नवाब

17 मार्च 2020   |  ललिता बोथरा   (305 बार पढ़ा जा चुका है)

नवाब

नवाब (डांग) जब घर आया बच्चे बहुत खुश थे । लेकिन मैं खुश नहीं थी,शायद मैं यह सोच रही थी कि इसके आने पर मैं बंधन में बंध जाउंगी या उसके बालों को लेकर या कहीं जायेंगे तो इसे कोन रखेगा। बहुत बड़ी जिम्मेदारी लें ली। बहुत सारी बातें दिमाग़ में घूमने लगीं । कुछ नहीं होते हुए भी मुझे बहुत कुछ हो गया। कुछ दिन बाद नबाब को पढ़ाने को टीचर आया बहुत अच्छा जो नबाब को बहुत प्यार करने लगा नबाब भी उससे खुश रहता । कहते हैं सब अपनी अपनी किस्मत लिखवा कर लाते हैं।अब हम बाहर कई भी जाते हैं तो उसके पास छोड़ देते हैं कभी कभी ऐसा लगता है कि
मेरे हाथों किसी की सेवा में कमी रह गयी हो इसलिए नबाब के रूप में आया है।सब अपनी अपनी सोच के अनुसार पालते हैं। ये सारे पूर्व जन्म के सम्बन्ध होते हैं जो किसी न किसी रूप में मिल जाते हैं।

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khushboo
20 मार्च 2020

बहुत खूब।

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