तुम

17 मार्च 2020   |  रितिका दीक्षित गौतम   (1877 बार पढ़ा जा चुका है)


मैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँ

हाँ, मैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँ।

एक अरसे से साथ हैं हम, और इस साथ के बारे मे लिखती हूँ। मैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँ।

जानती हूँ कभी कहोगे नहीं तुम, पर

ये बात बहुत खुशी देती है तुम्हे, कि

मैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँ।

वो अहसास जो कुछ 18 साल पहले हुआ था,

वो अहसास आज भी मुकम्मिल है,

आज भी तुम्हारी आँखे, मेरे होंठो पे वही मुस्कान ले आतीं हैं।

वो तुम्हारा धीरे से मुस्कुराना, आज भी

मेरी आँखो में मुहब्बत भर देता है, और

ये बात इतनी खूबसूरत है, कि

मैं इस बात को लिखती हूँ,

मैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँ।

बात करने का अंदाज़ तुम्हारा,

आज भी वैसा ही है, और उस अंदाज़ पर

मेरा दिल बेकरार वैसा ही है,

एक दूसरे से बिल्कुलअलग से हम, आज भी

लेकिन एक जैसे ही हैं,

हाँ हम अलग हैं, पर बिल्कुल एक जैसे हैं

इस रिश्ते की, मजबूती को लिखती हूँ,

मैं अब भी तुम्हारे बारे मे लिखती हूँ।



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