सिखाया।।

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